नरेन्द्र मोदी की जीवनी – Narendra Modi Biography in Hindi Language

Narendra Modi Biography in Hindi Language – नरेन्द्र मोदी की जीवनी – Narendra Modi Biography in Hindi Language – Narendra Modi Biography in Hindi Language

 

  • श्री नरेन्द्र मोदी एक जज्बा, एक अभियान का नाम हैं आज. उनके व्यक्तित्व का लोहा पूरी दुनिया मानती है, करोड़ो भारतीयों की आशाएँ जुड़ी हैं उनसे… युवा वर्ग उन्हें अपना आर्दश मानता है. उनका जीवन आज एक उदाहरण है.
  • 2014 के चुनावों में श्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का नेतृत्व कर पूर्ण बहुमत से जीत दिलायी थी और 26 मई 2014 को उन्होने भारत के प्रधानमंत्री के तौर में शपथ लेकर भारत के पंद्रहवें (15वें) और पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने जिनका जन्म देश स्वतंत्र होने के बाद हुआ.

 

  • उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था संघर्षों के साथ उनका बचपन बीता, जिस वजह से उन्होने जीवन की कठीनाईयों को काफी करीब से जाना और समझा. एक चाय बेचने वाले साधारण से लड़के से एक अद्भुत व्यक्तित्व बनने का ये सफर एक मिसाल है.
  • जिसकी शुरुआत गुजरात के वाडनगर से हुई. 17 सितम्बर 1950 को एक छोटे से कस्बे वाडनगर, बाम्बे स्टेट (वर्तमान गुजरात) में श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म माता हीराबेन मोदी और पिता दामोदरदास मुलचंद मोदी की तीसरी संतान के रूप में हुआ. श्रीनरेन्द्र मोदी कुल छः भाई-बहन हैं.
  • श्री मोदी का परिवार पिछड़े हुए घांची तेली समुदाय से आता है. उनका पूरा परिवार एक कच्चे मकान में रहा करता था.
  • उनकी माता आस-पड़ोस के घरों के बर्तन साफ किया करती थीं और पिता रेलवे स्टेशन में चाय की दुकान लगाते थे. मोदी भी उनकी मदद किया करते थे, आती-जाती रेलों की बोगीयों में चाय बेचा करते थे, बाद में अपने भाई के साथ बस स्टैण्ड में उन्होने चाय की दुकान लगाना शुरू किया, इसके साथ ही वे अपनी पढ़ाई-लिखाई का भी पूरा ध्यान रखते थें. उन्हे पढ़ने का बहुत शौक था . उनके शिक्षक बताते हैं कि वो एक साधारण छात्र हुआ करते थे लेकिन शुरुआत से ही वे वाद-विवाद की कला में माहिर हुआ करते थे, एक कुशल वक्ता और नेतृत्व की क्षमता उनमें नजर आती थी. वे नाटकों और भाषणों में बड़ी रुचि से हिस्सा लिया करते थे, खेलकूद भी काफी प्रिय था उन्हें.
  • बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना थी जो कई अवसरों में सामने भी आई. छोटी आयु से ही उन्होने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के स्थानीय शाखा में भाग लेना शुरु कर दिया था वहाँ उनकी मुलाकात लक्ष्मण रॉव इनामदार से हुई जिन्हे वकील साहब के नाम से भी जाना जाता था उन्होने मोदी को बाल स्वयंसेवक (junior cadet) का कार्य सौंपा और फिर उनके राजनैतिक मार्गदर्शक बने. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एक ऐसा संगठन है जो देश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास हेतु कार्य करता है.
  • छोटी आयु में ही उनका विवाह स्थानीय जशोदाबेन से करवा दिया गया था, जो ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया. उसी वक्त श्रीमोदी की स्कूली शिक्षा पूर्ण हुई थी, 1967 में उन्होने घर छोड़ दिया और हिमालय जाकर 2 वर्षों तक साधुओं की तरह जिन्दगी बिताई, आध्यात्मिक यात्राएँ की जिसमें ॠषिकेश, बंगाल में रामकृष्ण आश्रम और पूर्वोत्तर की यात्राएँ शामिल है. इन यात्राओं के दौरान उन्हे स्वामी विवेकानन्द को गहराई से समझने का अवसर प्राप्त हुआ जिससे उनमें उनके विचारों में कई परिवर्तन आएँ. यहाँ से उनके जीवन की एक नई और अद्भूत यात्रा प्रारंभ हुई…
  • 2 वर्ष बाद वो में वाडनगर वापस आए पर कुछ समय के लिए, उन्होने फिर घर छोड़ अहमदाबाद का रुख कर लिया और 1971 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्ण प्रचारक बन गए अपना सारा समय वहीं देना शुरू कर दिया. 1978 में वे स्वयं सेवक संघ के सम्भाग प्रचारक बने और राजनिति विज्ञान (pollitical science) में दिल्ली विश्वविधालय से स्नातक की डिग्री ली और फिर 5 वर्ष बाद 1982 में राजनिति विज्ञान से ही मास्टर की डिग्री गुजरात विश्वविधालय से प्राप्त की.
  • 1975-1977 के आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसी संस्थाओं में प्रतिबंध लगा दिया गया था. जिसकी वजह से उन्हें छिपकर भेष बदल कर रहना पड़ रहा था पर उन हालात में भी तत्कालिन सरकार की गलत नीतियों का विरोध करना जारी रखा, पर्चे छापकर और लोगो में बाँटकर उन्होने अपने प्रबंध कौशल और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया था और जिसने उनके नेतृत्व क्षमता का और विकास किया उनकी सराहना भी हुई.
  • वे 1985 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े और 1987 में गुजरात के प्रदेश सचिव बने. फिर अहमदाबाद के नगर निगम के चुनाव में उन्होने भाग लिया जिसमें पहली बार भाजपा को जीत हासिल हुई.

