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हिन्दी कविता के नौ रस – 9 Ras in Hindi Poetry kavita poems paribhasha with example

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हिन्दी कविता के नौ रस - 9 Ras in Hindi Poetry kavita poems paribhasha with example

 

  • ______________ रस निरूपण – 9 Ras in Hindi Poetry _____________

 

  • रस का शाब्दिक अर्थ है – निचोड़। वस्तुतः काव्य को पढ़कर या सुनकर, और नाटक को देख कर सहृदय श्रोता , पाठक या के के चित्त में जो लोकोत्तर आनंद उत्पन्न होता है वही रस है। यह आनन्द अर्थात् रस लौकिक न होकर अलौकिक होता है। रस काव्य की आत्मा है। इस रक़्स की निष्पत्ति के लिए भारत मुनि ने जो सूत्र दिया है वह इस प्रकार है :-
    विभानुभाव व्यभिचारिसंयोगात रसनिष्पत्ति
    अर्थात विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
    ____विभाव____
    “विभाव” का अर्थ होता है रसानुभूति के कारण। या यूँ कहिये की किसी के हृदय में उपस्थित स्थायी भाव को जागृत कर उन्हें महसूस कराने का कारण।
    __अनुभाव__
    “अनुभाव” का अर्थ है, वो शारीरिक चेस्टाएँ जो भाव के उत्पन्न होने पर दृश्य होती हैं। जैसे प्रेमी से अत्यधिक समय के बाद पुनर्मिलन पर रति का भाव उतपन्न होता है, परिणामस्वरूप, प्रेमिका की आंखों में आंसू तथा देह में कंपन होता है। इन परिणामों को अनुभाव कहते हैं
    ____व्यभिचारी भाव___
    जो रसों में नाना रूप से विचरण कर के उन्हें और पुष्ट बनाते हैं, उन्हें व्याभिचारी भाव कहते हैं। इनकी संख्या 33 मानी गयी है।
    ◆◆◆◆◆रसों के भेद (ras ke bhed with example in hindi)◆◆◆◆◆◆
    रसों के नौ भेद बताए गए हैं, किन्तु किसी किसी आचार्यों ने इन्हें 11 भी बताया है।

    ◆ श्रृंगार रस shringar ras ki paribhasha :—

    इसका स्थायी भाव “रति” है। नायक – नायिका सामान्यतः आलंबन विभाव होते हैं। कटाक्ष, चुम्बन, आलिंगन आदि इसके अनुभाव हैं। हर्ष, लज्जा उत्सुकता आदि इसके संचारी भाव हैं।
    श्रृंगार रस के दो भेद हैं – संयोग श्रृंगार तथा वियोग श्रृंगार। नायक नायिका के मिलन की स्तिथि में संयोग श्रृंगार होता है और वियोग की स्तिथि में वियोग श्रृंगार। example of shringar ras in hindi जैसे:-
    कहत नटत रीझत खीझत मिलत खिलत लजियात।
    भरे  भौन  में  करत  हैं,  नैनन  ही  सों  बात।। ( संयोग श्रृंगार)
    पिऊ से कह संदेसड़ा, है भौंरा है काग।
    जेहि धन विरहन जरि मुई, तेहिक धुआँ हमें लाग।।( वियोग श्रृंगार)

    ◆वीर रस veer ras ki paribhasha:—

    इसका स्थायी भाव “उत्साह” है। शत्रु सामान्यतः आलंबन होता है। लाल नेत्र, दर्पयुक्त वाणी आदि इसके अनुभाव हैं। धृति, उग्रता आदि संचारी भाव इसे पुष्ट करते हैं। example of veer ras in hindi जैसे:-
    प्रतिभट कटक कटीले केते काटी काटी,
    कलिका की किलकि कलेऊ देती काल को।

    ◆करुण रस karun ras ki paribhasha:-

    इसका स्थायी भाव “शोक” है। हीनावस्था सामान्यतः आलंबन विभाव होती है। रुदन, भूमि पतन आदि अनुभव हैं। चिंता, जड़ता आदि संचारी भाव हैं। karun ras example in hindi जैसे:-
    करुणे, क्यों रोती है? उत्तर में और अधिक तू रोई।
    मेरी विभूति है जो, उसको भवभूति क्यों कहे कोई?       (मैथिलीशरण गुप्त)

    ◆अद्भुत रस adbhut ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “विस्मय” है। सामान्यतः अलौकिक कार्य या वस्तु विभाव है। स्तंभ, रोमांच आदि अनुभाव हैं। हर्ष आदि संचारी भाव हैं। adbhut ras example in hindi जैसे:–
    आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा किसे उतरे पार।
    राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।।

 

  • ◆रौद्र रस roudra ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “क्रोध” है। शत्रु सामान्यतः विभाव है। गर्जन, कंपन आदि अनुभाव हैं। मद, उग्रता आदि इसके पोषक संचारी भाव हैं। example of roudra ras in hindi जैसे :–
    श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे।
    सब शील अपना भूल कर करतल युगल मलने लगे॥
    संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े।
    करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठ कर खड़े॥

    ◆वीभत्स रस vibhatsa ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “घृणा” है। मांस रुधिर चर्बी इत्यादि सामान्यतयः विभाव हैं। मुंह बचकाना, नाक सिकोड़ना आदि अनुभाव हैं। विषाद, निर्वेद आदि संचारी भाव हैं। example of vibhatsa ras in hindi जैसे:—
    ‘विष्टा पूय रुधिर कच हाडा।
    बरषइ कबहुं उपल बहु छाडा।।’

 

  • ◆भयानक रस bhyanak ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “भय” है। भयानक वस्तु अथवा पुरुष साधारणतः विभाव हैं। चीखना चिल्लाना अनुभाव हैं।
    शंका चिंता आदि संचारी भाव हैं। example of bhyanak ras in hindi  जैसे:—
    अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल
    कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार

    ◆शांत रस shant ras ki paribhasha:—-

    इसका स्थायी भाव “निर्वेद” है। संसार बोध, परमात्म चिंतन आदि विभाव हैं। रोमांच, संसार भीरुता आदि अनुभव हैं। हर्ष, धृति मति आदि संचारी भाव हैं। example of shant ras in hindi  जैसे :—
    जब मै था तब हरि नहिं अब हरि है मै नाहिं।
    प्रेम गली अति साँकरी, त म ओ न समाहीं ।।

 

  • ◆वात्सल्य रस vatsalya ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “वात्सल्य प्रेम” है। बालक विभाव है। अंगस्पर्श चुम्बन आदि अनुभाव हैं। हर्ष गर्व चिंता आदि संचारी भाव हैं। example of vatsalya ras in hindi जैसे:—
    सन्देसो देवकी सों कहियो।
    हौं तो धाय तिहारे सुत कि कृपा करत ही रहियो।
    तू तौ टेव जानि तिहि है हौ तऊ, मोहि कहि आवै।
    प्रात उठत मेरे लाल लडैतहि माखन रोटी भावै।।

    ◆भक्ति रस bhakti ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव है ” भगवान विषयक रति”। विभाव भगवान हैं। अश्रु रोमांच आदि अनुभाव हैं। हर्ष मति आदि संचारी भाव हैं। example of bhakti ras in hindi जैसे :–
    अँसुवन जल सिंची-सिंची प्रेम-बेलि बोई।
    मीरा की लगन लागी, होनी हो सो होई।।
    – अंशु प्रिया ( Anshu priya)

 

Types of Noun in Hindi & English || संज्ञा के प्रकार और परिभाषा definition sangya prakar

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Types of Noun in Hindi & English || संज्ञा के प्रकार और परिभाषा definition sangya prakar

  • NOUN

 

  • What is noun ( noun kya hai ) ?

    Noun indicates the name of a person, things, place, community, animals etc.(  kisi prani, byakti,wastu, shtan athva bhav ko noun ya sangya kehte hain).
    Example: jaise 1) Lucknow is the capital of Uttar Pradesh. ( Uttar Pradesh ki rajdhani Lucknow hai).
    2) Mahima sings a song ( Mahima geet gati hai )
    3) Ganga is a sacred river ( Ganga ek pavitra nadi hai ).
    4) Tiger is the national animal ( Bagh ko rashtriya pashu kaha jata hai).
    Yeah 4 example me Lucknow  aur Uttar Pradesh ek jagah ka name, Mahima ek ladki ka name, Ganga ek nadi ka name aur Tiger ek prani ka name darshate hai. To en sabko hum noun yani sangya kehte hai.

  • Classification of Noun

    There are five types of Noun.

