इन्हें भी जरुर पढ़ें ➜
Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages

Hindi Story Haar Ki Jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत – Kahani Haar Ki Jeet Ka Saransh

hindi story haar ki jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत – kahani haar ki jeet ka saransh – hindi story haar ki jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत – kahani haar ki jeet ka saransh – hindi story haar ki jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत – kahani haar ki jeet ka saransh – hindi story haar ki jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत – kahani haar ki jeet ka saransh – hindi story haar ki jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत – kahani haar ki jeet ka saransh – moral of the story haar ki jeet in hindi – haar ki jeet short story in hindi – kahani haar ki jeet ka saransh – haar ki jeet uddeshya – haar ki jeet question answer – haar ki jeet pdf – haar ki jeet ka uddeshyaHindi Story Haar Ki Jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत - Kahani Haar Ki Jeet Ka Saransh

Hindi Story Haar Ki Jeet – हिंदी स्टोरी हार की जीत – Kahani Haar Ki Jeet Ka Saransh

 

  • Haar Ki jeet ऐसी Hindi sory है, जिसे बचपन में ढेरों लोगों ने पढ़ा होगा. तो आइये बचपन की याद ताजा करते हैं और hindi story haar ki jeet पढ़ते हैं. और इस कहानी के अंत में haar ki jeet ka saransh भी पढ़ते हैं.

 

rel="stylesheet">
  • माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था. भगवद्-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता. वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान. उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था. बाबा भारती उसे ‘सुल्तान’ कह कर पुकारते, अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और देख-देखकर प्रसन्न होते थे. उन्होंने रूपया, माल, असबाब, ज़मीन आदि अपना सब-कुछ छोड़ दिया था, यहाँ तक कि उन्हें नगर के जीवन से भी घृणा थी. अब गाँव से बाहर एक छोटे-से मन्दिर में रहते और भगवान का भजन करते थे. “मैं सुलतान के बिना नहीं रह सकूँगा”, उन्हें ऐसी भ्रान्ति सी हो गई थी. वे उसकी चाल पर लट्टू थे. कहते, “ऐसे चलता है जैसे मोर घटा को देखकर नाच रहा हो.” जब तक संध्या समय सुलतान पर चढ़कर आठ-दस मील का चक्कर न लगा लेते, उन्हें चैन न आता.
  • खड़गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था. लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे. होते-होते सुल्तान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची. उसका हृदय उसे देखने के लिए अधीर हो उठा. वह एक दिन दोपहर के समय बाबा भारती के पास पहुँचा और नमस्कार करके बैठ गया. बाबा भारती ने पूछा, “खडगसिंह, क्या हाल है?”
    खडगसिंह ने सिर झुकाकर उत्तर दिया, “आपकी दया है.”
    “कहो, इधर कैसे आ गए?”
    “सुलतान की चाह खींच लाई.”
    “विचित्र जानवर है. देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे.”
    “मैंने भी बड़ी प्रशंसा सुनी है.”
    “उसकी चाल तुम्हारा मन मोह लेगी!”
    “कहते हैं देखने में भी बहुत सुँदर है.”
    “क्या कहना! जो उसे एक बार देख लेता है, उसके हृदय पर उसकी छवि अंकित हो जाती है.”
    “बहुत दिनों से अभिलाषा थी, आज उपस्थित हो सका हूँ.”
    बाबा भारती और खड़गसिंह अस्तबल में पहुँचे. बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड़गसिंह ने देखा आश्चर्य से. उसने सैंकड़ो घोड़े देखे थे, परन्तु ऐसा बाँका घोड़ा उसकी आँखों से कभी न गुजरा था. सोचने लगा, भाग्य की बात है. ऐसा घोड़ा खड़गसिंह के पास होना चाहिए था. इस साधु को ऐसी चीज़ों से क्या लाभ? कुछ देर तक आश्चर्य से चुपचाप खड़ा रहा. इसके पश्चात् उसके हृदय में हलचल होने लगी. बालकों की-सी अधीरता से बोला, “परंतु बाबाजी, इसकी चाल न देखी तो क्या?”
  • hindi story haar ki jeet
  • दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय अधीर हो गया. घोड़े को खोलकर बाहर गए. घोड़ा वायु-वेग से उडने लगा. उसकी चाल को देखकर खड़गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया. वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर वह अपना अधिकार समझता था. उसके पास बाहुबल था और आदमी भी. जाते-जाते उसने कहा, “बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा.”
  • बाबा भारती डर गए. अब उन्हें रात को नींद न आती. सारी रात अस्तबल की रखवाली में कटने लगी. प्रति क्षण खड़गसिंह का भय लगा रहता, परंतु कई मास बीत गए और वह न आया. यहाँ तक कि बाबा भारती कुछ असावधान हो गए और इस भय को स्वप्न के भय की नाईं मिथ्या समझने लगे. संध्या का समय था. बाबा भारती सुल्तान की पीठ पर सवार होकर घूमने जा रहे थे. इस समय उनकी आँखों में चमक थी, मुख पर प्रसन्नता. कभी घोड़े के शरीर को देखते, कभी उसके रंग को और मन में फूले न समाते थे. सहसा एक ओर से आवाज़ आई, “ओ बाबा, इस कंगले की सुनते जाना.”
  • आवाज़ में करूणा थी. बाबा ने घोड़े को रोक लिया. देखा, एक अपाहिज वृक्ष की छाया में पड़ा कराह रहा है. बोले, “क्यों तुम्हें क्या कष्ट है?”
  • अपाहिज ने हाथ जोड़कर कहा, “बाबा, मैं दुखियारा हूँ. मुझ पर दया करो. रामावाला यहाँ से तीन मील है, मुझे वहाँ जाना है. घोड़े पर चढ़ा लो, परमात्मा भला करेगा.”
  • “वहाँ तुम्हारा कौन है?”
  • “दुगार्दत्त वैद्य का नाम आपने सुना होगा. मैं उनका सौतेला भाई हूँ.”
  • बाबा भारती ने घोड़े से उतरकर अपाहिज को घोड़े पर सवार किया और स्वयं उसकी लगाम पकड़कर धीरे-धीरे चलने लगे. सहसा उन्हें एक झटका-सा लगा और लगाम हाथ से छूट गई. उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा, जब उन्होंने देखा कि अपाहिज घोड़े की पीठ पर तनकर बैठा है और घोड़े को दौड़ाए लिए जा रहा है. उनके मुख से भय, विस्मय और निराशा से मिली हुई चीख निकल गई. वह अपाहिज डाकू खड़गसिंह था.बाबा भारती कुछ देर तक चुप रहे और कुछ समय पश्चात् कुछ निश्चय करके पूरे बल से चिल्लाकर बोले, “ज़रा ठहर जाओ.”