 

  • उन्होने 1990 में श्री लालकृष्ण आडवाणी के अयोध्या रथ-यात्रा का भव्य आयोजन किया ये उनका पहला राष्ट्रीय स्तर कार्य था, जिससे देश के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान उनपर गया.
  • धीरे-धीरे उनका कद भाजपा में बढ़ता गया, 1995 में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव बने और नई दिल्ली से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कार्य-भार सम्भालने लगे. 1998 में भाजपा के प्रमुख सचिव बने और उस समय के लोकसभा चुनाव में भाजपा को जीत हासिल करने में मदद की.
  • 2002 के गुजरात सभा चुनाव में भाग लेते हुए राजकोट से जीतकर वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने.
  • उनकी सरकार को 2002 के गुजरात दंगे पर सही नियंत्रण नीति ना अपनाए जाने का जिम्मेदार ठहराया गया, जो गोधरा में हिन्दु तीर्थयात्रीयों को ट्रेन में जलाए जाने के आक्रोश का नतीजा था.

 

  • हालांकि बाद में उन्हे सर्वोच्च न्यायलय से बरी (क्लीन चीट) कर दिया गया पर्याप्त सबूत ना मिलने के आधार पर.
  • जिसकी वजह से उन्हे पद से इस्तिफा देने के लिए मजबूर किया गया विपक्षी दलों के द्वारा. पर दिसम्बर 2002 में ही वो वापस चुनाव जीतकर गुजरात के मुख्यमंत्री बने, लगातार 12 साल तक वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहें.
  • वहाँ के विकास के लिए उन्होने कई योजनाएँ लागू की और गुजरात को आर्थिक तौर पर मजबूत किया. वहाँ के सभी गाँवो में बिजली पहुँचाने से लेकर कृषि उत्पाद को बढ़ावा देने जैसे और भी कई कार्य किए, विदेशी निवेश को सफलता पूर्वक गुजरात लाने में भी कामयाब रहें. भाजपा को उनके इन कार्यों से काफी सहायता मिली.

 

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3 COMMENTS

  1. Thank you so much 🙂🙂🙂🙂

  2. नये साल के शुभ अवसर पर आपको और सभी पाठको को नए साल की कोटि-कोटि शुभकामनायें और बधाईयां। Nice Post ….. Thank you so much!! 🙂 🙂

  3. ketan danidhariya

    bahut badhiya bhai

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