    They are 1) Proper noun ( Vyaktiwachak sangya )
    2) Common noun ( Jatiwachak sangya )
    3) Abstarct noun ( Bhavwachak sangya )
    4) Collective noun ( Samuhwachak sangya )
    5) Compound noun ( Yaugik sangya )

  • 1.        Proper noun :

    Proper noun denotes specified name of things, place or person ( kisi visesh vastu, vyakti ya shthan ka bodh karanewale shabd byaktiwachak sangya kehlate hai )
    Example: a. Ram and Shiva are doing their homework.
    1. Ganga river originates from Himalaya.
    2. Chandigarh is the capital city of Punjab.
    Here the name Ram , shiva, Ganga, Himalaya, Chandigarh and Punjab are all denotes specification of names ( yaha ram, shiva, ganga,Himalaya ,Chandigarh aur Punjab kisi byakti  aur shthan ka nam darshate hain )

  • 2. Common noun :

    It denotes the non specific of people, places and things ( kisi ek hi jati ke sabhi pranio, vastuo, shthano ka bodh karanewale shabd jatiwachak sangya kehlate hain)
    Example : India is our motherland .
    she is the first girl of our class.
    There are lots of stories in my text book.
    Here India, motherland, first girl, class, stories, text book are all example of common noun ( yaha India, motherland, first girl, class, stories aur text book jatiwachak sangya ka bodh darshate hain)

 

  • 3. Abstract noun :

    It denote happiness, anger, love, sympathy, kindness etc of a living things are called abstract noun ( kisi jiwit byakti ebam pashu ke guun, dosh, pyar, samvedna ke vab ka bodh karena wale shabd vabwachak sangya kehlate hain )
    Example : a . Spread love, don’t hatred.
    Show the sympathy to the poor .
    Mother is symbol of love, care and happiness.
    Here the expression love, hatred, sympathy, care denotes abstract noun ( yaha love, hatred, sympathy, care and happiness jo mehsus kar sakte hain usko  abstract noun kehlate hain )

    4.Collective noun :

    It denotes a group of people, places and things ( jo shabd kisi samuh ya samuday ka bodh karwate hain, unhe samuhwachak sangya kehte hain )
    Example : a. A herd of sheep
    1. A colony of ants.
    2. A bunch of flowers
    here herd, colony,bunch denote the example of collective noun ( yaha herd , colony ebam bunch collective noun ka bodh karwate hain)

 

  • 5. Compound noun :

    It is a combination of two or more than two words complete a word called compound noun ( do shabd ya do se adhik shabd jor ke jo shabd banta hain usiko compound noun ya yaugik sangya kehte hain )
    Example: a . we are playing in the school- ground.
    1. Sir is writing in the blackboard.
    2. She is my grandmother.
    In this example school ground, blackboard and grandmother are the words of combination of two words ( yaha school ground, blackboard aur grandmother do shabd se bane hue se words hain. Isko yaugik sangya kehte hain)

 

भारत की 24 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट UGC’s Fake University List 2018 in hindi

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भारत की 24 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट UGC’s Fake University List 2018 in hindi 

  • अगर आप भी इस वर्ष किसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने जा रहे हैं तो इन 24 Universities की लिस्ट को देख लीजिए. ये हैं भारत की 24 फर्जी यूनिवर्सिटी जिनकी डिग्री मान्य नहीं होगी. इसलिए अगर आप इनमें से किसी भी विश्वविद्यालय में नामांकन करवाते हैं,University के किसी भी जाली college में नाम लिखवाते हैं, तो आपका पैसा भी बर्बाद होगा,University के किसी भी जाली college में नाम लिखवाते हैं. तो आपका समय भी बर्बाद होगा और डिग्री की मान्यता भी नहीं होगी.

 

  • UGC University Grant Commision पूरे देश में संचालित यूनिवर्सिटीज को मान्यता देता है, और जो यूनिवर्सिटी यूजीसी से मान्यता प्राप्त नही है वे फर्जी होते हैं. इन यूनिवर्सिटीज से हांसिल की गई कोई भी डिग्री कहीं भी मान्य नहीं होती है. यूजीसी ने एकेडमिक ईयर शुरू होने के पहले ही फर्जी यूनिवर्सिटीज की लिस्ट जारी कर दी है ताकि छात्रों का भविष्य खराब न हो. फेक यूनिवर्सिटीज ने अब तक ढेरों छात्रों का भविष्य बर्बाद किया है. इसलिए एडमिशन लेने से पहले इस लिस्ट को एक बार अच्छे से देख ललीजिये.
    2018 की फर्जी यूनिवर्सिटीज की लिस्ट-
  • कॉमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, नई दिल्ली
    ( Commercial University Ltd., Daryaganj, Delhi )
  • यूनाईटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

    ( United Nations University, Delhi. )

  • वोकेशनल यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
    ( Vocational University, Delhi. )
  • एडीआर-सेंट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
    ( ADR-Centric Juridical University, ADR House, 8J, Gopala Tower, 25 Rajendra Place, New Delhi – 110 008 )
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
    ( Indian Institute of Science and Engineering, New Delhi. )
  • विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लाइमेंट रोजगार सेवासदन, नई दिल्ली
    ( Viswakarma Open University for Self-Employment, Rozgar Sewasadan, 672, Sanjay Enclave, Opp. GTK Depot, Delhi-110033. )
  • आध्यात्मिक विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
    ( Adhyatmik Vishwavidyalaya (Spiritual University), 351-352, Phase-I, Block-A, Vijay Vihar, Rithala, Rohini, Delhi-110085 )
  • बडागानवी सरकार वर्ल्ड ओपन यूनिवर्सिटी एजुकेशन सोसाइटी, बेलगाम कर्नाटक
    ( Badaganvi Sarkar World Open University Education Society, Gokak, Belgaum, Karnataka.)
  • सेंट जॉन विश्वविद्यालय, कृष्णटम केरल
    ( St. John’s University, Kishanattam, Kerala. )
  • राजा अरेबिक यूनिवर्सिटी, नागपुर
    ( Raja Arabic University, Nagpur, Maharashtra. )
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन, कोलकाता
    ( Indian Institute of Alternative Medicine, Kolkatta. )
  • इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, कोलकाता
    (Institute of Alternative Medicine and Research,8-A, Diamond Harbour Road, Builtech inn, 2nd Floor, Thakurpurkur, Kolkatta – 700063 )
  • महिला ग्राम विद्यापीठ/विश्वविद्यालय (वीमेन्स यूनिवर्सिटी), प्रयाग, इलाहाबाद यूपी
    ( Mahila Gram Vidyapith/Vishwavidyalaya, (Women’s University) Prayag, Allahabad, Uttar Pradesh. )
  • मैथिली विश्वविद्यालय, दरभंगा बिहार
    ( Maithili University/Vishwavidyalaya, Darbhanga, Bihar )
  • वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी (यूपी)/ जगतपुरी, दिल्ली
    ( Varanaseya Sanskrit Vishwavidyalaya, Varanasi (UP) Jagatpuri, Delhi. )
  • गांधी हिंदी विद्यापीठ, प्रयाग इलाहाबाद
    ( Gandhi Hindi Vidyapith, Prayag, Allahabad, Uttar Pradesh. )
  • नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ इलेक्ट्रो कॉम्प्लेक्स होम्योपैथी, कानपुर, यूपी
    ( National University of Electro Complex Homeopathy, Kanpur, Uttar Pradesh. )
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी (ओपन यूनिवर्सिटी), अचलताल अलीगढ़, यूपी
    ( Netaji Subhash Chandra Bose University (Open University), Achaltal, Aligarh, Uttar Pradesh. )
  • उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय कोसीकला मथुरा, यूपी

    ( Uttar Pradesh Vishwavidyalaya, Kosi Kalan, Mathura, Uttar Pradesh. )

  • महाराणा प्रताप शिक्षा निकेतन विश्वविद्यालय, प्रतापगढ़, यूपी
    ( Maharana Pratap Shiksha Niketan Vishwavidyalaya, Pratapgarh, Uttar Pradesh. )

 

  • इन्द्रप्रस्थ शिक्षा परिषद, इंस्टीट्यूशनल एरिया, खोड़ा, माकनपुर, नोएडा (यूपी)
    ( Indraprastha Shiksha Parishad, Institutional Area,Khoda,Makanpur,Noida Phase-II, Uttar Pradesh. )
  • नव भारत शिक्षा परिषद अन्नपूर्णा भवन, शक्तिनगर राउरकेला
    ( Navbabharat Shiksha Parishad, Anupoorna Bhawan, Plot No. 242, Pani Tanki Road,Shaktinagar, Rourkela-769014. )
  • नार्थ ओडीसा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, उड़ीसा
    ( North Orissa University of Agriculture & Technology, Odisha. )
  • स्री बोधी एकडमी ऑफ हायर एजुकेशन, पुडुचेरी
    ( Sree Bodhi Academy of Higher Education, No. 186, Thilaspet, Vazhuthavoor Road, Puducherry-605009 )

