अग्निपथ कविता हिन्दी में – Agnipath Poem in Hindi Language

Agnipath Poem in Hindi  – Agnipath Poem in Hindi – Agnipath Poem in Hindiअग्निपथ कविता हिन्दी में - Agnipath Poem in Hindi Language

 

  • अग्निपथ कविता हिन्दी में – Agnipath Poem in Hindi Language

 

  • अग्निपरीक्षा
    यह मन मदिरालय न बनने देना,
    यह तन घमंडी न होने देना,
    दो बात कहूँ, दो बात सुनूँ ,
    पग-पग पर ठोकर देते रहना,
    मेरी अग्निपरीक्षा लेते रहना।
    फूल चुनूँ तो कांटे लगे,
    अंगारों से मुझे कष्ट मिले,
    जीवन के कटु मोड़ों पर मुझको,
    काटों का महत्व समझाते रहना,
    मेरी अग्निपरीक्षा लेते रहना।
    पत्थर पैरों से आ भिड़े ,
    जो खून बहा सो खूब बहे,
    रक्त बहाने की काबिलियत मुझमें,
    बचपन से ही भरते रहना ,
    मेरी अग्निपरीक्षा लेते रहना।
    जीवन में कभी भटकूँ नहीं,
    इधर -उधर न जा पाऊं,
    जो मार्ग चूंकि बस वहीं चलूँ,
    मेरे नित अंतराल में मेरा ,
    पथ प्रदर्शित करते रहना ,
    मेरी अग्निपरीक्षा लेते रहना।
    – दिव्यांश द्विवेदी ‘दिव्य’
  • अग्निपथ
    वृक्ष हों भले खड़े,
    हों घने हों बड़े,
    एक पत्र छाँह भी,
    माँग मत, माँग मत, माँग मत,
    अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
    तू न थकेगा कभी,
    तू न रुकेगा कभी,
    तू न मुड़ेगा कभी,
    कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
    अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
    यह महान दृश्य है,
    चल रहा मनुष्य है,
    अश्रु श्वेत रक्त से,
    लथपथ लथपथ लथपथ,
    अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
    – हरिवंशराय बच्चन
  • agnipareeksha
    • yah man madiraalay na banane dena,
    yah tan ghamandee na hone dena,
    do baat kahoon, do baat sunoon ,
    pag-pag par thokar dete rahana,
    meree agnipareeksha lete rahana.
    phool chunoon to kaante lage,
    angaaron se mujhe kasht mile,
    jeevan ke katu modon par mujhako,
    kaaton ka mahatv samajhaate rahana,
    meree agnipareeksha lete rahana.
    patthar pairon se aa bhide ,
    jo khoon baha so khoob bahe,
    rakt bahaane kee kaabiliyat mujhamen,
    bachapan se hee bharate rahana ,
    meree agnipareeksha lete rahana.
    jeevan mein kabhee bhatakoon nahin,
    idhar -udhar na ja paoon,
    jo maarg choonki bas vaheen chaloon,
    mere nit antaraal mein mera ,
    path pradarshit karate rahana ,
    meree agnipareeksha lete rahana.
    – divyaansh dvivedee divy

 

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One comment

  1. ashutosh upadhyay

    yadi ye kvita ki line apko mil jay to plese mere pe bhej de mail par—ma na tnik der kar ahit mar gher kar devi path prsast kar satru vyah trast kar.

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