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स्वच्छ भारत अभियान पर कविता Swachh Bharat Abhiyan Poem in Hindi kavita

Swachh Bharat Abhiyan Poem in Hindi – स्वच्छ भारत अभियान पर कविता – Swachh Bharat Abhiyan Poem in Hindi  – स्वच्छ भारत अभियान पर कविता – Swachh Bharat Abhiyan Poem in Hindi – swachata abhiyan poem in hindi

 

  • स्वच्छ भारत / स्वच्छता अभियान 

 

  • भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    हम सबको ही मिल करके
    सम्भव हर यत्न करके
    बीडा़ यही उठाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    होगा जब ये भारत स्वच्छ
    सब जन होंगे तभी स्वस्थ
    सबको यही समझाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    गंगा माँ के जल को भी
    यमुना माँ के जल को भी
    मोती सा फिर चमकाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    आओ मिल कर करें संकल्प
    होना मन में कोइ विकल्प
    गन्दगी को दूर भगाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    देश को विकसित करने का
    जग में उन्नति बढ़ाने का
    नई नीति सदा बनाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    हम सबको ही मिल करके
    हर बुराई को दूर करके
    आतंकवाद को भी मिटाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    मानवता को दिल में रखके
    धर्म का सदा आचरण करके
    देश से कलह मिटाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    सत्य अहिंसा न्याय को लाकर
    सबके दिल में प्यार जगाकर
    स्वर्ग को धरा पर लाना है
    भारत को स्वच्छ बनाना है
    भारत को ऊँचा उठाना है
    – कंचन पाण्डेय ( Kanchan Pandey )

 

  •  पॉजिटिव इंडिया …

                “””””””””””””””””””
               ( एक सकारात्मक सन्देश .)
              बहुरंगी मेरा देश ..तिरंगा एक विशेष
              बरगद हे मेरा देश    डाल-डाल प्रदेश !
                    हरी-भरी धरा हो… घर-घर यह सन्देश।।
                     स्वच्छ-सुन्दर हो जाये .मेरा भारत देश…!!
           सत्य-मेव जयते…उद्घोष करो कहते .!!
            श्रमेव– जयते …  संकल्प करो कहते…!!
                   कर्मशील जीवन हो…यही “राज-धर्म “संदेश !!
                        प्रगति-पथ की ओर….मेरा भारत देश….. !!
                                 “””””””””””””””””””””””””””””“”””
                  हिमगिरि मस्तक हो,,जी जान से प्यारा,
                    उज्ज्वल तन-मन हो  माँ गंगा सी धारा ..!
                        झूठ-कपट से दूर , हो निर्मल सबकी सोच .
                          राग-द्धेष मिट जाये … हो जाएँ
      कल्मष -शेष
                             भ्र्ष्टाचार-मुक्त हो ..  मेरा भारत देश   …!!
                              “””””” “”””””””””””””””””””””””””””””“”””
                    क्रांति की पावन ज्योत .जलती रहे चहुँ ओर
                       चलते रहो निरन्तर ….  बदलाव का है दौर….!
                        हर यौवनकी हुंकार … हो अदभुत उनमे जोश….!!
                         नव-भारत का अभिषेक..हो न्याय-प्रिय नरेश
                                जगत गुरु हो फिरसे   मेरा भारत देश  …!!
                                “”””””””””””””””””””””””””””””“””””””””””
                         वंदे-मातरम … भारत माता की “जय”
                         “””””””””””””     “”””””””””””””””””””” .
                                                                       सांवरमल सैनी ,सीकर (राज.)
                                                                       मान-सम्मान, तिलकनगर

 

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