 

शिक्षक के लिए 20 टिप्स Skill development tips for teacher in hindi teaching competition

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शिक्षक के लिए 20 टिप्स Skill development tips for teacher in hindi for teaching

 

  • गुणात्मक शिक्षा हेतु अध्यापक में कौशल विकास
  • गुणात्मक शिक्षा का अर्थ है छात्र का चहुंमुखी विकास। कौशल विकास का अर्थ है शिक्षक द्वारा विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार करना, जिसमें बच्चे अपने अनुभवों के आधार पर शिक्षक के सहयोग से ज्ञान का सृजन कर सकें।
  • शिक्षक अपने अध्यापन कौशल के माध्यम से बालकों के सीखने की क्षमता में अपेक्षित संवर्द्धन कर कक्षा-कक्ष में आनन्ददायी शैक्षिक वातावरण तैयार कर सकता है।
  • वर्तमान समय में केन्द्र सरकार व राज्य सरकार ने विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण सुधार हेतु बाल केन्द्रित शिक्षण विद्या एवं शैक्षणिक उपलब्धियों में समतुल्यता के सरोकारों के आधार पर गुणात्मक बदलाव की रूप रेखा तैयार की है इस योजना के विकल्पों को शिक्षक ही अपने अध्यापन कौशल से जमीनी स्तर पर मूर्त रूप प्रदान कर, लक्ष्यों के अनुरूप गुणवत्ता को सही मायनों में स्थापित कर सकता है। वर्तमान समय में शिक्षा में जिस स्तर पर बदलाव अपेक्षित है इसकी नींव विकेन्द्रित रूप से क्षमताओं के विकास और शिक्षक कौशल विकास के द्वारा ही रखी जा सकती है।
  • गुणात्मक शिक्षा चिंतन और सीखने से संबंधित प्रक्रिया के सिद्धांतों पर आधारित है। शिक्षक अध्यापन कौशल से कक्षा-कक्ष में आनन्ददायी वातावरण बनाकर बच्चों के साथ आत्मियता व मित्रता पूर्ण व्यवहार अपनाकर भयमुक्त वातावरण बनाकर खेल विधि व गतिविधि आधारित शिक्षण करवाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। एक आदर्श शिक्षक का कौशल छात्र के स्वयं करके सीखने की प्रक्रिया में सहयोग करता है।
  • अध्यापन कौशल वह विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जिसे अध्यापक कक्षा-शिक्षण क्रम की विभिन क्रियाओं से संबंधित उपयोग करता है।

 

  • शिक्षक गुणात्मक शिक्षा में अपनी अहंम भूमिका अदा कर सके इसके लिए उसके शिक्षण कार्य में निम्न कौशलों का होना अत्यआवश्यक है।
  1. उद्दीपन भिन्नता कौशल-शिक्षक को अपनी अध्यापन क्रियाओं को समय≤ पर बदलकर विद्यार्थियों का ध्यान पाठ्य-वस्तु में केन्द्रित कराने का प्रयास करना चाहिये जिससे विद्यार्थियों का ध्यान विषय वस्तु पर आकर्षित हो सके।
  2. विन्यास प्रेरणा कौशल-शिक्षक को पाठ की प्रकृति के आधार पर अभिविन्यास कौशल का विकास कर बच्चों का ध्यान पाठ्य-वस्तु की तरफ केन्द्रित करना चाहिये।
  3. समीपता कौशल-शिक्षक को पाठ्य-वस्तु का संक्षेपीकरण करके विद्यार्थियों का ध्यान विषय वस्तु की ओर आकर्षित कर स्वःअध्ययन के प्रति प्रेरित करना चाहिये।
  4. मौन व अशाब्दिक अन्तः प्रक्रिया कौशल-कक्षा-कक्ष में शिक्षक को शाब्दिक क्रिया के साथ-साथ अशाब्दिक अन्तःप्रक्रिया-संकेत व हाव-भाव का प्रयोग कर विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य के प्रति प्रोत्साहित करना चाहिये।
  5. पुनर्बलन-कौशल-शिक्षक को शिक्षण कार्य को आनन्ददायी बनाने के लिऐ बच्चों के सकारात्मक व्यवहारों की प्रशंसा कर उनकी अनुक्रियाओं को स्वीकार कर व मान्यता देकर उनके पुनर्बलन को बढ़ाना चाहिये।
  6. प्रश्नों की प्रवाहशीलता कौशल- कक्षा-कक्ष में छात्र-शिक्षक में प्रश्नोत्तर के संवाद में प्रवाहशीलता व शिक्षण की प्रभावशीलता होनी चाहिये।
  7. खोजपूर्ण प्रश्न कौशल-कक्षा शिक्षण में कई बार शिक्षक के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर विद्यार्थी नहीं दे पाते हैं उस समय शिक्षक को उस प्रश्न के सहायक प्रश्नोत्तर करने चाहिये जिससे विद्यार्थी को उन से मूल प्रश्न का उत्तर खोजने में सहायता मिल सके।
  8. विद्यार्थी व्यवहार का अभिज्ञान कौशल- एक प्रभावशाली शिक्षक को अधिक संवेदनशील होना चाहिये।
    शिक्षक को विद्यार्थियों की रूचिकर क्रियाओं के प्रति व्यवहार को पहचानकर शिक्षण कार्य करवाना चाहिये।
  9. दृष्टांत देना व उदाहरणों का प्रयोग कौशल- शिक्षण कार्य को प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षक को गतिविधि आधारित शिक्षण करवाते हुए दृष्टांत व उदाहरणों का प्रयोग करना चाहिये ताकि विद्यार्थियों को सीखने में सुगमता प्राप्त हो सके।
  10. व्याख्या कौशल- शिक्षक को शिक्षण कार्य करवाते हुए तथ्यों में बोधगम्यता का ध्यान रखते हुए नियम व सिद्धांतों के आधार पर सरलात्मक शब्दों में व्याख्या करनी चाहिये।
  11. विद्यार्थियों की सहभागिता कौशल- शिक्षक को शिक्षण कार्य में बच्चों की अनुशासनात्मक व सकारात्मक सहभागिता को बनाये रखने के लिए सरल प्रश्नोत्तर करना, स्वयं करके सीखने में उनकी मदद करना, नयेपन के लिए प्रोत्साहित करना, उनकी जिज्ञासा को शांत करना तथा उनके व्यवहार को स्वीकार करना व उनके अनुभवों को शिक्षण में शामिल करना चाहिये।
  12. अनुदेशन- उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में मिलने का कौशल- शिक्षक के अध्यापन करवाते समय पाठ्य वस्तु के उद्देश्यों का चयन कर, विषय वस्तु का विश्लेषण कर निर्धारित लक्ष्य का व्यावहारिक रूप प्रदान करना चाहिये।
  13. श्याम-पटृ का प्रयोग कौशल- श्याम पटृ शिक्षक का दाहिनां हाथ कहलाता है। यह अध्यापन में दृश्य साधन के रूप में सर्वाधिक प्रयोग में आता है। अध्यापन कार्य में इसका उचित, सही व विधिपूर्वक प्रयोग कर पाठ्य वस्तु को प्रभावशाली बनाने में शिक्षक को निपुण होना चाहिये।
  14. कक्षा व्यवस्था का कौशल- शिक्षक को स्थानीय स्तरानुसार भौतिक, सामाजिक और शैक्षिक क्रियाओं व संसाधनों की समुचित व्यवस्था कर शिक्षण अधिगम के लिए उपयुक्त वातावरण बनाना चाहिये।

  15. दृश्य-श्रव्य सहायक सामग्री का उपयोग कौशल- शिक्षण को प्रभावशाली बनाने व पाठ्य वस्तु को बोधगम्य बनाने के लिए सहायक सामग्री का उपयोग करना चाहिये जिससे पाठ्य वस्तु रूचिकर बनती है और उद्देश्यों की प्राप्ति में मदद मिलती है।
  16. गृह कार्य देने का कौशल- शिक्षक को पर्यवेक्षण अध्यापन को प्रोत्साहित करते हुए विद्यार्थियों को पाठ्य वस्तु की व्यवस्था व परिपाक के आधार पर गृह कार्य देना चाहिये जिससे छात्रों में शिक्षण के प्रति रूचि बढ़े और लेखन कार्य में त्रुटि सुधार कार्य पूर्ण हो।
  17. विद्यार्थियों को साथ लेकर चलने का कौशल- कक्षा-शिक्षण में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में रखकर सामूहिक शिक्षण कार्य करवाना चाहिये।
  18. उच्च स्तरीय व विकेन्द्र प्रश्नों का प्रयोग कौशल- शिक्षक को कक्षा शिक्षण में विद्यार्थियों से नियमों, प्रत्ययों व सिद्धांतों के अनुरूप प्रश्नोत्तर करने चाहिये जिससे छात्रों में सामान्यीकरण व सजृनात्मक चिन्तन का विकास हो सके।
  19. व्याख्यान-संप्रेषण की पूर्णता का कौशल- शिक्षक को शिक्षण की समुचित प्रविधियों व युक्तियों का प्रयोग करते हुए पाठ्यवस्तु का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण करना चाहिये तथा उसे शुद्ध रूप में विद्यार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिये।
  20. नियोजित पुनरावृति कौशल- शिक्षक को शिक्षण कार्य के अन्त में खास बिन्दुओं की नियोजित रूप से पुनरावृति करनी चाहिये।

