जीवन पर कविता – ज़िन्दगी की धूप-छाँव – Hindi Poems on Life Struggle

Hindi Poems on Life Struggle – ज़िन्दगी की धूप-छाँव – Hindi Poems on Life Struggle – जीवन पर कविता
Hindi Poems on Life Struggle - जीवन पर कविता

 

  • ज़िन्दगी की धूप-छाँव

 

  • कभी गम, तो कभी खुशी है ज़िन्दगी
    कभी धूप, तो कभी छाँव है ज़िन्दगी . . . . . . .
    विधाता ने जो दिया, वो अद्भुत उपहार है ज़िन्दगी
    कुदरत ने जो धरती पर बिखेरा वो प्यार है ज़िन्दगी . . . . . .
    जिससे हर रोज नये-नये  सबक मिलते हैं
    यथार्थों का अनुभव कराने वाली ऐसी कड़ी है ज़िन्दगी . . . . . .
    जिसे कोई न समझ सके ऐसी पहेली है ज़िन्दगी
    कभी तन्हाइयों में हमारी सहेली है ज़िन्दगी . . . . . . .
    अपने-अपने कर्मों के आधार पर मिलती है ये ज़िन्दगी
    कभी सपनों की भीड़, तो कभी अकेली है जिंदगी . . . . . . .
    जो समय के साथ बदलती रहे, वो संस्कृति है जिंदगी
    खट्टी-मीठी यादों की स्मृति है ज़िन्दगी . . . . . . . .
    कोई ना जान कर भी जान लेता है सबकुछ, ऐसी है ज़िन्दगी
    तो किसी के लिए उलझी हुई पहेली है ज़िन्दगी . . . . . . . .
    जो हर पल नदी की तरह बहती रहे ऐसी है जिंदगी
    जो पल-पल चलती रहे, ऐसी है हीं ज़िन्दगी . . . . . . . .
    कोई हर परिस्थिति में रो-रोकर गुजारता है ज़िन्दगी
    तो किसी के लिए गम में  भी मुस्कुराने का हौसला है ज़िन्दगी . . . . . .
    कभी उगता सूरज, तो कभी अधेरी निशा है ज़िन्दगी
    ईश्वर का दिया, माँ से मिला अनमोल उपहार है ज़िन्दगी . . . . . . . .
    तो तुम यूँ हीं न बिताओ अपनी जिंदगी . . . . . . . . 
    दूसरों से हटकर तुम बनाओ अपनी जिंदगी
    दुनिया की शोर में न खो जाए ये तेरी जिंदगी . . . . . . .
    जिंदगी भी तुम्हें देखकर मुस्कुराए, तुम ऐसी बनाओ ये जिंदगी
    – कुसुम पाण्डेय
    kabhee gam, to kabhee khushee hai zindagee
    kabhee dhoop, to kabhee chhaanv hai zindagee . . . . . . .
    vidhaata ne jo diya, vo adbhut upahaar hai zindagee
    kudarat ne jo dharatee par bikhera vo pyaar hai zindagee . . . . . .
    jisase har roj naye-naye sabak milate hain
    yathaarthon ka anubhav karaane vaalee aisee kadee hai zindagee . . . . . .
    jise koee na samajh sake aisee pahelee hai zindagee
    kabhee tanhaiyon mein hamaaree sahelee hai zindagee . . . . . . .
    apane-apane karmon ke aadhaar par milatee hai ye zindagee
    kabhee sapanon kee bheed, to kabhee akelee hai jindagee . . . . . . .
    jo samay ke saath badalatee rahe, vo sanskrti hai jindagee
    khattee-meethee yaadon kee smrti hai zindagee . . . . . . . .
    koee na jaan kar bhee jaan leta hai sabakuchh, aisee hai zindagee
    to kisee ke lie ulajhee huee pahelee hai zindagee

 

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2 COMMENTS

  1. एसी कविता जो आप का इएना है

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