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3 Hindi Poem On Dosti – हिंदी कविता दोस्ती पर Mitrata Par Kavita Sakha Sathi :

hindi poem on dosti – हिंदी कविता दोस्ती पर3 Hindi Poem On Dosti – हिंदी कविता दोस्ती पर Mitrata Par Kavita Sakha Sathi

3 Hindi Poem On Dosti – हिंदी कविता दोस्ती पर Mitrata Par Kavita Sakha Sathi

  • Dosti

  • Hindi Poem on Dosti
    एक ऐसा मेरा दोस्त था,

  • समझता था, समझाता था,
    हर कमी, हर गलती मेरी अपनाता था
    देर सवेर अपनी बातें सारी बतलाता था
    रूठने पर वही एक था जो मनाता था
    एक ऐसा मेरा दोस्त था।
    उसकी सोच उसकी समझ सबसे अजीब थी
    सबर से भरपूर वो, उसकी हर बात में तहज़ीब थी
    कभी सहारा, कभी सवेरा बन जाता था
    कहीं जो अंधेरों में छूट जाऊं,
    रोशनी को मुझतक ले आता था
    एक ऐसा मेरा दोस्त था।
    खामोशी को सुन लेता था,
    उदासी को पढ़ लेता था,
    दिख जाऊं जो कभी पलकें झुकाये
    तो साथ मेरे हंस लेता था,
    ज़िन्दगी में जितने भी थे खालीपन,
    वो सारे खाली हिस्सों को भर देता था,
    एक ऐसा मेरा दोस्त था।
    वो रौनक का बाजार लिए फिरता था,
    इर्द गिर्द दोस्तों की कतार लिए फिरता था,
    वो सबको अपना बनाना जानता था,
    वो हर मुश्किल को सुलझाना जानता था
    वो मायूसी को गुदगुदाना जानता था
    वो नाराज़गी को हंसाना जानता था
    एक ऐसा मेरा दोस्त था।
    – Jaya Pandey
  • दोस्त उसको कहते हैं

    दोस्त उसको कहते हैं

    कोई जो तुझपे अपना हक़ जताए,
    कोई जो अंधेरों में तेरा डर मिटाए,
    कोई जो तेरी उदासी को गुदगुदाए,
    और बेमतलब का इक रिश्ता निभाए,
    दोस्त उसको कहते हैं….
    कोई जो तेरी मायूसी का अंदाज़ा सही लगाए,
    जो तेरी तेरी चुप्पी तोड़कर ‘हंसी’ सजाए,
    जो तेरी हर खामी से वाकिफ़ हो,
    फिर भी तुझको अपना कहकर गले लगाए,
    दोस्त उसको कहते हैं…
    जो तुझको अपना राज़ बताए,
    जो तेरा हर इक राज़ छुपाए,
    जो तेरी तरक़्क़ी में जश्न सबसे पहले मनाए,
    और तेरी नाकामी में हाथ सबसे पहले बढ़ाए,
    दोस्त उसको कहते हैं…
    – Jaya Pandey

  • यादों के खजाने

    कुछ यादों के खजाने….
    कुछ मस्ती के मोती…
    कुछ चुलबुले से पल..
    वो हँसी ठठा हर पल…
    कभी शिकवों के मोती…
    जो आंखों से बहते……
    वो बाहों  में भरकर … ….
    वो मोती उठाना
    गले से लगाकर….
    यूँ अपना बनाना……
    फिर हंसी की चमक से….
    फिज़ां को महकाना…….
    यही तो है….
    अनुपम- सी दौलत….
    हमारी- तुम्हारी
    यही दोस्ती है हमेँ जान से भी प्यारी …..
    – मीनाक्षी मोहन ‘मीता’

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