 

  • इस प्रकार गुणात्मक शिक्षण कार्य में शिक्षक अपने अध्यापन की क्रिया में बच्चों से प्रश्न पूछता है, व्याख्या करता है, समझाता है व सहायक सामग्री को बच्चों के सम्मुख प्रदर्शित करता है। वह छात्रों को शिक्षण कार्य में भाग लेने व प्रश्नोत्तर करने के लिए प्रेरित करता है। छात्रों में ज्ञान प्राप्त करने व स्वयं करके सीखने की आकांक्षा उत्पन्न करता है। छात्रों की भावनाओं और दृष्टिकोणों को पहचानता है। छात्रों की क्रियाओं व उपलब्धियों का मूल्यांकन व आंकलन करता है। एक आदर्श शिक्षक अपने अध्यापन कौशलों का उचित समय पर उचित प्रयोग करते हुए छात्र के चहुंमुखी विकास में शिक्षण कार्य का योगदान दे सकता है।
  • रामचन्द्र स्वामी (अध्यापक)
    रा.उ.मा.वि., नत्थूसर गेट, बीकानेर।
    मो. 9414510329

 

पोखरण परमाणु परीक्षण इतिहास Pokhran Nuclear test history in Hindi parmanu

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पोखरण परमाणु परीक्षण इतिहास Pokhran Nuclear test history in Hindi parmanu

 

  • 11 मई 1998 को भारत ने 3 परमाणु हथियारों का परीक्षण किया. दो दिन बाद और दो परमाणु परीक्षण किए गए. पाँचों परीक्षण सफल रहे.
  • इन सफल परीक्षणों के बाद देश में जश्न का माहौल था.
  • इसके बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र घोषित कर दिया.

  • इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘जय जवान, जय किसान’ और ‘जय विज्ञान’ का नारा दिया.
  • इससे पूर्व के परमाणु परीक्षणों के बारे में अमेरिका को भनक लग जाती थी.
  • 24 वर्ष तक इन परीक्षणों को राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में टाला गया. 1998 में वाजपेयी सरकार आई उसने इन परीक्षणों का आदेश दिया.
  • भारत परमाणु सम्पन्न दुनिया का छठा देश बन गया.

  • भारत पहला ऐसा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना, जिसने परमाणु अप्रसार संधि ( NPT ) पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.
  • NPT ( Treaty on the Non-Proliferation of Nuclear Weapons ) एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, इस समझौते का लक्ष्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और परमाणु हथियारों के खात्मे की ओर कदम बढ़ाना है.
  • परीक्षण के अगले साल 11 मई से भारत सरकार ने ‘रीसर्जेंट इंडिया डे’ मनाने का फैसला किया.
  • CIA को परीक्षण की भनक तक नहीं लगी.
  • राजस्थान में उस दिन सुबह-सुबह आदेश दिए गए. आदेश के बाद ट्रक और बुलडोजर तेजी से स्टार्ट होकर पास के कुछ हाल ही खोदे गए कुओं की ओर बढ़ने लगे. मशीनों की तेज आवाजें आने लगीं.
  • कुएं को बालू से ढंकने में मशीनों का साथ, बेलचा लिए हुए आदमियों ने दिया. और जल्दी ही कुएं में न सिर्फ बालू भर दी गई बल्कि कुओं के ऊपर बालू के छोटे पहाड़ बना दिए गए. उनसे निकले थे मोटे-मोटे तार. कुछ ही देर में तारों में आग लगाई गई और फिर एक तेज विस्फोट हुआ.
  • जिससे मशरूम के आकार का बड़ा सा एक ग्रे रंग का बादल बन गया. 20 लोग उसे आशा के साथ निहार रहे थे. नंगी आंखों से कुछ देखा तो नहीं जा सकता था पर तभी उन वैज्ञानिकों में से एक ने जोर से अपनी मुट्ठी बांधी और तेजी से हवा में लहराते हुए कहा, ‘कैच अस इफ यू कैन’, माने ‘अगर पकड़ सको तो हमें पकड़ो’. इसके बाद तेजी से हंसी के ठहाके लगे. मिशन से सफल हो चुका था.
  • भारतीय सेना की 58 इंजीनियर रेजीमेंट को खासकर इस काम के लिए चुना गया था. इस रेजीमेंट के कमांडेंट थे कर्नल गोपाल कौशिक. इनके संरक्षण में ही भारत के परमाणु हथियारों का परीक्षण किया जाना था. उन्हें इस मिशन को सीक्रेट रखने का काम भी सौंपा गया था.
  • अमेरिका ने पोखरण पर नजर रखने के लिए 4 सैटेलाइट लगाए थे. भारतीय वैज्ञानिकों ने इनके रहते ही ये कारनामा करके दिखाया. इन सैटेलाइट्स के बारे में कहा जाता था कि ये जमीन पर खड़े भारतीय सैनिकों की घड़ी का समय भी देख सकते हैं. CIA ने तो यहां तक झूठ बोल रखा था कि इन सैटेलाइट्स के पास ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ हैं.

 

  • इन सबके बावजूद बिना शक होने दिए 58 इंजीनियर डेढ़ साल तक प्रैक्टिस करने में कामयाब रहे. 1982, 1995 और 1997 में वहां पर छोटे-मोटे ब्लास्ट हो चुके थे जिससे अमेरिका को अंदाजा भी हो गया था कि भारतीय परमाणु परीक्षण का प्रयास कर रहे हैं.
  • मई, 1998 में 6 बमों के दस्ते यूज हुए थे. इनमें से आखिरी तीन का नाम ‘नवताल’ रखा गया था. शॉर्ट में NT1, NT2, NT इसमें से केवल 5 ही बम फोड़े गए. NT3 को कुएं से निकाल लिया गया. इसे निकालने का आदेश दिया था, आर. वैज्ञानिक चिदंबरम ने जो एटॉमिक एनर्जी कमीशन (AEC) के चेयरमैन थे.

 

  • इसके पीछे आर. चिदंबरम का मानना था कि जो रिजल्ट उनकी टीम को चाहिए थे वो उन्हें मिल चुके थे फिर एक और डिवाइस बर्बाद करके क्या फायदा? वाकई उन्होंने टीम से भी इन्ही शब्दों को दोहराते हुए कहा था, ‘इसे बर्बाद करके क्या फायदा?’
  • डीआरडीओ के तत्कालीन चीफ एपीजे अब्दुल कलाम और एईसी के चेयरमैन आर. चिदंबरम इस ऑपरेशन में शामिल दो बड़े वैज्ञानिक थे. साथ ही संस्थाओं के 80 और वैज्ञानिक शामिल थे जो कि परीक्षण स्थल का जायजा लेने आते-जाते रहते थे.
  • सभी को आर्मी की वर्दी में परीक्षण स्थल पर ले जाया जाता था और साथ ही सभी के झूठे नाम रखे गए थे. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान इन लोगों के इतने सारे उपनाम हो चुके थे कि एक बार एक बड़े वैज्ञानिक ने मजाक में कहा था, ‘वैज्ञानिकों के लिए नाम याद करने के बजाए अपने फिजिक्स के कैलकुलेशन करना ज्यादा आसान था.’

