18 महिला सशक्तिकरण स्लोगन || Mahila Sashaktikaran Slogan in Hindi women :

Mahila Sashaktikaran Slogan in Hindi – महिला सशक्तिकरण स्लोगन
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महिला सशक्तिकरण स्लोगन || Mahila Sashaktikaran Slogan in Hindi

  • महिला सशक्तिकरण की सोच तभी सफल हो सकती है, जब प्रत्येक महिला खुद को सशक्त बनाने की दिशा में घर से ही शुरुआत करे.
  • सामाजिक कुप्रथाओं को खत्म किए बिना महिला सशक्तिकरण की बात करना केवल मज़ाक है.
  • महिलाओं से जुड़ी कुछ कुप्रथाओं को खत्म करने की शुरुआत महिलाएं ही कर सकती है. और तभी पूरे
    समाज की महिलाएं सशक्त हो पाएंगी.
  • अच्छे स्लोगन्स से महिलाओं की स्थिति नहीं बदलेगी, महिलाओं की स्थिति बदलने के लिए कुछ अच्छे कदम उठाने पड़ेंगे.
  • विवाह से जुड़ी कुप्रथाओं को खत्म किए बिना महिला सशक्तिकरण की कल्पना करना बेवकूफी है.
  • महिलाओं को खुद महिला सशक्तिकरण के लिए आगे बढ़कर अपना नेतृत्व करना पड़ेगा.
  • महिलाओं के उत्थान के बिना मानव समाज का उत्थान नहीं हो सकता है.
  • जब तक पुरुष, महिलाओं को सामाजिक कुप्रथाओं की जंजीरों में जकड़े रखेगा. तब तक पुरुष खुद अपने
    सर्वोत्तम शिखर को नहीं छू पाएगा.
  • महिलाएं वह सारे काम भी कर सकती है, जो काम पुरुष कभी नहीं कर सकता है.
  • दुनिया को बदलने का सबसे आसान तरीका है कि महिलाओं को बदल दिया जाए.

  • जिस समाज में महिलाओं को दबाया और कुचला जाता है. वह समाज हमेशा बेकार की समस्याओं में उलझा रहता है.
  • हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है और हर एक नाकामयाब आदमी के पीछे भी
    किसी ना किसी औरत का ही हाथ होता है. लेकिन हर कामयाब औरत के पीछे पुरुष का हाथ हो यह जरुरी
    नहीं है हर नाकामयाब औरत के पीछे उसका हाथ हो यह भी जरुरी नहीं है.
  • अगर कोई कहता है कि उसका धर्म महिलाओं पर बेकार की पाबंदी लगाने को कहता है.
    तो समझ लीजिए वह धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा कर रहा है.
  • औरत कभी कमजोर नहीं हो सकती है, अगर किसी महिला को यह लगे कि वह कमजोर है,
    तो यह उसके मन का एक भ्रम है.
  • जब तक जरुरी सामाजिक बदलाव नहीं होंगे, तब तक कोई भी सरकारी योजना महिला सशक्तिकरण
    को सफल नहीं कर सकती है.
  • हम सभी को इस बात का अवलोकन करना होगा कि हम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में
    कौन-कौन से कदम उठा सकते हैं.
  • 1 हीं दिन में महिला सशक्तिकरण का सपना साकार हो सकता है, लेकिन शर्त यह है कि रातो रात
    सामाजिक परंपराओं, कुप्रथाओं और सोच में बदलाव लाया जाए.
  • मानव समाज की आधी से अधिक समस्याओं की जड़ महिलाओं से जुड़ी नकारात्मक सोच है.

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