किसान पर कविता – Poem On Farmer in Hindi Language

किसान पर कविता – Poem On Farmer in Hindi Language – Kisan Par kavita – Poem On Farmer in Hindi Language – Poem On Farmer in Hindi Language

 

  • लिखता मैं किसान के लिए

 

  • लिखता मैं किसान के लिए
    मैं लिखता इंसान के लिए
    नहीं  लिखता धनवान के लिए
    नहीं  लिखता मैं भगवान के लिए
    लिखता खेत खलियान के लिए
    लिखता मैं किसान के लिए
    नहीं  लिखता उद्योगों के लिए
    नहीं  लिखता ऊँचे मकान के लिए
    लिखता हूँ सड़कों के लिए
    लिखता मैं इंसान के लिए
    क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
    नहीं उम्मीद इसकी मुझे
    खेत खलियान में बीज ये बो दे
    सड़क का एक गढ्ढा भर देती
    ये काफ़ी इंसान के लिए
    लिखता हूँ किसान के लिए
    लिखता मैं इंसान के लिए
    आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
    पर जगत का एक पथिक  पढ़े
    फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
    इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
    पिछड़े भारत से ज़्यादा
    भूखे भारत से डरता हूँ
    फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
    फिर किसान पर लिखता हूँ
    क्योंकि
    लिखता मैं किसान के लिए
    लिखता मै इंसान के लिए
    – दीपक शर्मा
  • जय भारतीय किसान
    तुमने कभी नहीं किया विश्राम
    हर दिन तुमने किया है काम
    सेहत पर अपने दो तुम ध्यान
    जय भारतीय किसान।
    अपना मेहनत लगा के
    रूखी सूखी रोटी खा के
    उगा रहे हो तुम अब धान
    जय भारतीय किसान।
    परिश्रम से बेटों को पढ़ाया
    मेहनत का उनको पाठ सिखाया
    लगाने के लिए नौकरी उनको
    किसी ने नहीं दिया ध्यान
    जय भारतीय किसान।
    सभी के लिए तुमने घर बनाए
    अपने परिवार को झोपडी में सुलाए
    तुमको मिला नही अच्छा मकान
    जय भारतीय किसान।
    लोकगीत को गा के
    सबके सोए भाग जगा के
    उगा रहे हो तुम अब धान
    जय भारतीय किसान।
    कोमल यादव
    खरसिया ,रायगढ़(छ0ग0)
    likhata main kisaan ke lie
    main likhata insaan ke lie
    nahin likhata dhanavaan ke lie
    nahin likhata main bhagavaan ke lie

 

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