 

600 विलोम शब्द Hindi Vilom Shabd Dictionary opposite words antonyms list

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600 विलोम शब्द Hindi Vilom Shabd Dictionary opposite words antonyms list

 

  1. कंगला – खुशहाल
  2. कंजूस – दानी
  3. कंटक – पुष्प
  4. कंठस्थ – विस्मरण
  5. कंपन – स्थिर
  6. कई – एक
  7. कगार – मँझधार
  8. कटरा – कटरी
  9. कटुता – मधुरता
  10. कटुक्ति – सूक्ति
  11. कट्टर – उदार
  12. कठिन – सरल
  13. कठोर – कोमल
  14. कड़वा – मीठा
  15. कथन – चुप्पी
  16. कथ्य – अकथ्य

 

  1. कद्रदान – नाकद्र
  2. कनिष्ठ – वरिष्ठ
  3. कपट – निष्कपट
  4. कपाल – पद
  5. कड़ा – मुलायम
  6. कड़ाह – कड़ाही
  7. कम – ज्यादा
  8. कमखर्च – खर्चीला
  9. कमीना – भला
  10. करतल – पदतल
  11. करार – बेकरार
  12. कपूत – सपूत
  13. कबूलना – नकारना
  14. कर्ज़दार – महाजन
  15. कर्ण कटु – कर्ण प्रिय
  16. कर्मशाला – विश्रामशाला
  17. कर्मशील – कर्महीन
  18. कलंक – निष्कलंक
  19. कलकल – शांत
  20. करीना – बेढंग
  21. करुण – निष्ठुर
  22. कनिष्ठ – ज्येष्ठ
  23. कृश – स्थूल
  24. कृष्ण – शुक्ल
  25. रात – दिन
  26. अमृत – विष
  27. अन्धकार – प्रकाश
  28. अल्पायु – दीर्घायु
  29. इच्छा – अनिच्छ।
  30. उत्कर्ष – पतन
  31. अनुराग – विराग
  32. आदि – अंत
  33. आगामी – गत
  34. उत्थान – पतन
  35. आग्रह – दुराग्रह
  36. एकता – अनेकता
  37. अनुज – अग्रज
  38. आकर्षण – विकर्षण
  39. उद्यमी – आलसी
  40. अधिक – न्यून
  41. आदान – प्रदान
  42. उर्वर – ऊसर
  43. एक – अनेक
  44. आलस्य – स्फूर्ति
  45. अर्थ – अनर्थ
  46. उधार – नगद
  47. उपस्थित – अनुपस्थित
  48. अतिवृष्टि – अनावृष्टि
  49. उत्कृष्ट – निकृष्ट
  50. उत्तम – अधम
  51. आदर्श – यथार्थ
  52. आय – व्यय
  53. स्वाधीन – पराधीन
  54. आहार – निराहार
  55. दाता – याचक
  56. खेद – प्रसन्नता
  57. गुप्त – प्रकट
  58. प्रत्यक्ष – परोक्ष
  59. घृणा – प्रेम
  60. सजीव – निर्जीव
  61. सुगंध – दुर्गन्ध
  62. मौखिक – लिखित

 

  1. संक्षेप – विस्तार
  2. घात – प्रतिघात
  3. निंदा – स्तुति
  4. मितव्यय – अपव्यय
  5. सरस – नीरस
  6. सौभाग्य – दुर्भाग्य
  7. मोक्ष – बंधन
  8. कृतज्ञ – कृतघ्न
  9. क्रय – विक्रय
  10. दुर्लभ – सुलभ
  11. निरक्षर – साक्षर
  12. नूतन – पुरातन
  13. बंधन – मुक्ति
  14. ठोस – तरल
  15. यश – अपयश
  16. सगुण – निर्गुण
  17. मूक – वाचाल
  18. रुग्ण – स्वस्थ
  19. रक्षक – भक्षक
  20. वरदान – अभिशाप
  21. शुष्क – आर्द्र
  22. हर्ष – शोक
  23. क्षणिक – शाश्वत
  24. विधि – निषेध
  25. विधवा – सधवा
  26. शयन – जागरण
  27. शीत – उष्ण
  28. सक्रिय – निष्क्रिय
  29. सफल – असफल
  30. सज्जन – दुर्जन
  31. शुभ – अशुभ
  32. संतोष – असंतोष
  33. आतुर – शांत
  34. आगामी  – विगत
  35. आरोह – अवरोह
  36. आचार – अनाचार
  37. आदत्त – प्रदत्त
  38. आदर – अनादर
  39. आदान – प्रदान
  40. उचित – अनुचित
  41. आरम्भ – अंत
  42. आह्वान – विसर्जन
  43. आवृत – अनावृत
  44. आकर्ष – विकर्ष
  45. आकर्षण – विकर्षण
  46. आद्र – शुष्क
  47. आच्छादित – अनाछ्दित
  48. आहार – अनाहार
  49. आशा – निराशा
  50. आधुनिक – प्राचीन
  51. आशीर्वाद – अभिशाप
  52. आसक्त – अनाशक्त
  53. आदर्श – यथार्थ
  54. आगमन – गमन
  55. आध्यात्मिक – भौतिक
  56. आस्था – अनास्था
  57. इच्छा – अनिच्छा
  58. इहलोक – परलोक
  59. ईश्वर – अनीश्वर
  60. ईर्ष्या – प्रेम
  61. उत्कर्ष – अपकर्ष
  62. उषा – संध्या
  63. उग्र – सौम्य
  64. उदार – अनुदार
  65. उचित – अनुचित
  66. उपकार – अपकार
  67. उत्थान – पतन
  68. उधार – नगद
  69. उन्नति – अवनति
  70. उपयुक्त – अनुपयुक्त
  71. उपाय – निरुपाय
  72. एकांगी – सर्वांगीण
  73. ओखली – मूसल
  74. ओछा – गंभीर
  75. ओज – ओजहीन
  76. ओजस्विता – ओजहीनता
  77. ओजस्वी – ओजहीन
  78. ओट – प्रकट
  79. ओढ़ना – बिछाना
  80. ओतप्रोत – विलग
  81. औगत – सुगत
  82. औद्योगिक – अनौद्योगिक
  83. औपचारिक – औपचारिक
  84. औपचारिकता – अनौपचारिकता
  85. औघर – सुघर
  86. औंधा – सीधा
  87. औंधाना – सीधा करना
  88. औचक – अक्सर
  89. औचित्य – अनुचित्य
  90. औचक – नियमित
  91. औरत – मर्द
  92. औलाद – वालिद
  93. औवल – आखिर
  94. औहाती – विधवा
  95. कनिष्ठ – ज्येष्ठ
  96. कृष – स्थूल
  97. कृष्ण – शुक्ल
  98. गुप्त – प्रकट
  99. ग्रामीण – शहरी
  100. घात – प्रतिघात
  101. छली – निश्चल
  102. छूत – अछूत
  103. जल – थल
  104. जन्म – मृत्यु
  105. जंगली – पालतू
  106. दयालु – निर्दयी
  107. धीर – अधीर
  108. नख – शिख
  109. निरक्षर – साक्षर
  110. निंदा – प्रशंसा
  111. पक्ष – विपक्ष
  112. पूर्ण – अपूर्ण
  113. परकीया – स्वकीया
  114. बंधन – मुक्ति
  115. भद्र – अभद्र
  116. भाव – अभाव
  117. मौखिक – लिखित
  118. राग – विराग
  119. विधवा – सधवा
  120. शयन – जागरण
  121. शीत – उष्ण
  122. घात – प्रतिघात
  123. घृणा – प्रेम
  124. चल – अचल
  125. जटिल – सरल
  126. ठोस – तरल
  127. दाता – याचक
  128. निर्मल – मलिन
  129. नस्वर अनश्वर
  130. प्रभु – दास
  131. बाढ़ – सूखा
  132. मानव – दानव
  133. मिलन – विछोह
  134. मूक – वाचाल
  135. रहित – सहित
  136. रात्री – दिवस
  137. लोभ – संतोष
  138. विपन्न – संपन्न
  139. विशुद्ध – दूषित
  140. विरोध – समर्थन
  141. शकुन – अपशकुन
  142. सामिष – निरामिष
  143. सूक्ष्म – स्थूल
  144. हास्य – रुदन
  145. तरुण – वृद्ध
  146. दुर्लभ – सुलभ
  147. पंडित – मूर्ख
  148. पतिव्रता – कुलटा
  149. प्रत्यक्ष – परोक्ष
  150. भूत – भविष्य
  151. मनुष्यता – पशुता
  152. मिथ्या – सत्य
  153. मोक्ष – बंधन
  154. योगी – भोगी
  155. सजीव – निर्जीव
  156. अग्नि – जल
  157. अनाथ – सनाथ
  158. अर्पण – ग्रहण
  159. अथ – इति
  160. अस्त – उदय
  161. अगम – सुगम
  162. अपेक्षा – उपेक्षा
  163. अकाल – सुकाल
  164. आयात – निर्यात
  165. असली – नकली
  166. अज्ञ – विज्ञ
  167. अमर – मर्त्य
  168. अधम – उत्तम
  169. आतुर – शांत
  170. आगामी – विगत
  171. आरोह – अवरोह
  172. आचार – अनाचार
  173. आश्रित – अनाश्रित
  174. आदत्त – प्रदत्त
  175. आदर – अनादर
  176. आदान – प्रदान
  177. उचित – अनुचित
  178. आरंभ – अंत
  179. आह्वान – विसर्जन
  180. आवृत – अनावृत
  181. आकर्ष – विकर्ष
  182. आकर्षण – विकर्षण
  183. आद्र – शुष्क
  184. आच्छादित – अनाच्छादित
  185. आहार – अनाहार
  186. आशा – निराशा
  187. आधुनिक – प्राचीन
  188. आशीर्वाद – अभिशाप
  189. आसक्त – अनाशक्त
  190. आदर्श – यथार्थ
  191. आगमन – गमन
  192. आध्यात्मिक – भौतिक
  193. आगामी – विगत
  194. आस्था – अनास्था
  195. इच्छा – अनिच्छा
  196. इहलोक – परलोक

