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लव हिंदी कविता संग्रह || Love Hindi Kavita Sangrah Pyar poerties collections

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लव हिंदी कविता संग्रह || Love Hindi Kavita Sangrah Pyar poerties collections

  • लव हिंदी कविता संग्रह || Love Hindi Kavita Sangrah Pyar poerties collections

 

  • प्रेम की भीख

    वह भी एक समय था जब तुम देख प्रेम से मिलते थे
    और देखकर हमको सम्मुख मन ही मन अति खिलते थे
    यह भी एक समय ही है जब देख दूर तुम भगते हो
    और अपरिचित सा अपने को आज प्रदर्शित करते हो।
    खैर नहीं है बात मुझे कुछ देह तुम्हारी कहीं रहे,
    पूर्व सदृश ही पर उर में बस प्रेम तुम्हारे बना रहे।।
    इसको तो तुम भिक्षा समझो मेरी या निज दया कहो
    मन से छोड़ दिया यदि तुमने तो क्या होगा तुम्ही कहो।।2।।
    भीख प्रेम की मांग रहा बस और नहीं कुछ लेना है।
    इतनी ही बस भिक्षा मुझको कृपा पुरस्सर दे दो तुम
    और भूल सब मेरी त्रुटियाँ मान अबुध अब जाओ तुम।।3।।
    त्रुटियाँ तो इस जीवन में स्वाभाविक ही हो जाती हैं।
    किंतु कभी छोटी सी त्रुटि भी दुख हेतु बन जाती है।।
    क्या रोऊँ मेरी रोदन की कीमत कौन चुकाएगा,
    मत रोओ कुछ बात नहीं कह कौन मुझे समझाएगा।।4।।
    बड़ी कृपा की ह्रदय निकेतन में मुझको भी वास दिया।
    मुझे कलुषित ने किंतु वहां भी अपना कलुष प्रसार किया।
    अब किस मुंह से कहूं कि मुझको निज मन से मत दूर करो।
    मुझको तो आते दूर हटा निज ह्रदय बार कुछ न्यून करो।।5।।
    मैं जी लूंगा किसी तरह मन को अतीत में ले जाकर।
    पर तुमको ना कहूंगा मेरा जीवन विकसाओ आकर।
    मेरा जीवन उपवन तो बस स्मृति जल से सिंचित होगा,
    इसको विकसित करने का शुभ श्रेय भला किसको होगा।।6।।
    –    विष्णु दत्त पाण्डेय

  • ‘आज भी हम’

    माना कि वक़्त बहुत गुज़र चुका है
    माना कि माहौल बहुत बदल चुका है
    मगर दुआओं में एक शख्स का नाम
    लिए फिरते हैं आज भी हम ।
    ना सितम तेरे भूले हैं
    ना बिन तेरे अधूरे हैं
    आज भी वो रात ख्यालों में निकल जाती है
    जिस रात को तेरी याद छू जाती है
    जो तेरे दीदार से मुक़म्मल हो,
    आंखों में वो नूर लिए फिरते हैं आज भी हम ।
    अब ख्वाहिश नहीं फिर
    तुमसे इश्क़ आजमाने की,
    ना हौसला रहा अब,
    फिर टूटकर बिखर जाने की,
    तेरी बातों में जो मुसलसल हो,
    लबों पे वो मुस्कान लिए फिरते हैं आज भी हम ।
    मोहब्बत कल बेइंतेहा थी,
    आज तन्हाई की सोहबत है
    कल फना होने की हसरत थी,
    आज उसके ज़िक्र से भी नफरत है,
    जो अंधेरा छाया तेरे फरेब से,
    सन्नाटों का वो अंजाम लिए फिरते हैं आज भी हम ।
    – Jaya Pandey

 

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