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Kalawa Bandhne Ka Mantra मौली कलावा बांधने का मन्त्र mouli bandhan raksha sutra :

kalawa bandhne ka mantra mouli bandhan mantra – कलावा बांधने का मन्त्रKalawa Bandhne Ka Mantra मौली कलावा बांधने का मन्त्र mouli bandhan raksha sutra

Kalawa Bandhne Ka Mantra मौली कलावा बांधने का मन्त्र mouli bandhan raksha sutra

  • कलावा या मौली बांधना सनातन वैदिक परंपरा का हिस्सा है. पूजा, यज्ञ या कोई अन्य शुभ कार्य करते समय कलाई में कलावा बांधा जाता है. कलावा को मौली भी कहते हैं. मौली को हर हिन्दू बांधता है. इसे मूलत: रक्षा सूत्र कहते हैं. ‘मौली’ का शाब्दिक अर्थ है ‘सबसे ऊपर’. मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं. इसका वैदिक नाम उप मणिबंध भी है. मौली कच्चे धागे से बनाई जाती है.
  • Kalawa Bandhne Ka Mantra मौली कलावा बांधने का मन्त्र mouli bandhan raksha sutra

  • मौली / कलावा / रक्षा सूत्र बांधने का मंत्र :

    ‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:
    तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल..’

  • मौली को हाथ की कलाई में बांधा जाता है. मन्नत के लिए किसी देव स्थान पर भी बांधा जाता है. इसे घर में लाई गई नई वस्तु को भी बांधा जाता है.
  • मौली बांधने के नियम :
  • शास्त्रों के अनुसार पुरुषों को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए. स्त्रियों को बाएँ हाथ में कलावा बांधना चाहिए.
  • कलावा बंधवाते समय जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों, उसकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए.
  • मौली बांधते समय मन्त्र जरुर बोलना चाहिए.
  • पर्व-त्योहार में भी आप रक्षा सूत्र बांध सकते हैं और जिस किसी भी दिन कोई शुभ कार्य करें उस दिन भी कलावा बांध सकते हैं. रक्षा सूत्र किसी भी दिन बंधवाया जा सकता है. इसके लिए किसी खास दिन की जरूरत नहीं है.
  • उतारी हुई पुरानी मौली को पीपल के वृक्ष के पास रख दें या किसी बहते हुए जल में बहा दें.
  • मौली धार्मिक आस्था का प्रतीक है.

  • किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करते समय या नई वस्तु खरीदने पर हम उसे मौली बांधते हैं ताकि वह हमारे जीवन में मंगल लाये.
  • हिन्दू धर्म में प्रत्येक धार्मिक कर्म के पूर्व पुरोहितों द्वारा यजमान के हाथ में मौली बांधी जाती है.
  • मौली को कलाई में बांधने पर कलावा या उप मणिबंध कहते हैं. हाथ के मूल में 3 रेखाएं होती हैं जिनको मणिबंध कहते हैं. इन तीनों रेखाओं में दैहिक, दैविक व भौतिक जैसे त्रिविध तापों को देने व मुक्त करने की शक्ति रहती है.
  • जब हम कलावा का मंत्र रक्षा हेतु पढ़कर कलाई में बांधते हैं तो यह तीन धागों का सूत्र त्रिदेवों व त्रिदेवियों को समर्पित हो जाता है. जिससे रक्षा-सूत्र धारण करने वाले प्राणी की हमेशा रक्षा होती है. इस रक्षा-सूत्र को संकल्पपूर्वक बांधने से व्यक्ति पर मारण, मोहन, विद्वेषण, उच्चाटन, भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता.
  • मौली बांधने से त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है. ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु की कृपा से रक्षा तथा शिव की कृपा से दुर्गुणों का नाश होता है. इसी प्रकार लक्ष्मी से धन, दुर्गा से शक्ति एवं सरस्वती की कृपा से बुद्धि प्राप्त होती है.
  • कलावा मंदिरों में मन्नत के लिए भी बांधी जाती है. जिसे संकल्प करके बांधा जाता है. मन्नत पूरी होने पर मौली बांधकर किए गए संकल्प को पूरा नहीं करना संकट में डाल सकता है.
  • कमर पर बांधी गई मौली से सूक्ष्म शरीर स्थिर रहता है और कोई दूसरी बुरी आत्मा आपके शरीर में प्रवेश नहीं कर सकती है. बच्चों को अक्सर कमर में मौली बांधी जाती है. यह काला धागा भी हो सकता है
  • प्राचीनकाल से ही कलाई, पैर, कमर और गले में भी मौली बांधे जाने की परंपरा के ‍चिकित्सीय लाभ भी हैं. शरीर विज्ञान के अनुसार इससे त्रिदोष अर्थात वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है. पुराने वैद्य और घर-परिवार के बुजुर्ग लोग हाथ, कमर, गले व पैर के अंगूठे में मौली का उपयोग करते थे, जो शरीर के लिए लाभकारी था.

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