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Hindi prem kavita romantic poems – हिंदी प्रेम कविता romantic poems in hindi

Hindi prem kavita romantic poems – हिंदी प्रेम कविता – Hindi prem kavita romantic poems – हिंदी प्रेम कविता – Hindi prem kavita romantic poems – हिंदी प्रेम कविता romantic poems in hindiHindi prem kavita romantic poems - हिंदी प्रेम कविता romantic poems in hindi

 

  • Hindi prem kavita romantic poems – 1

 

  • मेरा प्यार

  • अगर जो दिल की सुनोगे तो हार जाओगी
    हम जैसा प्यार फिर  कहाँ से  पाओगी
    जान देने की बात तो हर कोई  करता है
    जिन्दगी  बनाने  वाला कहाँ  से लाओगी
    जो इक नजर देखोगे  हमें …
    हर तरफ  हम को  ही  पाओगी. ..
    यकीन अपनी  चाहत का है  मझे..
    मेरी ऑखो में झांकोगी तो लौट  आओगी. .
    मरी यादो के  समंदर में जो  डूब  गऐ तुम
    कहीं जाना भी चाहोगी,  तो जा नहीं पाओगी तुम
    – सौरभ राजपूत  (sd)
  • Hindi prem kavita romantic poems – 2
    “”अभी-अभी अचानक”

    अभी-अभी अचानक मेरे दिल में तुम्हारा एहसास सा हो आया है,
    मैंने तुम्हें अभी अपनी साँसों में पाया है।
    ये मेरे सिले होठों की तुम मुस्कान लगी,
    रुक-रुक कर चलते धड़कन की तुम जान लगी।
    मंजुल सा हर वो लम्हा हो गया,
    मैंने जब-जब तेरा नाम लिया,
    तुमको सोचता हूँ और मैं आह्लादित हो जाता हूँ,
    देखो तुमने कैसा काम किया।
    कहीं तुमसे मुझे रति तो नहीं??,
    जो भी हो पर बिन तेरी यादों के मेरी कोई रात कटी तो नहीं।
    मेरे मन के खेमे में तेरी ही यादों का बसेरा है,
    साथ तुम हो तो ही जीवन में सवेरा है।
    मैं भी हैरान हूँ कि कैसे तुमने मुझ पर आधिपत्य जमाया है,
    किसी और पे नजर जाती नहीं मेरी,
    मेरी आँखों पर तुमने ये कैसा पहरा लगाया है??
    अभी-अभी अचानक मेरे दिल में तुम्हारा एहसास सा हो आया है।
    – हिमांशु शर्मा ‘हेमु’

 

  • हिंदी प्रेम कविता – Hindi prem kavita romantic poems – 3
  • वो मेरा नहीं- (दिल का हाल)

    मैं आज भी वेसी हीं हूँ, जैसी उसकी पसंद है,
    लेकिन अब वो वैसा नहीं, जैसा मुझे पसंद है !
    वो मेरा पहला प्यार है,
    लेकिन मैं उसका पहला प्यार नहीं
    मैं खुश होती हूँ उसकी हंसी देखकर,
    वो खुश होता है, किसी और की हंसी देखकर !
    मैं तो आज भी उसकी हूँ, ये वो नहीं जानता,
    वो किसी और का है, ये सब जानते हैं !
    – जयति जैन, रानीपुर, झांसी उ.प्र.

 