 

  1. ईर्ष्या – प्रेम
  2. उत्कर्ष – अपकर्ष
  3. उषा – सौम्य
  4. उदार – अनुदार
  5. उचित – अनुचित
  6. उपकार – अपकार
  7. उत्थान – पतन
  8. उधार – नगद
  9. उन्नति – अवनति
  10. उत्तीर्ण – अनुतीर्ण
  11. उपयुक्त – अनुपयुक्त
  12. उपाय – निरुपाय
  13. उद्यमी – आलसी
  14. ऋजु – कुटिल
  15. ऋणी – उऋण
  16. एकांगी – सर्वागीण
  17. ऐश्वर्य – दारिद्य
  18. कंकाल – शरीर
  19. गुप्त – प्रकट
  20. ग्रामीण – शहरी
  21. ग्राम्य – शिष्ट
  22. गजब – सामान्य
  23. गठित – अगठित
  24. गठियाना – खोलना
  25. गठीला – ढीला
  26. गड़ना – निकलना
  27. गड़बड़ – सही
  28. गड्मड – सिलसिलेवार
  29. गंधाहारक – गंधदायक
  30. गंधीला – सुगन्धित
  31. गंभीर – सहज
  32. गँवई – शहरी
  33. गँवाना – पाना
  34. गँवार – शहरी ,होशियार
  35. गणतंत्र – राजतंत्र
  36. गणनीय – अगणित
  37. गण्य – नगण्य
  38. गत – आगत
  39. गति – अगति
  40. गतिमान – स्थिर
  41. गतिरोध – निर्विरोध
  42. ग़दर – शांति
  43. घंटा – घंटी
  44. घंटा – पल
  45. घटती – बढती
  46. घटाना – बढ़ाना
  47. घटाव – जोड़
  48. घटित – अघटित
  49. घनिष्ठ – बहिरंग
  50. घनेरा – नगण्य
  51. घमंडी – विनयी
  52. घमासान – सामान्य
  53. घाटी – पर्वत
  54. घायल – दुरुस्त
  55. घात – प्रतिघात
  56. घमंड – विनय
  57. घोषित – अघोषित
  58. यश – अपयश
  59. योगी – भोगी
  60. रचना – विनाश
  61. रत – विरत
  62. राजतंत्र – प्रजातंत्र
  63. रिक्त – पूर्ण
  64. रंगीन – रंगहीन
  65. लोभी – संतोषी
  66. लेन – देन
  67. लौह – स्वर्ण
  68. वन – मरू
  69. विधि – निषेध
  70. विरह – मिलन
  71. विशालकाय – लघुकाय
  72. विश्वास – संदेह
  73. शकुन – अपशकुन
  74. शयन – जागरण
  75. शासक – शासित
  76. शासक – शासित
  77. शुचि – अशुचि
  78. शोषण – पोषण
  79. समास – व्यास
  80. सम्पद – विपद
  81. सरस – नीरस
  82. स्थावर – जंगम
  83. स्वकीया – परकीय
  84. सांगत – असंगत
  85. संत – असंत
  86. संश्लिष्ट – विश्लिष्ट
  87. वृष्टि – अनाविष्टि
  88. विवाद – निर्णय
  89. विशिष्ट – साधारण
  90. विस्तार – संक्षेप
  91. श्वेत – श्याम
  92. सदाशय – दुराशय
  93. सपूत – कपूत
  94. समाज – व्यक्ति
  95. ससीम – असीम
  96. संकीर्ण – उदार
  97. सूक्षम – स्थूल
  98. हास्य – रुदन
  99. क्षम – अक्षम
  100. क्षर – अक्षर
  101. सुगम – दुर्गम
  102. सुभग – दुर्भग
  103. क्षुद्र – महान
  104. श्रव्य – दृश्य
  105. लघु – गुरु
  106. लौकिक – अलौकिक
  107. लिप्त – अलिप्त
  108. लुप्त – व्यक्त
  109. वसंत – पतझड़
  110. वरदान – अभिशाप
  111. वाद – प्रतिवाद
  112. वास्तविक – अवास्तविक
  113. विकास – पतन
  114. विवादास्पद – निर्विवाद
  115. विधि – निषेध
  116. विनय – अविनय
  117. विशालकाय – लघुकाय
  118. वृद्ध – बालक
  119. विश्वास – अविश्वास
  120. विशिष्ट – साधारण

 

  1. विषम – सम
  2. विधवा – सधवा
  3. वीर – कायर
  4. विवेक – अविवेक
  5. विस्तार – संक्षेप
  6. विश्लेषण – संश्लेषण
  7. विजय – पराजय
  8. विस्मरण – स्मरण
  9. व्यावाहारिक – अव्यावाहारिक
  10. विमुख – सन्मुख
  11. वृहत – लघु
  12. वीरान – आबाद
  13. विस्तृत – संक्षिप्त
  14. वैतनिक – अवैतनिक
  15. व्यक्त – अव्यक्त
  16. श्रांत – अश्रांत
  17. व्यर्थ – सार्थक
  18. व्यय – आय
  19. व्यष्टि – समष्टि
  20. विद्या – अविद्या
  21. विरत – निरत
  22. विष – अमृत
  23. विशेष – सामान्य
  24. विपत्ति – संपत्ति
  25. विभक्त – अविभक्त
  26. विदुषी – अज्ञानी
  27. विद्वान – मूर्ख
  28. विशुद्ध – अशुद्ध
  29. वृद्धि – हास्र
  30. वादी – प्रतिवादी
  31. वैमनस्य – सौमनस्य
  32. विपन्न – संपन्न
  33. विरागी – रागी
  34. विरोध – अवरोध
  35. शक्तिशाली – शक्तिहीन
  36. शिष्य – गुरु
  37. शकुन – अपशकुन
  38. शत्रु – मित्र
  39. शीत – उष्ण
  40. शुभ – तरल
  41. श्वेत – श्याम
  42. शिव – अशिव
  43. शोषण – पोषण
  44. श्रीगणेश – इतिश्री
  45. श्रध्दा – अश्रधा
  46. सभ्यता – बर्बरता
  47. संगत – असंगत
  48. संतुष्ट – असंतुष्ट
  49. सम – विषम
  50. सर्द – गर्म
  51. सत – असत
  52. सगुण – निर्गुण
  53. सफल – विफल
  54. सजीव – निर्जीव
  55. सचेत – अचेत
  56. सच्चरित – दुश्चरित
  57. ससीम – असीम
  58. सुकर – दुष्कर
  59. सहयोगी – प्रतियोगी
  60. सजल – निर्जल
  61. सित – असित
  62. संतोष – संतोष
  63. स्वामी – सेवक
  64. सुधा – गरल
  65. सुरक्षित – असुरक्षित
  66. सृष्टि – संहार
  67. संकल्प – विकल्प
  68. संधि – विग्रह
  69. संयोग – वियोग
  70. सामायिक – असामयिक
  71. स्पृश्य – अस्पृश्य
  72. स्पष्ट – अस्पष्ट
  73. सुस्त – चुस्त
  74. सम्बद्ध – असम्बद्ध
  75. स्वधर्म – विधर्म
  76. साहसी – कायर
  77. सुविधा – असुविधा
  78. स्वदेश – विदेश
  79. स्वजाति – विजाती
  80. सकाम – निष्काम
  81. सुकर्म – कुकर्म
  82. सुगम – दुर्गम
  83. सुख – दुःख
  84. सुन्दर – कुरूप
  85. सबाध – निर्बाध
  86. सरस – नीरस
  87. संग्रह – त्याग
  88. संगठन – विघटन

 