 

  • hindi story haar ki jeet
  • खड़गसिंह ने यह आवाज़ सुनकर घोड़ा रोक लिया और उसकी गरदन पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा, “बाबाजी, यह घोड़ा अब न दूँगा.”
  • “परंतु एक बात सुनते जाओ.” खड़गसिंह ठहर गया.
  • बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, “यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है. मैं तुमसे इसे वापस करने के लिए न कहूँगा. परंतु खड़गसिंह, केवल एक प्रार्थना करता हूँ. इसे अस्वीकार न करना, नहीं तो मेरा दिल टूट जाएगा.”
  • “बाबाजी, आज्ञा कीजिए. मैं आपका दास हूँ, केवल घोड़ा न दूँगा.”
  • “अब घोड़े का नाम न लो. मैं तुमसे इस विषय में कुछ न कहूँगा. मेरी प्रार्थना केवल यह है कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना.”
  • खड़गसिंह का मुँह आश्चर्य से खुला रह गया. उसका विचार था कि उसे घोड़े को लेकर यहाँ से भागना पड़ेगा, परंतु बाबा भारती ने स्वयं उसे कहा कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना. इससे क्या प्रयोजन सिद्ध हो सकता है? खड़गसिंह ने बहुत सोचा, बहुत सिर मारा, परंतु कुछ समझ न सका. हारकर उसने अपनी आँखें बाबा भारती के मुख पर गड़ा दीं और पूछा, “बाबाजी इसमें आपको क्या डर है?”
  • सुनकर बाबा भारती ने उत्तर दिया, “लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे दीन-दुखियों पर विश्वास न करेंगे.” यह कहते-कहते उन्होंने सुल्तान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया जैसे उनका उससे कभी कोई संबंध ही नहीं रहा हो.

