बुध ग्रह मन्त्र – Budh Graha Mantra in Hindi And Sanskrit Budh Stotra Beej Mantra :

बुध ग्रह मन्त्र – Budh Graha Mantra in Hindi And Sanskrit Budh Stotra Beej Mantra
बुध ग्रह मन्त्र - Budh Graha Mantra in Hindi And Sanskrit Budh Stotra Beej Mantra

बुध ग्रह मन्त्र – Budh Graha Mantra in Hindi And Sanskrit Budh Stotra Beej Mantra

  • बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए पन्ना धारण करना चाहिए. ब्राह्मण को हाथी दांत, हरा वस्त्र, मूंगा, पन्ना, स्वर्ण, कपूर, शस्त्र, खट्टे फल तथा घृत दान करने चाहिए. जिन लोगों को बुध के कारण बाधा आ रही है, वे इस बुधवार को साबूत मूंग न खाएं और इसका दान करें. मंगलवार की रात को हरे मूंग भिगोकर रखें और बुधवार की सुबह यह मूंग गाय को खिलाएं.

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  • बुध का वैदिक मंत्र – Vedic Mantra for Mercury Budh
    ऊँ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च ।
    अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्विश्वे देवा यजमानश्च सीदत ।।
  • बुध का पौराणिक मंत्र – Poranik Mantra for Mercury Budh
    प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम ।
    सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम ।।
  • बुध गायत्री मंत्र – Budh Gayatri Mantra
    ऊँ चन्द्रपुत्राय विदमहे रोहिणी प्रियाय धीमहि तन्नोबुध: प्रचोदयात ।
  • बुध के तांत्रोक्त मंत्र – Tantrokta Mantra for Mercury Budh
    ऊँ ऎं स्त्रीं श्रीं बुधाय नम:
    ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:
    ऊँ स्त्रीं स्त्रीं बुधाय नम:
  • बुध का नाम मंत्र – Naam Mantra for Mercury Budh
    ऊँ बुं बुधाय नम:

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  • बुध ग्रह की शांति के लिए पहले बुध के बीज मन्त्र का 11, 21 या 108 बार जाप करना चाहिए. फिर बुध स्तोत्र को पढ़ना चाहिए.
  • Budh Beej Mantra
    ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः ॥
  • Budh Stotra – बुध स्तोत्र

  • पीताम्बर: पीतवपु किरीटी,
    चतुर्भुजो देवदु:खापहर्ता ।
    धर्मस्य धृक सोमसुत: सदा मे,
    सिंहाधिरुढ़ो वरदो बुधश्च ।। 1 ।।
    प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
    सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम ।। 2 ।।
    सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित: ।
    सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम ।। 3।।
    उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति: ।
    सूर्यप्रियकरोविद्वान पीडां हरतु मे बुधं ।। 4।।
    शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुन: ।
    सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु ।। 5।।
    श्याम: शिरालश्चकलाविधिज्ञ:,
    कौतूहली कोमलवाग्विलासी ।
    रजोधिको मध्यमरूपधृक स्या-दाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्र: ।। 6।।
    अहो चन्द्रासुत श्रीमन मागधर्मासमुदभव: ।
    अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहु: खड्गखेटकधारक: ।। 7।।
    गदाधरो नृसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित: ।
    केतकीद्रुमपत्राभ: इन्द्रविष्णुप्रपूजित: ।। 8।।
    ज्ञेयो बुध: पण्डितश्च रोहिणेयश्च सोमज: ।
    कुमारो राजपुत्रश्च शैशवे शशिनन्दन: ।। 9।।
    गुरुपुत्रश्च तारेयो विबुधो बोधनस्तथा ।
    सौम्य: सौम्यगुणोपेतो रत्नदानफलप्रद: ।। 10।।
    एतानि बुधनामानि प्रात: काले पठेन्नर: ।
    बुद्धिर्विवृद्धितां याति बुधपीडा न जायते ।। 11।।
    ( इति मंत्रमहार्णवे बुधस्तोत्रम )
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