  1. सरल – क्लिष्ट
  2. सत्कार – तिरस्कार
  3. साक्षर – निरक्षर
  4. सापेक्ष – निरपेक्ष
  5. सद्वृत – दुवृत
  6. सदाचार – दुराचार
  7. स्वीकृति – अस्वीकृति
  8. सौन्दर्य – कुरूपता
  9. स्वाधीन – पराधीन
  10. स्वाभाविक – अस्वाभाविक
  11. सखा – शत्रु
  12. सवीकार – निर्विकार
  13. संत – असंत
  14. सुलभ – दुर्लभ
  15. समस्या – समाधान
  16. संकोच – असंकोच
  17. अल्पायु – दीर्घायु
  18. सुसंगति – कुसंगति
  19. सात्विक – तामसिक
  20. सदाचारी – कदाचारी
  21. सुपरिणाम – दुष्परिणाम
  22. सन्मार्ग – कुमार्ग
  23. स्वच्छ – मलिन
  24. सार्थक – निरर्थक
  25. साकार – निराकार
  26. सुगंध – दुर्गन्ध
  27. सुपात्र – कुपात्र
  28. सुपथ – कुपथ
  29. सुशील – दुशील
  30. सहज – कठिन
  31. साहस – साहसहीन
  32. स्थूल – सूक्ष्म
  33. सुलझाव – उलझाव
  34. संग – असंग
  35. सुर – असुर
  36. साधु- असाधु
  37. सत्य – असत्य
  38. सुमति – कुमति
  39. सदय – निर्दय
  40. संकीर्ण – उदार
  41. सदाशय – दुराशय
  42. सुकृति – दुष्कृति
  43. सूना – भरा
  44. सुदूर – अदूर
  45. सभय – निर्भय
  46. सुबह – शाम
  47. सच – झूठ
  48. सुबुद्धि – कुबुद्धि
  49. हार – जीत
  50. हर्ष – शोक
  51. हिंसा – अहिंसा
  52. हित – अहित
  53. हस्व – दीर्घ
  54. क्षर – अक्षर
  55. क्षणिक – शास्वत
  56. क्षम्य – अक्षम्य
  57. क्षमा – दंड
  58. लम्पट – सदाचारी
  59. लम्ब – आधार
  60. लम्बा – ठिगना
  61. लम्बाई – चौड़ाई
  62. लंबित – त्वरित
  63. लम्बोदरा – छोटा
  64. लकीर – बिंदु
  65. लक्षण – कुलक्षण
  66. लक्ष्णा – अभिधा
  67. लक्षित – अलक्षित
  68. लक्षितार्थ – अभिधार्थ
  69. लक्ष्य – अलक्ष्य
  70. लखपति – खाकपति
  71. लगभग – पूरा
  72. लगातार – रुक – रूककर
  73. लगाना – हटाना
  74. लगाव – हटाना
  75. लगाव – दुराव
  76. लडखडाना – संभालना
  77. लड़ना – मिलना
  78. लड़ाई – सुलह
  79. लड़ाका – सद्भावी
  80. लड़ाना – मिलाना
  81. लतखोर – भला
  82. लताड़ना – थपराना
  83. लतिका – पौधा
  84. लथपथ – सूखा
  85. लताड़ – प्यार
  86. लदाई – उतराई
  87. लफंगा – भला शरीफ़
  88. लहँगा – साड़ी
  89. लबालब – खाली
  90. लब्ध – अनुपलब्ध
  91. लब्धप्रतिष्ठित – छिन्नप्रतिष्ठ
  92. लग्न – कुलग्न
  93. लघु – दीर्घ
  94. लघुता – बड़प्पन
  95. लघुशंका – दीर्घशंका
  96. लचक – कठोरता
  97. लचीला – कठोर
  98. लचीलापन – कड़ापन
  99. लजीला – निर्लज्ज
  100. लज्जित – बेशर्म

 

  1. लटकना – उठना
  2. लटपट – सही
  3. लड़की – लड़का
  4. लम्हा – घंटा
  5. लय – बेलय
  6. लयात्मक – अलायात्मक
  7. लरजना – थिरना
  8. ललकना – विलगना
  9. ललकार – पुकार
  10. ललकारना – पुकारना
  11. ललचना – त्यागना
  12. ललाई – सफ़ेदी
  13. ललित – कुरूप
  14. लवण – शर्करा
  15. लवलीन – अमग्न
  16. लहलहाना – मुरझाना
  17. लहू – पसीना
  18. चिर – अचिर
  19. चिरंतर – नश्वर
  20. चोर – साधू
  21. छल – निश्छल
  22. छांह – धूप
  23. जन्म – मरण
  24. जय – पराजय
  25. ज्येष्ठ – कनिष्ठ
  26. ज्योति – तम
  27. जड़ – चेतन
  28. जागरण – निद्रा
  29. जाग्रत – सुप्त
  30. ज्योतिर्मय – तमोमय
  31. जागृति – सुषुप्ति
  32. जेय – अजेय
  33. जल – स्थल
  34. जवानी – बुढ़ापा
  35. जीवन – मरण
  36. जीवित – मृत
  37. जोड़ – घटाव
  38. जंगम – स्थावर
  39. जाति – विजाति
  40. ज्वार – भाटा
  41. जटिल – सरल
  42. झोपडी – महल
  43. तम – ज्योति
  44. तिमिर – प्रकाश
  45. तीव्र – मंद
  46. तुकांत – अतुकांत
  47. तुच्छ – महान
  48. नख – शिख Hindi Vilom Shabd Dictionary

 

चेतक के वीरता की कहानी || Maharana Pratap Horse Chetak History in Hindi`

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Maharana Pratap Horse Chetak History in Hindi || चेतक के वीरता की कहानी ||`

 

  • चेतक वीर महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा था.
  • हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने अद्भुत स्वामीभक्ति बुद्धिमत्ता और वीरता का उदाहरण प्रस्तुत किया था.
  • चेतक युद्ध में बुरी तरह घायल हो जाने के बाद भी महाराणा प्रताप को रणक्षेत्र से बाहर सुरक्षित लाने में सफल हुआ था.

 

  • Chetak चेतक की गति इतनी तेज हुआ करती थी, कि किसी दूसरे घोड़े के जरिए चेतक का पीछा कर पाना असंभव था.
  • चेतक अरबी मूल का घोड़ा था.
  • जल्दी ही चेतक की चर्चा आसपास के क्षेत्र में होने लगी.
  • चेतक की गति इतनी अधिक तेज होती थी मानो वह हवा के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा हो.
  • चेतक की गति इतनी अधिक थी कि वह सवार व्यक्ति को लेकर क्षण भर में बहुत आगे पहुंच जाता था.
  • एक वाक्य में कहें तो चेतक महाराणा प्रताप की ताकत बन गया था.
  • क्योंकि चेतक विशेष था इसलिए महाराणा उसे विशेष स्नेह देते थे, और उस का विशेष ख्याल रखते थे.
  • चेतक की अद्भुत क्षमताओं ने उसे विशेष ऐतिहासिक पहचान दी है.
  • Chetak चेतक दुर्गम पथों पर भी आसानी से चलता था.

  • चेतक महाराणा प्रताप के लिए ईश्वर के वरदान से कम बिल्कुल भी नहीं था.
  • हल्दीघाटी के युद्ध में एक बरसाती नाले को पार करते हुए चेतक चोटिल हो गया और अंततः वीरगति को प्राप्त हुआ.
  • चेतक के वीरगति को प्राप्त होने के बाद, महाराणा प्रताप और उनके भाई शक्ति सिंह ने स्वयं अपने हाथों से चेतक का दाह संस्कार किया था.
  • चेतक की स्वामीभक्ति और वीरता के गीत आज भी मेवाड़ में गाए जाते हैं.
  • जिस जगह पर महाराणा प्रताप और उनके भाई शक्ति सिंह में चेतक का दाह संस्कार किया था उस स्थान पर
    आज चेतक की समाधि बनी हुई है.
  • चेतक ने कई लोगों को प्रेरित किया है और आने वाली पीढ़ियों को भी वह प्रेरित करता रहेगा.

