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पुत्रवधू पर हिंदी कविता || Poem On Daughter in Law in Hindi Bahu Par Kavita

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पुत्रवधू पर हिंदी कविता - Poem On Daughter in Law in Hindi Bahu Par Kavita

 

  • पुत्रवधू

 

  • कलियों से फूल बनकर
    संसार को महकाये जो,
    चंद्रमा की चांदनी बनकर
    संसार को चमकाये जो,
    चिड़ियों सी चहकने वाली,
    परियों सी लहकने वाली,
    बेटी का फर्ज़ निभाकर,
    सात फेरों को आज़माकर,
    दांपत्य जीवन ग्रहण करे जो,
    बेटी से वरवधु कहलाये वो….
    वरवधु की ये कथा प्राचीन है।।
    मन में ये दुविधा आसीम है ।।
    खुशियों का माहौल छाया था
    सर्वस्व त्याग रखा ससुराल में कदम.. 
    पर उसे क्या ज्ञात था 
    सहना होगा अब लाखों सितम…
    सास ससुर को अपनाया,
    माता पिता का रूप समाया,
    पति प्रेम मन मे भरमाया,
    परमेश्वर के स्थान पर बैठाया,
    दुलार मिला ससुराल का एेसे
    प्यार मिला हो संसार का जैसे 
    खुद को सौभाग्यवान समझे ।।
    खुद को ही मूल्यवान समझे ।।
    चार दिन की चांदनी, फिर अधेरी रात,
    आओ सबको बताएँ, फिर गहरी बात,
    जेठ ननंद दिए जाए ताने, 
    वरवधु बात सभी की माने, 
    चुपचाप सहती जाती है वो, 
    तिरस्कार गले लगाती है वो,
    जल से निकाले जाने पर,
    मछली जैसे तड़पती है..
    पल-पल, हर-पल,
    वरवधु वैसे कलपती है..
    पिंजरबंद पक्षियों की भाँति ।।
    चार दीवारी में है सुमट जाती ।।
    मन धिक्कारे उसे..
    बात है आत्मसम्मान की, 
    क्यू़ं तू इतना सहे.. 
    बात है स्वाभिमान की,
    लोकलाज को त्यागकर,
    बेशर्मी बेहयायी को अपनाकर,
    अपने लिए अावाज उठाए वो
    गदगद आवाज लिये,
    अश्रु संग छिपाए वो..
    क्युँ कहलाये वो पुत्रवधू 
    क्यूँ कहलाये वो वरवधु 
    खुद अग्नि पर स्वाहा हो जाए ।।
    दामन पर कभी आंच ना आए ।।
    मिट्टी में मिल जाना है

    जल कर राख हो जाना है
    पर नहीं सहना अत्याचार सभी
    वीरांगना मुझको कहलाना है
    देखिए ये हैं पुत्रवधू
    कहलाती है जो वरवधु
    दुखी जीवन की गाथा है 
    इनके बिना जीवन आधा है
    यही तो संसार की जननी है 
    हर किसी की माता है
    इनका अब सम्मान करें
    जग में एक संचार करें
    अपना काम स्वयं करें
    पुत्रवधू को काहे तड़पाएं
    इंसान है वो भी 
    ये बात कभी भूल ना जाएं ।।मधुमती ( दिल्ली )

 

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