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Maa Ke Upar Kavita माँ पर कविता maa par kavita in hindi maa ke liye kavita

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Maa Par Kavita in Hindi माँ पर कविता maa ke upar kavita maa ke liye kavita

 

  • Maa Par Kavita in Hindi माँ पर कविता maa ke upar kavita maa ke liye kavita

 

  • “याद बहुत आता है माँ…

    “याद बहुत आता है माँ…
    वो मेरे जन्म पर तेरा मुस्कुराना…!”
    वो, उदास चेहरे को चुपके से हँसाना…..
    वो, उस पालने को अपने हाथों से झुलाना…..
    याद बहुत आता है माँ…..
    वो मेरे जन्म पर तेरा मुस्कुराना….!
    वो, रात को लोरी गा के सुलाना….
    वो, सुबह मेरे सिर को प्यार से सहलाना….
    याद बहुत आता है…माँ…
    वो मेरे जन्म पर तेरा मुस्कुराना…!
    वो मेरी चोट पर तेरा मरहम लगाना….
    वो मेरे रोने पर तेरा उदास होना….
    याद बहुत आता है…माँ….
    वो मेरे जन्म पर तेरा मुस्कुराना….!
    वो, अँगुली पकड़ कर तेरा चलना सिखाना….
    वो, छोटी सी शरारत पर तेरा डाँटना…..
    याद बहुत आता है…माँ…
    वो मेरे जन्म पर तेरा मुस्कुराना….!
    वो, मेरी गलती पर तेरा समझाना….
    वो, मेरी बीमारी पर तेरा रात भर जागना….
    याद बहुत आता है…माँ…
    वो मेरे जन्म पर तेरा मुस्कुराना….!
    स्वरचित-सर्वाधिकार प्राप्त रचना
    कवि-शंकर सिंह राजपुरोहित(Rp)

  • माँ, हर रोज याद आती हो

    माँ, हर रोज याद आती हो मुझे
    तुम्हारे साथ हर शाम याद आती है मुझे
    पता है हर रोज हर पल बुलाना चाहती हो मुझे
    लेकिन माफ करना मैं आ ना पाऊंगा शायद कुछ व्यस्तता हो मुझे।
    माँ, हर रोज हर जगह दिखती हो मुझे
    तुम्हारे हाथों की हर पिटाई याद आती है मुझे
    पता है हर रोज प्यार से पीटना चाहती हो मुझे
    लेकिन माफ करना मैं मार खा न पाऊंगा शायद कुछ अकड़ हो मुझे
    माँ, हर रोज सपने में दिखती हो मुझे
    तुम्हारे हाथों का खाना याद आता है मुझे
    पता है हर रोज हाथो से खिलाना चाहती हो मुझे
    लेकिन माफ करना मैं खा न पाऊंगा शायद कुछ भूख ना हो मुझे
    माँ, हर रोज प्यार से रूहाती हो मुझे
    तुम्हारे ममता की गोद याद आती है मुझे
    पता है हर रोज सुकूँ से सुलाना चाहती हो मुझे
    लेकिन माफ करना मैं सो ना पाऊंगा शायद कुछ व्हाट्सएप्प चलाना हो मुझे
    माँ हर रोज समीप होने का अहसास देती हो मुझे
    तुम्हारे समीप रहना हर रोज याद आता है मुझे
    पता है हर रोज तुम्हारे पास रखना चाहती हो मुझे
    लेकिन माफ करना मैं रह नही पाऊंगा शायद कुछ नये चेहरों के पास रहना हो मुझे
    – मोहित पाटीदार

  • माँ पर हिन्दी कविता – Maa Par Kavita in Hindi – माँ का आँचल

 

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