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समाचार पत्र की उपयोगिता पर निबंध – Essay On Newspaper in Hindi :

Essay On Newspaper in Hindi – समाचार पत्र की उपयोगिता पर निबंध Essay On Newspaper in Hindi - Samachar Patra Ka Mahatva Nibandh Upyogita समाचार पत्र की उपयोगिता पर निबंध

समाचार पत्र की उपयोगिता पर निबंध – Essay On Newspaper in Hindi

  • समाचार-पत्र खबरों, विज्ञापनों, लेखों, सूचनाओं, किस्से-कहानियों इत्यादि का एक बड़ा एवं अनमोल संग्रह होता है. जिसे दिन-प्रतिदिन के खबरों के साथ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय भाषा के अलावा स्थानीय भाषाओं में भी ताजा प्रकाशित किया जाता है. जिससे हमें आस-पास के क्षेत्र, राज्य, देश और दुनिया की घटनाओं एवं परिस्थितियों सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियों का पता चलता है.
  • समाचार-पत्र से अभिप्राय समान आचरण से है, क्योंकि इसमें समान दृष्टिकोण को अपनाया जाता है इसलिए इसे समाचार-पत्र कहते हैं. इसे पक्षपात रहित होना चाहिए. यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का हिस्सा है जो सरकार और जनता के बीच की अहम कड़ी है. यह विश्व में घटित घटनाओं का दस्तावेज भी कहलाता है.
  • ये छपने से पहले कई चरणों से होकर गुजरता है समाचारों का दायित्व उसके संवादाता पर निर्भर करता है, जो पहले समाचार खोजकर लिखता है. इसके बाद उप-संपादक या संपादकीय विभाग के कर्मचारी खबर का संपादन करते हैं. फिर कंपोजिंग के लिए भेजा जाता है उसके बाद प्रूफ पढ़ा जाता है. फिर पेज बनने के बाद मशीन विभाग में उसकी छपाई होती है. इस तरह प्रकाशन के बाद सड़क, रेल, हवाई मार्ग से विभिन्न ऐजेंसीयों और स्थानों तक इसे पहुँचाया जाता है, जिससे लोगो तक समय से पहुँच सके. आज हर समाचारपत्र इंटरनेट में ‘ई-न्यूजपेपर’ के रूप में भी उपलब्ध होता है. जिससे तुरंत हमें सारी खबरें और भी आसानी से मिल जाती हैं.
  • समाचार-पत्र राजनितिक-सामाजिक, आर्थिक किसी भी तरह का हो सकता है. आज के वैज्ञानिक युग में रोजाना हो रहे अविष्कार अंनुसंधान से अवगत कराने का ये सस्ता और सरल उपाय है. आज से तीन शताब्दीयों पहले इसका अस्तित्व नहीं था संदेशवाहकों द्वारा समाचार एक से दूसरे जगह पहुँचाया जाता था.
  • विदेशो में सर्वप्रथम इसका चलन शुरू हुआ था, परन्तु भारत में ये अंग्रेजों के आगमन के बाद मुद्रण कला में प्रगति होने के साथ इसका प्रकाशन शुरू हुआ. भारत के सबसे पहले समाचार-पत्र का नाम ‘इंडिया गजट’ था जो सन्1834 में प्रकाशित हुआ था. इसके बाद हिन्दी का पहला साप्ताहिक समाचार-पत्र 30 मई, सन् 1826 को ‘उदन्त मार्तण्ड’ के नाम से प्रकाशित हुआ. इसके उपरांत राजा राममोहन राय ने ‘कौमुदी’ और ईश्वर चन्द्र ने ‘प्रभाकर’ पत्र निकाले. फिर इसके छपने का सिलसिला शुरू हो गया, स्वतंत्रता प्राप्ति के समय कई क्रांतिकारियों की आवाज बनी ये और लोगों को जागरूक कर एकजुट करने का हथियार भी.
  • आज हजारों दैनिक-साप्ताहिक समाचार-पत्रों का प्रकाशन देशभर में होता है. ये दैनिक, संध्या, पाक्षिक, साप्ताहिक, मासिक या त्रैमासिक पत्र हो सकता है. इसे जनता की आवाज भी कहा जाता है जो किसी भी राष्ट्र के उत्थान या पतन में अपनी भूमिका बखूबी निभाता है.