 

History of Jharkhand in Hindi gk – झारखण्ड का इतिहास jharkhand information

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History of Jharkhand in Hindi gk - झारखण्ड का इतिहास jharkhand information

 

  • झारखण्ड राज्य भारत के नवीनतम राज्यों में से एक है, बिहार के दक्षिणी हिस्से को विभाजित कर झारखण्ड का सृजन किया गया था। झारखण्ड यानी ‘झार’ या ‘झाड़’ जो स्थानीय रूप से वन का पर्याय है एवं ‘खण्ड’ यानी टुकड़ा से मिलकर बना है अपने नाम के अनुरूप यह एक वन प्रदेश है। इसकी स्थापना झारखण्ड आंदोलन का फल है।

 

  • 1938 के आसपास गठित आदिवासी महासभा ने जयपाल सिंह मुंडा के नेतृत्व में अलग राज्य का सपना देखा था, पर यह वर्ष 2000 में साकार हुआ जब केन्द्र सरकार ने 15 नवम्बर (बिरसा मूंडा का जन्मदिवस) को इसे भारत के अठ्ठाइसवें राज्य के रूप में स्थापित किया। औधोगिक नगरी राँची इसकी राजधानी है।
    झारखण्ड के पड़ोसी राज्यों में उत्तर में बिहार, दक्षिण में ओड़िशा, पश्चिम में उत्तर-प्रदेश तथा छत्तीसगढ़, एवं पूर्व में पश्चिम बंगाल आते हैं। लगभग यह सम्पूर्ण राज्य छोटानागपूर के पठार पर अवस्थित है। यहाँ की प्रमुख नदीयाँ कोयल, दामोदर, खरखई और स्वर्णरेखा हैं। झारखण्ड क्षेत्र विभिन्न धर्म, संस्कृतियों और भाषाओं का संगम है। सम्पूर्ण भारत में वनों के अनुपात में यह राज्य अग्रणी तथा वन्य जीवों के संरक्षण के लिए मशहूर है। झारखण्ड की गतिविधियां मुख्यतः राजधानी राँची, जमेशदपुर, धनबाद एवं बोकारो जैसे औद्योगिक केन्द्रों से होती है।
  • झारखण्ड का इतिहास  

    ऐतिहासिक  रूप से झारखण्ड अनेक आदिवासी समुदायों का नैसर्गिक वास स्थल रहा है। भारतीय संविधान में जिन्हें ‘अनुसूचित जनजाति’ के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें मुंडा, संताल, हो, खड़िया, उरांव, असुर, बिरजिया, पहाड़िया आदि प्रमुख समुदाय हैं। इन्हीं आदिवासी समुदायों ने झारखण्ड के जंगलों को साफ कर खेती तथा इंसानों के रहने लायक बनाया। नागवंशियों, मुसलमानों, अंग्रेजों तथा अन्य बाहरी आबादी के आने के पूर्व इस क्षेत्र में आदिवासियों की अपनी सामाजिक-राजनितिक व्यवस्था थी। मुगल सल्तनत के दौरान इसे कुकरा प्रदेश के नाम से जाना जाता था।

  • ब्रिटिश शासन  – 

  • 1765 ई• के बाद यह ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया। ब्रिटिश दास्तां के अधीन यहाँ काफी अत्याचार हुए उस कालखंड में इस प्रदेश में ब्रिटिशों के खिलाफ बहुत से सामूहिक आदिवासी विद्रोह हुए, कुछ प्रमुख विद्रोह थे :-
  • 1772-1780 – पहाड़िया विद्रोह
  • 1780-1785 – मांझी विद्रोह, जिसके नेता तिलका मांझी को भागलपुर में फांसी दी गयी थी।
  • 1795-1800 – तमाड़ विद्रोह, मुंडा विद्रोह विष्णु मानकी के नेतृत्व में
  • 1800-1802 – मुंडा विद्रोह तमाड़ दुखन मानकी के नेतृत्व में
  • 1819-1820 – मुंडा विद्रोह पलामू के भूकन सिंह के नेतृत्व में
  • 1832-1833 – खेबर विद्रोह भागीरथ, दुबाई गोंसाई एवं पटेल सिंह के नेतृत्व में
  • 1833-1834 – भूमिज विद्रोह वीरभूम के गंगा नारायण के नेतृत्व में
  • 1855           – लार्ड कार्नवलिस के खिलाफ संथालों का विद्रोह
  • 1855-1860 – सिद्धू-कान्हू के नेतृत्व में संथालों का विद्रोह

  • 1856-1857 – शहीद लाल विश्वनाथ शाहदेव, शेख बिखारी गणपतराय एवं बुधु वीर का सिपाही विद्रोह के दौरान आंदोलन
  • 1874 – खेरवार आंदोलन भागीरथ मांझी के नेतृत्व में
  • 1895- 1900 – बिरसा मुंडा के नेतृत्व में मुंडा विद्रोह
  • इन सभी विद्रोहों को भारतीय ब्रिटिश सेना द्वारा निष्फल कर दिया गया था। 1914 ई• में टाना भगत के नेतृत्व में लगभग छब्बीस हजार आदिवासियों ने फिर से ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ विद्रोह किया जिससे प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन आरम्भ किया था।
  • 1915 ई• मेंं आदिवासी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए ‘छोटानागपुर उन्नति समाज’ बनाई गई।
    इस संगठन का उद्देश्य राजनैतिक  था। जब 1928 ई• में साइमन आयोग पटना आया तब छोटानागपुर उन्नति समाज ने अपने प्रतिनिधि मंडल द्वारा स्वयं-शासन के लिए एक अलग राज्य की मांग की गई थी जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।

 

  • History of Jharkhand in Hindi – स्वतंत्रता पश्चात् 
  • झारखण्ड का सृजन आरजेडी के पूर्व शर्त पर कांग्रेस के समर्थन पर निर्भर करता था कि राजद बिहार पुनर्गठन विधेयक (झारखण्ड विधेयक) के पारित होने पर बाधा नहीं देंगे। अंत में राजद तथा कांग्रेस के समर्थन के साथ केन्द्र में सत्ताधारी गठबंधन ने भाजपा की अगुवाई की, जिसके फलस्वरूप राज्य का मेल चुना गया, जो पहले के चुनावों में इस क्षेत्र में शामिल था। उस वर्ष संसद ने मानसून सत्र में झारखण्ड विधेयक को मंजूरी दी, इस प्रकार एक अलग राज्य का मार्ग बना। और 15 नवम्बर 2000 को झारखण्ड का सपना साकार हुआ।

    नक्सली

    झारखण्ड नक्सली-माओवादी उग्रवाद प्रभावित राज्य रहा है। 1967 में नक्सलियों के विद्रोह से इसकी शुरूआत हुई। पुलिस तथा अर्धसैनिक बल समूहों के मौजूद होने के बावजूद यह राज्य नक्सल बेल्ट का हिस्सा रहा है।
    इसकी वजह से प्राकृतिक संसाधनों से प्रचुर होने के बावजूद झारखण्ड गरीबी और निराशा झेल रहा है।
    प्रशासनिक इकाई
    राज्य के निर्माण के समय इसमें 18 जिलें थे जो पहले दक्षिण बिहार का हिस्सा हुआ करते थे,
    इनमें से कुछ जिलों को पुनर्गठित करके छह नए जिलें सृजित किए गए वर्तमान में झारखण्ड में चौबीस जिले हैं।
    झारखण्ड में वनस्पति एवं जैविक विविधताओं का भंडार है। यहाँ कई वन्य अभ्यारण्य भी हैं।

 

  • अर्थतंत्र History of Jharkhand in Hindi 

  • झारखण्ड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खनिज एवं वन संपदा से निर्देशित है। लोहा, कोयला, बॉक्साइट,
    यूरेनियम इत्यादि खनिजों की प्रचुरता है। खनिजों के खनन से सालाना राज्य को करोड़ों रूपये की आय होती है।
    भारत के कुछ सर्वाधिक औद्योगिकृत स्थान जमेशदपुर, राँची, बोकारो एवं धनबाद में स्थित हैं।
    झारखण्ड के उधोगों में कुछ प्रमुख हैं:-
  • हिंदुस्तान का सबसे बड़ा उर्वरक कारखाना सिंदरी में स्थित था जो अब बंद हो चुका है।
  • भारत का पहला और विश्व का पाँचवां सबसे बड़ा इस्पात कारखाना जमशेदपुर में है।
  • एक और बड़ा इस्पात कारखाना बोकारो स्टील प्लांट बोकारो में है।
  • भारत का सबसे बड़ा आयुध कारखाना गोमिया में है।
  • History of Jharkhand in Hindi – सरकार 
  • झारखण्ड के मुख्य राज्यपाल हैं जिन्हें राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं, प्रथम राज्यपाल प्रभात कुमार थे।
    और राज्य की कार्यकारी शक्ति मुख्यमंत्री के पास होती है। झारखण्ड में अबतक छः मुख्यमंत्री नियुक्त हो चुके हैं, जिसमें प्रथम मुख्यमंत्री भाजपा से बाबुलाल मरांडी थे। सबसे लम्बे समय तक तीन बार, पाँच वर्षों तक भाजपा से अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री रहे। झामुमो से शिबु सोरेन और हेमंत सोरेन भी बीच में मुख्यमंत्री रहे।
    झारखण्ड में स्वतंत्र दल से मधु कोड़ा भी मुख्यमंत्री बने जिस दौरान तीन बार राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था।
  • वर्तमान में राज्य की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू तथा मुख्यमंत्री रघुवर दास (भाजपा) हैं।
  • झारखण्ड में कई खुबसुरत पर्यटन स्थल हैं तथा उच्च शिक्षण संस्थान हैं, कला-संस्कृतियों और प्राकृतिक सम्पदा से सम्पन्न यह राज्य सम्भावनाओं का धनी है।
  • 181 Full Form in Hindi Language With Meaning उपयोगी फुल फॉर्म हिन्दी में

 

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