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छोटे संस्कृत स्लोगन – Slogan in Sanskrit With Meaning in Hindi

छोटे संस्कृत स्लोगन – Slogan in Sanskrit With Meaning in Hindi
छोटे संस्कृत स्लोगन - Slogan in Sanskrit With Meaning in Hindi

छोटे संस्कृत स्लोगन – Slogan in Sanskrit With Meaning in Hindi

  • यत्नवान् सुखमेधते ॥
    अर्थ : प्रयत्नशील मानव सुख पाता है ।
  • ते पुत्रा ये पितुर्भक्ताः ॥
    अर्थ : जो पितृभक्त हो वही पुत्र है ।
  • उद्योगसम्पन्नं समुपैति लक्ष्मीः ॥
    अर्थ : उद्योग-संपन्न मानव के पास लक्ष्मी आती है ।
  • को लोकमाराधयितुं समर्थः ॥
    अर्थ : सभी को कौन खुश कर सकता है ?

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  • चिरनिरूपणीयो हि व्यक्तिस्वभावः ॥
    अर्थ : व्यक्ति का स्वभाव बहुत समय के बाद पहचाना जाता है
  • विद्या योगेन रक्ष्यते ॥
    अर्थ : विद्या का रक्षण अभ्यास से होता है ।
  • किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या ॥

    अर्थ : कल्पलता की तरह विद्या कौन सा काम नहीं सिध्ध कर देती ?

  • सोत्साहानां नास्त्यसाध्यं नराणाम् ॥
    अर्थ : उत्साही मानव को कुछ भी असाध्य नहीं होता ।
  • उद्यमे नावसीदति ॥
    अर्थ : उद्यम करनेवाला का नाश नहीं होता ।
  • बलवन्तो हि अनियमाः नियमा दुर्बलीयसाम् ॥
    अर्थ : बलवान को कोई नियम नहीं होते, नियम तो दुर्बल को होते हैं ।
  • सर्वे मित्राणि समृध्दिकाले ॥
    अर्थ : समृद्धि काल में सब मित्र बनते हैं ।
  • श्रोतव्यं खलु वृध्दानामिति शास्त्रनिदर्शनम् ॥
    अर्थ : वृद्धों की बात सुननी चाहिए एसा शास्त्रों का कथन है ।
  • असंहताः विंनश्यन्ति ॥
    अर्थ : जो लोग बिखर कर रहते है वे नष्ट हो जाते हैं ।
  • अपरीक्ष्यकारिणं श्रीः परित्यजति ॥
    अर्थ : बिना विचारे कार्य करने वाले को लक्ष्मी त्याग देती हैं ।

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  • अनागतं यः कुरुते स शोभते ॥
    अर्थ : आनेवाले संकट को देखकर अपना भावी कार्यक्रम निश्चित करने वाला सुखी रहता है ।
  • यद् भविष्यो विनश्यति ॥

    अर्थ : ‘जो होगा देखा जाएगा’ कहने वाले नष्ट हो जाते हैं ।

  • यो यस्मिन् कर्माणि कुशलस्तं तस्मित्रैव योजयेत् ॥
    अर्थ : जो मनुष्य जिस कार्य में निपुण हो, उसे वही कार्य सौंपना चाहिए ।
  • दुःसाध्यमपि सुसाध्यं करोत्युपायज्ञः ॥
    अर्थ : उपायों का ज्ञाता कठिन को भी आसान बना देता है ।

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  • कार्य पुरुषकारेण लक्ष्यं सम्पद्यते ॥
    अर्थ : निश्चय कर लेने पर कार्य पूर्ण हो जाता है ।
  • असमाहितस्य वृतिनर विद्यते ॥
    अर्थ : भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर कुछ भी प्राप्त नहीं होता ।
  • विद्या परमं बलम ॥
    अर्थ : विद्या सबसे महत्वपूर्ण ताकत है ।

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वृन्द के दोहे – Kavi Vrind Ke Dohe With Meaning in Hindi

वृन्द के दोहे – Kavi Vrind Ke Dohe With Meaning in Hindi
वृन्द के दोहे - Kavi Vrind Ke Dohe With Meaning in Hindi