 

  • hindi story haar ki jeet
  • बाबा भारती चले गए. परंतु उनके शब्द खड़गसिंह के कानों में उसी प्रकार गूँज रहे थे. सोचता था, कैसे ऊँचे विचार हैं, कैसा पवित्र भाव है! उन्हें इस घोड़े से प्रेम था, इसे देखकर उनका मुख फूल की नाईं खिल जाता था. कहते थे, “इसके बिना मैं रह न सकूँगा.” इसकी रखवाली में वे कई रात सोए नहीं. भजन-भक्ति न कर रखवाली करते रहे. परंतु आज उनके मुख पर दुख की रेखा तक दिखाई न पड़ती थी. उन्हें केवल यह ख्याल था कि कहीं लोग दीन-दुखियों पर विश्वास करना न छोड़ दे. ऐसा मनुष्य, मनुष्य नहीं देवता है.
  • रात्रि के अंधकार में खड़गसिंह बाबा भारती के मंदिर पहुँचा. चारों ओर सन्नाटा था. आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे. थोड़ी दूर पर गाँवों के कुत्ते भौंक रहे थे. मंदिर के अंदर कोई शब्द सुनाई न देता था. खड़गसिंह सुल्तान की बाग पकड़े हुए था. वह धीरे-धीरे अस्तबल के फाटक पर पहुँचा. फाटक खुला पड़ा था. किसी समय वहाँ बाबा भारती स्वयं लाठी लेकर पहरा देते थे, परंतु आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था. खड़गसिंह ने आगे बढ़कर सुलतान को उसके स्थान पर बाँध दिया और बाहर निकलकर सावधानी से फाटक बंद कर दिया. इस समय उसकी आँखों में नेकी के आँसू थे. रात्रि का तीसरा पहर बीत चुका था. चौथा पहर आरंभ होते ही बाबा भारती ने अपनी कुटिया से बाहर निकल ठंडे जल से स्नान किया. उसके पश्चात्, इस प्रकार जैसे कोई स्वप्न में चल रहा हो, उनके पाँव अस्तबल की ओर बढ़े. परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई. साथ ही घोर निराशा ने पाँव को मन-मन भर का भारी बना दिया. वे वहीं रूक गए. घोड़े ने अपने स्वामी के पाँवों की चाप को पहचान लिया और ज़ोर से हिनहिनाया. अब बाबा भारती आश्चर्य और प्रसन्नता से दौड़ते हुए अंदर घुसे और अपने प्यारे घोड़े के गले से लिपटकर इस प्रकार रोने लगे मानो कोई पिता बहुत दिन से बिछड़े हुए पुत्र से मिल रहा हो. बार-बार उसकी पीठपर हाथ फेरते, बार-बार उसके मुँह पर थपकियाँ देते. फिर वे संतोष से बोले, “अब कोई दीन-दुखियों से मुँह न मोड़ेगा.”
  • haar ki jeet kahani KE LEKHAK- सुदर्शन

 

  • kahani haar ki jeet ka saransh / uddeshya – haar ki jeet kahani का सारांश यह है कि हमें कोई भी ऐसा गलत काम नहीं करना चाहिए जिससे कि दीन-दुखियों पर लोग विश्वास करना छोड़ दें. हमें दीन-दुखी का ढोंग रचकर किसी को मूर्ख नहीं बनाना चाहिए.

 

अगर आप शायरी, कविता, कहानी आदि लिखने में सक्षम हैं. तो हमें अपनी अप्रकाशित और मौलिक रचनाएँ 25suvicharhindi@gmail.com पर भेजें.

About Abhi SuvicharHindi.Com

Hi, friends, SuvicharHindi.Com की कोशिश है कि हिंदी पाठकों को उनकी पसंद की हर जानकारी SuvicharHindi.Com में मिले. SuvicharHindi.com में आपको Hindi shayari, Hindi Ghazal, Long & Short Hindi Slogans, Hindi Posters, Hindi Quotes with images wallpapers || Hindi Thoughts || Hindi Suvichar, Hindi & English Status, Hindi MSG Messages 140 words text, Hindi wishes, Best Hindi Tips & Tricks, Hindi Dadi maa ke Gharelu Nuskhe, Hindi Biography jeevan parichay jivani, Cute Hindi Poems poetry || Awesome Kavita, Hindi essay nibandh, Hindi Geet Lyrics, Hindi 2 sad / happy / romantic / liners / boyfriend / girlfriend gf / bf for facebook ( fb ) & whatsapp, useful 1 one line rs मिलेंगे. हमारे Website में दी गई चिकित्सा सम्बन्धित जानकारियाँ / Upay / Tarike / Nuskhe केवल जानकारी के लिए है, इनका उपयोग करने से पहले निकट के किसी Doctor से सलाह जरुर लें.
Previous समय के नियोजन पर निबन्ध Samay Niyojan Essay in Hindi Mahatva Pabandi nibandh
Next दहेज प्रथा पर स्टोरी – Dahej Pratha Story in Hindi Par Short Kahani Script natak ekanki

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!