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हिन्दी कविता के नौ रस – 9 Ras in Hindi Poetry kavita poems paribhasha with example :

9 ras in hindi poetry – हिंदी कविता के रस
हिन्दी कविता के नौ रस - 9 Ras in Hindi Poetry kavita poems paribhasha with example

______________ रस निरूपण – 9 Ras in Hindi Poetry _____________

  • रस का शाब्दिक अर्थ है – निचोड़। वस्तुतः काव्य को पढ़कर या सुनकर, और नाटक को देख कर सहृदय श्रोता , पाठक या के के चित्त में जो लोकोत्तर आनंद उत्पन्न होता है वही रस है। यह आनन्द अर्थात् रस लौकिक न होकर अलौकिक होता है। रस काव्य की आत्मा है। इस रक़्स की निष्पत्ति के लिए भारत मुनि ने जो सूत्र दिया है वह इस प्रकार है :-
    विभानुभाव व्यभिचारिसंयोगात रसनिष्पत्ति
    अर्थात विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
    ____विभाव____
    “विभाव” का अर्थ होता है रसानुभूति के कारण। या यूँ कहिये की किसी के हृदय में उपस्थित स्थायी भाव को जागृत कर उन्हें महसूस कराने का कारण।
    __अनुभाव__
    “अनुभाव” का अर्थ है, वो शारीरिक चेस्टाएँ जो भाव के उत्पन्न होने पर दृश्य होती हैं। जैसे प्रेमी से अत्यधिक समय के बाद पुनर्मिलन पर रति का भाव उतपन्न होता है, परिणामस्वरूप, प्रेमिका की आंखों में आंसू तथा देह में कंपन होता है। इन परिणामों को अनुभाव कहते हैं
    ____व्यभिचारी भाव___
    जो रसों में नाना रूप से विचरण कर के उन्हें और पुष्ट बनाते हैं, उन्हें व्याभिचारी भाव कहते हैं। इनकी संख्या 33 मानी गयी है।
    ◆◆◆◆◆रसों के भेद (ras ke bhed with example in hindi)◆◆◆◆◆◆
    रसों के नौ भेद बताए गए हैं, किन्तु किसी किसी आचार्यों ने इन्हें 11 भी बताया है।

    ◆ श्रृंगार रस shringar ras ki paribhasha :—

    इसका स्थायी भाव “रति” है। नायक – नायिका सामान्यतः आलंबन विभाव होते हैं। कटाक्ष, चुम्बन, आलिंगन आदि इसके अनुभाव हैं। हर्ष, लज्जा उत्सुकता आदि इसके संचारी भाव हैं।
    श्रृंगार रस के दो भेद हैं – संयोग श्रृंगार तथा वियोग श्रृंगार। नायक नायिका के मिलन की स्तिथि में संयोग श्रृंगार होता है और वियोग की स्तिथि में वियोग श्रृंगार। example of shringar ras in hindi जैसे:-
    कहत नटत रीझत खीझत मिलत खिलत लजियात।
    भरे  भौन  में  करत  हैं,  नैनन  ही  सों  बात।। ( संयोग श्रृंगार)
    पिऊ से कह संदेसड़ा, है भौंरा है काग।
    जेहि धन विरहन जरि मुई, तेहिक धुआँ हमें लाग।।( वियोग श्रृंगार)

    ◆वीर रस veer ras ki paribhasha:—

    इसका स्थायी भाव “उत्साह” है। शत्रु सामान्यतः आलंबन होता है। लाल नेत्र, दर्पयुक्त वाणी आदि इसके अनुभाव हैं। धृति, उग्रता आदि संचारी भाव इसे पुष्ट करते हैं। example of veer ras in hindi जैसे:-
    प्रतिभट कटक कटीले केते काटी काटी,
    कलिका की किलकि कलेऊ देती काल को।