वृन्द के दोहे – Kavi Vrind Ke Dohe With Meaning in Hindi

  • अपनी पहुँच बिचारी के करतब कीजे दौर।
    तेते पाँव पसारिये जेती लांबी सौर॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि व्यक्ति को पहले अपनी क्षमता का आंकलन करने के बाद ही अपना लक्ष्य निश्चित करना चाहिए. ताकि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें. अपनी क्षमता का सही आंकलन किये बिना लक्ष्य पाने की लालसा करना चादर से बहार पैर पसारने जैसा है.
  • विद्या धन उद्यम बिना, कहो जो पावे कौन
    बिना डुलाये न मिले, ज्यों पंखे की पौन।
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि जीवन में कुछ भी पाने के लिए परिश्रम करना पड़ता है. मेहनत के बिना कोई विद्या नहीं प्राप्त कर सकता है. ठीक वैसे हीं जैसे पंखे को हिलाये बिना हवा नहीं मिलती है.
  • सबै सहायक सबल के, कोउ न निबल सहाय ।
    पवन जगावत आग को, दीपहिं देत बुझाय ॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि मजबूत व्यक्ति की दुनिया में हर कोई सहायता करता है, कमजोर व्यक्ति की कोई सहायता नहीं करता है. जैसे हवा आग को बढ़ाती है लेकिन दीपक को बुझा देती है.
  • अति हठ मत कर हठ बढ़े, बात न करिहै कोय ।

    ज्यौं –ज्यौं भीजै कामरी, त्यौं-त्यौं भारी होय ॥

  • अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि ज्यादा जिद नहीं करनी चाहिए. क्योंकि ज्यादा जिद करने से लोग बात करना और रूठने को महत्व नहीं देने लगते हैं. ठीक उसी तरह जैसे की कोई छोटा कम्बल जैसे-जैसे भींगता है वैसे-वैसे भारी होता जाता है.

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  • जैसे बंधन प्रेम कौ, तैसो बन्ध न और ।
    काठहिं भेदै कमल को, छेद न निकलै भौंर ॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि जैसा प्यार का बंधन होता है, वैसा बंधन किसी और चीज का नहीं होता है. जैसे कि लकड़ी के काठ को छेद देने वाला भौंरा कमल को नहीं छेदता है.
  • वृन्द के दोहे – Kavi Vrind Ke Dohe With Meaning in Hindi
  • स्वारथ के सबहिं सगे,बिन स्वारथ कोउ नाहिं ।
    सेवै पंछी सरस तरु, निरस भए उड़ि जाहिं ॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि इस दुनिया में सभी स्वार्थवश दूसरों से जुड़े होते हैं या उन्हें अपना कहते हैं. ठीक वैसे हीं हरे-भरे वृक्ष में पक्षी रहते हैं, लेकिन उसके सूख जाने पर वे उस पेड़ को छोड़कर उड़ जाते हैं.
  • मूढ़ तहाँ ही मानिये, जहाँ न पंडित होय ।
    दीपक को रवि के उदै, बात न पूछै कोय ॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि मूर्ख व्यक्ति को वहीं महत्व देना चाहिए जहाँ कोई विद्वान ना हो. क्योंकि विद्वान के होने के बाद मूर्ख का कोई महत्व नहीं रह जाता है. जैसे कि सूर्य के उदय हो जाने के बाद दीपक को कोई महत्व नहीं देता है.
  • बिन स्वारथ कैसे सहे, कोऊ करुवे बैन।

    लात खाय पुचकारिये, होय दुधारू धैन॥

  • अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि बिना स्वार्थ के कोई भी व्यक्ति कड़वे वचन नहीं सहता है. जैसे दुधारू गाय की लात खाने के बाद भी व्यक्ति उसे दुलारता और पुचकारता है क्योंकि दूध उसी से मिलना है.

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  • कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर।
    समय पाय तरुवर फरै, केतिक सींचो नीर।।
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि कोई भी काम धैर्य के साथ होता है. धीरज खोना अच्छा नहीं होता होता है. ठीक वैसे हीं जैसे वृक्ष पर समय आने पर हीं फल लगते हैं, चाहे उसे समय से पहले कितने हीं पानी से सींचा जाये.
  • क्यों कीजे ऐसो जतन, जाते काज न होय ।
    परबत पर खोदै कुआँ, कैसे निकरै तोय ॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि ऐसा प्रयास नहीं करना चाहिए जिससे कि काम ना बने. जैसे कि पर्वत पर कुआं खोदने से कोई फायदा नहीं होता.
  • जाकौ बुधि-बल होत है, ताहि न रिपु को त्रास ।
    घन –बूँदें कह करि सके, सिर पर छतना जास ॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि जिसके पास बुद्धि रूपी बल होता है, उसे शत्रु का भय नहीं होता है. ठीक उसी तरह जिसके सिर पर छत हो, बादल और वर्षा की बूंदों से उसे कोई भय नहीं होता है.