  • चलो आज हम दोनो … – Hindi prem kavita romantic poems – 4

    चलो आज हम दोनो शिकायत करते हैं
    कुछ तुम कहो हमसे कुछ हम तुमसे कहते हैं
    बड़े दिनों बाद आज मिले हैं हम दोनो
    कुछ देर ही सही और नाराज रहते हैं
    बड़ी बेबस है इंसां सबकुछ बेइंतहा चाहता है
    हम भी उम्मीदो का दायरा थोड़ा बढ़ा लेते हैं
    संग रहते थे पहले, संग रहेंगे बाद में भी
    फिलहाल कुछ दिन की और जुदाई सहते हैं
    आज दोस्ती नही दुश्मनी की दुआ करते हैं
    तुम दीया सा जलो हम हवा सा बहते हैं
    या अपने ही अंदाज में हम इश्क करते हैं
    तुम शमा सा जलो हम परवाना बनते हैं
    नज़र से बात करते थे नज़र से बात करते हैं
    कमबख्त दिल है पागल, न उसकी बात सुनते हैं
    बगावत खुद से कर दुनिया की तरफदारी करते हैं
    आज इस जहां में नया अफसाना बुनते हैं
    खुदा ने बख्शा है तुझे लाखों अदा दिलवर
    तो क्या? आज हम भी थोड़ा इतराकर चलते हैं
    पाबंदी है आंसूओ पर हमारे दिल के जहां मे
    आज तेरे संग हम ‘बिट्टू’ खुलकर हंसते हैं
    प्रभात कुमार (बिट्टू)
    बख्तियारपुर, पटना

 

  • हिंदी प्रेम कविता – Hindi prem kavita romantic poems – 5
  • अब तुम्हारा प्यार भी – Ab Tumhara Pyaar Bhi Mujhko Nahi Sveekar Preyasi

    अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
    चाहता था जब हृदय बनना तुम्हारा ही पुजारी,
    छीनकर सर्वस्व मेरा तब कहा तुमने भिखारी,
    आँसुओं से रात दिन मैंने चरण धोये तुम्हारे,
    पर न भीगी एक क्षण भी चिर निठुर चितवन तुम्हारी,
    जब तरस कर आज पूजा-भावना ही मर चुकी है,
    तुम चलीं मुझको दिखाने भावमय संसार प्रेयसि !
    अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि !
    भावना ही जब नहीं तो व्यर्थ पूजन और अर्चन,
    व्यर्थ है फिर देवता भी, व्यर्थ फिर मन का समर्पण,
    सत्य तो यह है कि जग में पूज्य केवल भावना ही,
    देवता तो भावना की तृप्ति का बस एक साधन,
    तृप्ति का वरदान दोनों के परे जो-वह समय है,
    जब समय ही वह न तो फिर व्यर्थ सब आधार प्रेयसि !
    अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि !
    अब मचलते हैं न नयनों में कभी रंगीन सपने,
    हैं गये भर से थे जो हृदय में घाव तुमने,
    कल्पना में अब परी बनकर उतर पाती नहीं तुम,
    पास जो थे हैं स्वयं तुमने मिटाये चिह्न अपने,
    दग्ध मन में जब तुम्हारी याद ही बाक़ी न कोई,
    फिर कहाँ से मैं करूँ आरम्भ यह व्यापार प्रेयसि !
    अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि !
    अश्रु-सी है आज तिरती याद उस दिन की नजर में,
    थी पड़ी जब नाव अपनी काल तूफ़ानी भँवर में,
    कूल पर तब हो खड़ीं तुम व्यंग मुझ पर कर रही थीं,
    पा सका था पार मैं खुद डूबकर सागर-लहर में,
    हर लहर ही आज जब लगने लगी है पार मुझको,
    तुम चलीं देने मुझे तब एक जड़ पतवार प्रेयसि !
    अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि !
    – गोपाल दास नीरज.

 

  • पर आँखें नहीं भरीं – Hindi prem kavita romantic poems – 6

    कितनी बार तुम्हें देखा
    पर आँखें नहीं भरीं।
    सीमित उर में चिर-असीम
    सौंदर्य समा न सका
    बीन-मुग्ध बेसुध-कुरंग
    मन रोके नहीं रुका
    यों तो कई बार पी-पीकर
    जी भर गया छका
    एक बूँद थी, किंतु,
    कि जिसकी तृष्णा नहीं मरी।
    कितनी बार तुम्हें देखा
    पर आँखें नहीं भरीं।
    शब्द, रूप, रस, गंध तुम्हारी
    कण-कण में बिखरी
    मिलन साँझ की लाज सुनहरी
    ऊषा बन निखरी,
    हाय, गूँथने के ही क्रम में
    कलिका खिली, झरी
    भर-भर हारी, किंतु रह गई
    रीती ही गगरी।
    कितनी बार तुम्हें देखा
    पर आँखें नहीं भरीं। – शिव मंगल सिंह सुमन

 

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