  • ◆करुण रस karun ras ki paribhasha:-

    इसका स्थायी भाव “शोक” है। हीनावस्था सामान्यतः आलंबन विभाव होती है। रुदन, भूमि पतन आदि अनुभव हैं। चिंता, जड़ता आदि संचारी भाव हैं। karun ras example in hindi जैसे:-
    करुणे, क्यों रोती है? उत्तर में और अधिक तू रोई।
    मेरी विभूति है जो, उसको भवभूति क्यों कहे कोई?       (मैथिलीशरण गुप्त)

    ◆अद्भुत रस adbhut ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “विस्मय” है। सामान्यतः अलौकिक कार्य या वस्तु विभाव है। स्तंभ, रोमांच आदि अनुभाव हैं। हर्ष आदि संचारी भाव हैं। adbhut ras example in hindi जैसे:–
    आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा किसे उतरे पार।
    राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।।

  • ◆रौद्र रस roudra ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “क्रोध” है। शत्रु सामान्यतः विभाव है। गर्जन, कंपन आदि अनुभाव हैं। मद, उग्रता आदि इसके पोषक संचारी भाव हैं। example of roudra ras in hindi जैसे :–
    श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्षोभ से जलने लगे।
    सब शील अपना भूल कर करतल युगल मलने लगे॥
    संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े।
    करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठ कर खड़े॥

    ◆वीभत्स रस vibhatsa ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “घृणा” है। मांस रुधिर चर्बी इत्यादि सामान्यतयः विभाव हैं। मुंह बचकाना, नाक सिकोड़ना आदि अनुभाव हैं। विषाद, निर्वेद आदि संचारी भाव हैं। example of vibhatsa ras in hindi जैसे:—
    ‘विष्टा पूय रुधिर कच हाडा।
    बरषइ कबहुं उपल बहु छाडा।।’

  • ◆भयानक रस bhyanak ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “भय” है। भयानक वस्तु अथवा पुरुष साधारणतः विभाव हैं। चीखना चिल्लाना अनुभाव हैं।
    शंका चिंता आदि संचारी भाव हैं। example of bhyanak ras in hindi  जैसे:—
    अखिल यौवन के रंग उभार, हड्डियों के हिलाते कंकाल
    कचो के चिकने काले, व्याल, केंचुली, काँस, सिबार

    ◆शांत रस shant ras ki paribhasha:—-

    इसका स्थायी भाव “निर्वेद” है। संसार बोध, परमात्म चिंतन आदि विभाव हैं। रोमांच, संसार भीरुता आदि अनुभव हैं। हर्ष, धृति मति आदि संचारी भाव हैं। example of shant ras in hindi  जैसे :—
    जब मै था तब हरि नहिं अब हरि है मै नाहिं।
    प्रेम गली अति साँकरी, त म ओ न समाहीं ।।

  • ◆वात्सल्य रस vatsalya ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव “वात्सल्य प्रेम” है। बालक विभाव है। अंगस्पर्श चुम्बन आदि अनुभाव हैं। हर्ष गर्व चिंता आदि संचारी भाव हैं। example of vatsalya ras in hindi जैसे:—
    सन्देसो देवकी सों कहियो।
    हौं तो धाय तिहारे सुत कि कृपा करत ही रहियो।
    तू तौ टेव जानि तिहि है हौ तऊ, मोहि कहि आवै।
    प्रात उठत मेरे लाल लडैतहि माखन रोटी भावै।।

    ◆भक्ति रस bhakti ras ki paribhasha:–

    इसका स्थायी भाव है ” भगवान विषयक रति”। विभाव भगवान हैं। अश्रु रोमांच आदि अनुभाव हैं। हर्ष मति आदि संचारी भाव हैं। example of bhakti ras in hindi जैसे :–
    अँसुवन जल सिंची-सिंची प्रेम-बेलि बोई।
    मीरा की लगन लागी, होनी हो सो होई।।
    – अंशु प्रिया ( Anshu priya)

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