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  • निरस बात, सोई सरस, जहाँ होय हिय हेत ।

    गारी प्यारी लगै, ज्यों-ज्यों समधन देत ।।

  • अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि जिस व्यक्ति के प्रति हमारे ह्रदय में लगाव और स्नेह का भाव होता है, उस व्यक्ति की नीरस बात भी सरस लगती है. जैसे समधिन के द्वारा दी जाने वाली गालियाँ भी अच्छी लगती हैं क्योंकि उन गालियों में स्नेह का भाव होता है.
  • जो जाको गुन जानहि सो तिहि आदर देत।
    काकिल अंबहि लेत है काग निबोरी लेत।।
  • अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि जो जिसका गुण जानता है वो उसी को आदर देता है. जिस प्रकार कोयल आम खाती है और कौआ नीम की निबौरी खाता है.
  • अति परिचै ते होत है, अरुचि अनादर भाय।
    मलयागिरि की भीलनी, चंदन देत जराय॥
    अर्थ: वृन्द जी इस दोहे में कहते हैं कि किसी के लिए अति सुलभ हो जाने से सामने वाले व्यक्ति की आप में रूचि नहीं रह जाती है. और व्यक्ति का अपमान होता है. जैसे कि मलयगिरी पर्वत की भीलनी उस चन्दन की लकड़ियों से खाना पकाती है, जो चन्दन सभी स्थानों पर महत्व पाता है.
  • वृन्द के दोहे – Kavi Vrind Ke Dohe With Meaning in Hindi
  • सूरदास के 11 पद अर्थ सहित || Surdas Ke Pad in Hindi With Meaning दोहे Dohe

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खेल quotes – Inspirational Sports Quotes in Hindi Status Shayari

खेल quotes – Inspirational Sports Quotes in Hindi Status Shayari
खेल quotes - Inspirational Sports Quotes in Hindi Status Shayari

खेल quotes – Inspirational Sports Quotes in Hindi Status Shayari

  • आप खिलाड़ी हों या नहीं जिंदगी में दूसरों के साथ खेल की भावना से पेश आना चाहिए. यानि की किसी से प्रतिस्पर्धा तो कीजिये, लेकिन उसके प्रति मन में कोई दुर्भावना नहीं रखनी चाहिए और उसे अपना दुश्मन कभी नहीं समझना चाहिए.
  • हर बच्चे को खेल में रूचि रखनी चाहिए, क्योंकि यह उसे शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है और साथ हीं उसके लिए करियर का एक मौका खोल देता है.
  • आपके Inspirations की List में कोई ना कोई खेल और कोई खिलाड़ी जरुर होना चाहिए.
  • खेल के माध्यम से हमें पता चलता है कि जीवन में Team का कितना महत्व होता है.

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  • Dedication के बिना ना तो खेल में सफलता पाना सम्भव है और ना हीं जिंदगी में.
  • मानसिक अभ्यास के महत्व को भी एक खिलाड़ी से ज्यादा अच्छे तरीके से कोई नहीं समझ सकता है.
  • जो खिलाड़ी मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत होता चला जाता है, वही बड़ा खिलाड़ी बन पाता है.

  • अगर आप किसी खेल से जुड़े हुए हैं और आप उसे अपना Profession नहीं बनाते हैं. तो भी वह आपके दूसरे Profession में भी मदद करेगा.
  • जो व्यक्ति किसी खेल से खिलाड़ी या दर्शक के रूप में जुड़ा हुआ है, वह यह जानता है कि बोलकर जवाब देने से अच्छा है कि आप अपने काम से दूसरों को जवाब दें.

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  • प्यार के खेल में या तो दोनों जीतते हैं या दोनों हारते हैं.
  • खेल खेलने वाला खिलाड़ी यह अच्छे से जानता है कि Time बर्बाद करने वाली चीजों से उसे बचना चाहिए.
  • एक अच्छे खिलाड़ी में धैर्य कूटकूट कर भरा होता है.
  • खेलों के बिना इस दुनिया में केवल कटुता भर जाएगी.
  • अपनी प्रतिभा के अनुरूप बहुत हीं कम खिलाड़ी प्रदर्शन कर पाते हैं.
  • खेल quotes – Inspirational Sports Quotes in Hindi Status Shayari
  • मजबूती Quotes – Strong Quotes in Hindi

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