बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर 4 कविता – Beti Bachao Poems in Hindi Beti Padhao Kavita

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  • बेटी बचाओ कविता – Beti Bachao Poems

 

  • बेटी है जग का आधार
    जब माँ हीं जग में न होगी
    तो तुम जन्म किससे पाओगे ?……..
    जब बहन न होगी घर के आंगन में
    तो किससे रुठोगे, किसे मनाओगे ?………
    जब दादी-नानी न होगी
    तो तुम्हें कहानी कौन सुनाएगा ?…
    जब कोई स्वप्न सुन्दरी हीं न होगी
    तो तुम किससे ब्याह रचाओगे ?……
    जब घर में बेटी हीं न होगी
    तो तुम किस पर लाड लुटाओगे ?…..
    जिस दुनिया में स्त्री हीं न होगी
    उस दुनिया में तुम कैसे रह पाओगे ?……
    जब तेरे घर में बहु हीं न होगी
    तो कैसे वंश आगे बढ़ाओगे ?…..
    नारी के बिन जग सूना है
    तुम ये बात कब समझ पाओगे ?….
    – अभिषेक मिश्र ( Abhi )
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  • जमाने की ये कहानी
    कहती है एक लड़की जमाने की ये कहानी
    जन्म लड़की का मिला है यही है उसकी नादानी
    सभी कहते है ये उससे तेरी मुस्कान बड़ी सुदंर
    मगर ये रीत कैसी है वो बाहर हसँ नही सकती।
    है वो सपनो की दुनिया मे है चाहत चाँद छूने की
    जमाने की ये हरकतें है बेड़ी उसकी राह की
    कुछ कहते हैं, लड़की है कहाँ जायेगी ये अकेली
    कोई  कहता है दुनिया है नही बाहर निकलने की।
    कोई कहता संभल चलना तू इज्जत है दो घरो की
    घर वाले सभी कहते राजकुमारी है हमारी
    कोई कहता के नाजुक सी कली मेरे घरौदे की
    मगर ये है कली कैसी जो कभी  खिल नही सकती।
    – Kratika Sharma

 

  • बेटी बचाओ
    कहती है बेटी हमें निहार
    मुझे चाहिए प्यार दुलार।
    बेटियों को क्यों
    प्यार नहीं करता संसार।
    सोचिये सभी क्या बेटी बिना
         बन सकता है घर परिवार।
    बचपन से लेके जवानी तक
          मुझ पर लटक रहा तलवार।
    मेरे दर्द और वेदना का
    कब होगा स्थाई उपचार।
    बढ़ते पानी में मैं बह गई
    कौन करेगा नदी के पार।
    मैं बेटी माता भी मैं हूँ
          मैं ही दुर्गा काली अवतार।
    मेरे प्यार में सभी सुखी हैं
          मेरे बिना धरती अंधियार।
    बेटी की दर्द और वेदना का
    कब होगा स्थाई उपचार।
    – कोमल यादव
    खरसिया,रायगढ़(छ0ग0)

 

  • बेटा-बेटी सभी पढ़ेंगे
    नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुई पुरानी।
    बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
    बेटी-युग में बेटा-बेटी,
    सभी पढ़ेंगे, सभी बढ़ेंगे।
    फौलादी ले नेक इरादे,
    खुद अपना इतिहास गढ़ेंगे।
    देश पढ़ेगा, देश बढ़ेगा, दौड़ेगी अब, तरुण जवानी।
    बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
    बेटा शिक्षित, आधी शिक्षा,
    बेटी शिक्षित पूरी शिक्षा।
    हमने सोचा, मनन करो तुम,
    सोचो समझो करो समीक्षा।
    सारा जग शिक्षामय करना,हमने सोचा मन में ठानी।
    बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
    अब कोई ना अनपढ़ होगा,
    सबके हाथों पुस्तक होगी।
    ज्ञान-गंग की पावन धारा,
    सबके आँगन तक पहुँचेगी।
    पुस्तक और पैन की शक्ति,जगजाहिर जानी पहचानी।
    बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
    बेटी-युग सम्मान-पर्व है,
    ज्ञान-पर्व है, दान-पर्व है।
    सब सबका सम्मान करे तो,
    जीवन का उत्थान-पर्व है।
    सोने की चिड़िया बोली है, बेटी-युग की हवा सुहानी।
    बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
    – आनन्द विश्वास

 

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