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महिला दिवस पर कविता – Poem On Women’s Day in Hindi Language

Poem On Women’s Day in Hindi Language – Poem On Women’s Day in Hindi Language – महिला दिवस पर कविता – Poem On Women’s Day in Hindi Language

 

  • महिला दिवस पर कविता – Poem On Women’s Day in Hindi Language

 

  • स्त्री
    तुम पढ़ते हो मुझे सिर्फ किताबों में
    तुम गढ़ते हो मुझे सिर्फ दूसरे के प्रतिमानों में
    सुना तुमने सिर्फ महरिन को डाँटना
    और ऑफिस की किचकिच
    लिखा देखा सिर्फ बच्चों की नोटबुक
    कभी जो पढ़ लेते तुम मुझे तो
    शायद आज मैं स्त्री होती
    तुम पढ़ते हो मुझे सिर्फ शायरी और शेरो में
    तुम गढ़ते हो मुझे सिर्फ फेसबुक के स्लोगन में
    सुना तुमने सिर्फ समाज के ठेकेदारों को
    और कुछ निकृष्ट सोच और बातें
    लिखा देखा सिर्फ अखबारों का सच
    कभी जो पढ़ लेते तुम मुझे तो
    शायद आज मैं स्त्री होती
    तुम बाँटते हो मुझे सिर्फ रिश्तों की चौखट में
    तुम गढ़ते हो मेरी आजादी सिर्फ अपने साँचों में
    कहा सिर्फ तुमने अपनी दी सौगातें
    कभी जो गढ़ लेते तुम मुझे तो
    शायद आज मैं स्त्री होती
    नाम — डॉ शुभा श्रीवास्तव
  • कभी खुद से भी खुद को देख ले ऐ नारी।।।
    तेरे होने से ही चलती है दुनिया ये सारी।
    कभी खुद से भी खुद को पहचान ले ऐ नारी।
    तू है तो है उजाला, वरना अंधियारी सी है ये दुनिया सारी।।
    तू डरती रही तो वो डराते रहे,
    तू झुकती रही तो लोग झुकाते रहे,
    तू सहती रही तो लोग जुल्म ढाते रहे।
    तू सत्य है, यूँ असत्य न बन।
    तू जीवित है,  तू मिट्टी ना बन।
    लोग गिराएंगे,  लोग तुझे डराएंगे।
    पर तू, तू डरना मत, तू गिरना मत।।
    तू आगे बढ़, तू हिम्मत दिखा।
    तू बन ऐसी वीरांगना जो मरकर भी आज जीवित हैं।
    तू बन रानी लक्षमीबाई तू बन रानी चेन्नमा,
    तू बन रानी पद्मिनी तू बन जा वीरांगना झलकारी।
    तू अब न रहना चुप अब ना है चुप रहने की बारी।
    तू अब लड़ना उनसे जिन्होंने तेरी लाज उघारी,
    तू बन जवाब उनका जिन्होंने उठाया था तुझ पर सवाल।
    तू उठ खड़ी हो और बता इन्हें,
    तू है तो है दुनिया ये सारी, तू है तो है दुनिया ये सारी।
    – आँचल वर्मा

 

  • नारी
    फूल जैसी कोमल नारी, कांटो जितनी कठोर नारी
    अपनो की हिफासत मे सबसे अव्वल नारी
    दुखो को दूर कर, खूशियो को समेठे नारी
    फिर लोग क्यो कहते तेरा अत्सित्व क्या नारी
    जब अपने छोटे छोटे व्खाइशो को जीने लगती  नारी
    दुनिया दिखाती है उसे उसकी दायरे सारी
    अपने धरम मे बन्धी नारी, अपने करम मे बन्धी नारी
    अपनो की खूशी के लिये खुद के सपने करती कुुरबान नारी
    जब भी सब्र का बाण टूटे तो सब पर भारी नारी
    फूल जैसी कोमल नारी, कांटो जितनी कठोर नारी.
    – radhika birkad

 

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