  • समाचार-पत्र समाज या राजनिति में फैली कुरिति को उजागर कर दूर करने में सहायक सिद्ध होता है. साथ हीं सरकारी नीति या कार्यों में हो रहे घोटाले, अपराधों आदि का पर्दाफाश भी करता है. विचारों को सही और स्पष्ट रूप से आम से लेकर खास तक पहुँचाने का साधन है ये जो हमारे विचारों और दृष्टिकोण को प्रभावित करता है.
  • समाचार पत्र सिर्फ सूचनाओं का माध्यम नहीं बल्कि हमारी आवश्यकता बन चुका है. शिक्षित वर्ग ही नहीं एक अशिक्षित इंसान भी इसके महत्व को अच्छे से समझता है. ये हर वर्ग हर तबके तक अपनी पहुँच रखता है. आज के दौर में जहाँ सभी के पास समय कम है और हर क्षेत्र से जुड़े रहना आवश्यक वहाँ ये विभिन्न क्षेत्र से हमें जोड़े रखता है. लोगों को बदलते तौर-तरीके और चलन के साथ तालमेल बनाए रखने में सहायता मिलती है. यह केवल घटनाओं से नहीं हालांकि उसके फलस्वरूप होने वाली प्रतिक्रिया से भी अवगत कराता है. ये एक वैचारिक क्रांति है जो हमेशा सक्रिय है. इससे लोगो में देशभक्ति की भावना जागृत होती है. उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों से अवगत कराता है और सजग रखता है तथा जनता को किसी भी तरह के अन्याय के विरोध में आवाज उठाने में मदद और साहस प्रदान करता है. जनता को अपना नेता चुनने में भी सहायता करता है.
  • इसके द्वारा हर मोड़ में सहायता मिलती है स्कूल से लेकर कॉलेज तक और कॉलेज से लेकर रोजगार तक हर पहलू में प्रतियोगिता के इस युग में अपनी अहम भूमिका हमारे लिए अदा करता है. देश-विदेश के बाजारों के उतार-चढ़ाव, शिक्षा, स्वास्थय, व्यापार, रोजगार संबधित सभी जानकारी इसके द्वारा आसानी से मिल जाते हैं. इसके वैवाहिक विज्ञापनों के द्वारा आज लोग शादियाँ भी तय करते हैं.
  • ये संस्कृति, परंपरा, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को सम्भाले रखने में सहायक सिद्ध होता है और एक-दूसरे के दृष्टिकोण, मान्यताओं एवं अपेक्षाओं को समझकर समाज में शांतिपूर्ण सामंजस्य स्थापित कर समस्याओं के सहमतिपूर्ण हल निकालना संभव हो पाता है.
  • जहाँ इसके कई सकरात्मक पक्ष हैं वहीं इसके नकारात्मक प्रभाव भी हैं. जब इसका उपयोग सिर्फ व्यवसायिक दृष्टिकोण से लाभ उठाने के लिए किया जाता है. सामाजिक उत्तरदायित्व को दूर कर सिफारिश और गुटबंदी के द्वारा दलाली और कमिशनखोरी के अनुसार खबरों को बेचा जाता है, तो ये लोगो के बीच मतभेद उत्पन्न कर कई बार हिंसक माहौल खड़ी कर देता है. इससे जनमत में भटकाव आ जाता है.
  • आज के बढ़ते व्यवसायिक प्रतियोगिता के दौड़ में आगे रहने के लिए मूल समाचारों से ज्यादा चटपटी खबरें और आर्कषक विज्ञापनों से लोगो को लुभाने की कोशिश होती है. ऐसा करना समाचार-पत्र की शक्तियों का अनुचित लाभ उठाना है ये लोगो खासकर युवा पीढ़ी को पथभ्रष्ट करती है.यह आधुनिक समाज का ताप मापक यंत्र है जो देश-दुनिया में होने वाली अच्छी-बुरी हर घटना का विश्लेषण करता है. ये घटनापरक और समस्यापरक दोनों तरह के समाचारों का प्रेषण कर उसकी तटस्थ समिक्षा कर समाज को नया नजरिया देता है.
  • समाचार-पत्र एक वैचारिक क्रांति है जिसका उद्देश्य मार्गदर्शन होना चाहिए. जो निष्पक्ष हो समाज और राष्ट्रहित के लिए उपयोगी सिद्ध हो और प्रगति के पथ पर चलने के लिए सदैव प्रेरित करे.

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2 comments

  1. Tanveer Hussain

    Most useful article keep it up…

  2. HindIndia

    Thanks for sharing such a nice article …. Really amazing post!! 🙂 🙂

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