मीराबाई के पद दोहे अर्थ सहित || Meerabai Ke Pad in Hindi With Meaning dohe :

Meerabai Ke Pad in Hindi With Meaning – मीराबाई के पद दोहे अर्थ सहित
मीराबाई के पद दोहे अर्थ सहित || Meerabai Ke Pad in Hindi With Meaning dohe :

मीरा के पद – Meerabai Ke Pad in Hindi With Meaning

  • पायो जी मैंने नाम रतन धन पायो।
    वस्तु अमोलक दई म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥
    जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
    खरच न खूटै चोर न लूटै, दिन-दिन बढ़त सवायो।।
    सत की नाँव खेवटिया सतगुरू, भवसागर तर आयो।
    ‘मीरा’ के प्रभु गिरिधर नागर, हरख-हरख जस गायो॥
    :::——-  प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा कह रही हैं कि उन्होंने कृष्ण के नाम का रत्न धन पा लिया है। उनके सतगुरु ने उन्हें अपना कर उनपर कृपा की तथा इस नाम रूपी अमूल्य धन को सौंपा। मीरा ने इस संसार में सब कुछ खो कर इस जन्म जन्म की पूंजी को पाया। ये नाम रूपी धन ऐसा है जो न खर्च करने से कम होता है और न इसे कोई चोर लूट पाता है, इसमे तो दिनों दिन सवा गुणा बढ़त होती रहती है। मीरा ने सत्य की नाव जिसके खेवनहार सतगुरु हैं पर बैठ कर भवसागर पार कर लिया है। मीरा कहती हैं कि मेरे प्रभु गिरिधर श्रीकृष्ण हैं, ओर में उन्ही का यश गाती हूँ।
  • Meerabai Ke Pad in Hindi With Meaning

  • पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे।
    मैं तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे।
    लोग कहै मीरा भई बावरी न्यात कहै कुलनासी रे॥
    विष का प्याला राणा भेज्या पीवत मीरा हाँसी रे।
    ‘मीरा’ के प्रभु गिरिधर नागर सहज मिले अविनासी रे।।
    :::—–   मीरा स्वयं के लिए कहती हैं कि उन्होंने पैरों में घुंघरू बांध लिये हैं और वो कृष्ण भक्ति में तल्लीन हो कर नाच रही हैं। वो स्वयं ही अपने नारायण श्रीकृष्ण की दासी हो गयी हैं, उन्होंने स्वयं को उन्हें समर्पित कर दिया है। लोग कहते हैं कि मीरा बावली हो गई है। उनके अपने नाते रिश्तेदार उन्हें कुलनशिनी तथा कुल कलंकिनी कहते हैं और उनसे नफरत करते हैं। मीरा को प्रताड़ित करने के लिए स्वयं उनके श्वसुर राणा सांगा ने विष का प्याला भेजा था, जिसे मीरा ने हंसते हंसते पी लिया। मीरा कहती हैं उनके प्रभु गिरिधर श्रीकृष्ण अविनाशी हैं अर्थात कोई उनका विनाश नहीं कर सकता और सहज प्राप्य हैं।
  • हे री मैं तो दरद-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।
    घायल की गति घायल जाणै, हिबड़ो अगण संजोय।
    जौहर की गति जौहरी जाणै, क्या जाणे जिण खोय।
    सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस बिध होय।
    गगन मंडल पर सेज पिया की किस बिध मिलणा होय।
    दरद की मारी बन-बन डोलूँ बैद मिल्या नहिं कोय।
    मीरा की प्रभु पीर मिटेगी, जद बैद सांवरिया होय।
    :::—– प्रस्तुत पद में मीरा कहती हैं में तो इसी प्रेम की पीड़ा की दीवानी हूँ, मेरी ये पीड़ा कोई नहीं समझ सकता। जिस प्रकार घायल की दशा का भान सिर्फ एक घायल ही कर सकता है की किस प्रकार उसके हृदय में एक आग जल रही है। हीरे की कीमत सिर्फ एक जौहरी जान सकता है वह क्या जान पाएगा जिसने उस हीरे को खो दिया। वैसे ही ईश भक्ति की कीमत भक्त ही जान सकता है। वे कहती हैं कि मेरे लिए कहीं आराम नहीं, मेरी सेज भी सूली के ऊपर ही है, अर्थात के कष्टों से घिरी हुई है। मेरे पिया की सेज उस लोक में आसमान के पार है,न जाने कैसे, कौन सी विधि से मैं उनसे मिल पाऊँगी।वो तो दर्द में बावली हो कर डर डर भटक रही हैं कि उन्हें कहीं आराम मिल जाए पर उन्हें इस पीड़ा का कोई वैद्य नहीं मिलता। मीरा कहती हैं कि उनकी यह पीड़ा तभी मिलटेगी जब स्वयं उनके प्रियतम श्रीकृष्ण उनके सामने वैद्य बन कर आएंगे।
  • Meerabai Ke Pad in Hindi With Meaning

  • दरस बिनु दूखण लागे नैन।
    जबसे तुम बिछुड़े प्रभु मोरे, कबहुं न पायो चैन॥
    सबद सुणत मेरी छतियां कांपे, मीठे लागे बैन।
    बिरह कथा कांसूं कहूं सजनी, बह गई करवत ऐन॥
    कल न परत पल हरि मग जोवत, भई छमासी रैन।
    मीरा के प्रभू कब रे मिलोगे, दुखमेटण सुखदैन॥
    :::—- मीरा कहती हैं कि बिना कवि के दर्शन के उनके नैनों में दर्द होने लगा है। जब से प्रभु उनसे बिछड़े हैं, अर्थात जब से वह संसार में आई हैं, उन्हें कभी चैन नहीं मिल पाया है। सबद सुनते सुनते उनकी छाती विरह के दुख में कांपने लगती हैं, यद्यपि उन्हें सबद के बोल बफे मीठे लगते हैं, क्योंकि वे उन्हें प्रभु की याद दिलाते हैं। वो अपनी सखी को सम्बोधित कर के कहती हैं कि मैं अपनी विरह की पीड़ा की कहानी किससे कहूँ, ऐसा लगता है मानो आरी चल रही हो। हरि की राह निहारते निहारते मेरा पल नहीं बीतता, रातें मानो 6 महीने जितनी लम्बी हो जाती हैं।अपने प्रभु को संबोधित कर मीरा पूछती हैं कि हे मेरे प्रभु तुम मेरे दुख मिटाने तथा सुख प्रदान करने को कब मिलोगे।
    –  अंशु प्रिया (anshu priya)

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