फेमस कविताएँ हिन्दी में – Famous Poems in Hindi Language

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  • क्या फर्क पड़ता है?

 

  • कोई सब कहे, कोई चुप रहे,
    तो कोई छाँव, कोई धूप सहे,
    कोई रहे न रहे,
    क्या फर्क पड़ता है?
    कोई खुद रोए, फिर भी हँसाए,
    कोई हँसते-हँसते रो जाए,
    चाहे वो रहे या खो जाए,
    क्या फर्क पड़ता है?
    कोई ख्वाब दिखाए, कोई लोरी गाए,
    तो कोई गहरी नींद से जगाए,
    कोई पास बुलाए, दूर भगाए,
    क्या फर्क पड़ता है?
    कोई प्यारा अपना बन जाए,
    तो कोई हकीकत बस सपना बन जाए,
    कोई कितना भी अपनापन दिखाए,
    क्या फर्क पड़ता है?
    कोई चाहे कितना भी अलग हो,
    कोई समझ ही न पाए,
    अगर आंटे के साथ घुन भी पीस जाए,
    क्या फर्क पड़ता है?
    दिए बुझ रहे हों हर पल के साथ,
    बीत रहा हो आज, और कोई जिए कल के साथ,
    फिर वो कल बीता हुआ हो, या आने वाला,
    क्या फर्क पड़ता है?
    मैं खुद ही ये न समझूँ,
    बस यूँ ही कहता रहूँ,
    कि, “क्या फर्क पड़ता है,
    तो क्या फर्क पड़ता है?- विशाल शाहदेव
  • ये झरने के जैसे न गिरियेगा आप इन नदियो के जैसे न बहियेगा
    आप इन तलाबों से कुछ तो समझिएगा आप
    जिंदगी का मतलब समझ आएगा
    झरने ऊपर से गिरकर विलय होते हैं
    नदियां बहकर सागर में समां जाती हैं
    इन तलाबों का कुछ भी ठिकाना नहीं
    कब खुद मे कमल को खिला देते हैं
    खुद पर क्यूं इतना इतराते हो तुम
    अपनी खुशियों कि खातिर रूलाते हो तुम
    जनाजा तो तेरा भी निकलेगा एक दिन
    ना तू होगा उस दिन, ना तेरा दिन होगा उस दिन
    छोटी सी आपकी उमर ऐसी है
    कर लो सबसे मुहब्बत शरम कैसी है
    ऊपर वाले ने आपको भी बनाया होगा
    जिसने सारी दुनिया रचाया होगा
    – ADITYA PRAKASH VASHISHTHA

 

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