मेरी प्यारी माँ निबन्ध – Meri Maa Essay in Hindi My Mother Nibandh speech pyari maa :

मेरी प्यारी माँ निबन्ध – Meri Maa Essay in Hindi मेरी प्यारी माँ निबन्ध - Meri Maa Essay in Hindi My Mother Nibandh speech pyari maa

मेरी प्यारी माँ निबन्ध – Meri Maa Essay in Hindi My Mother Nibandh speech pyari maa

  • माँ, कहने को तो बड़ा छोटा शब्द है, पर यह कहना गलत नही होगा कि इस छोटे शब्द में शायद पूरी सृष्टि का उद्भव सूत्र समाहित है। माँ, किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, एक भावना का द्योतक है, ममत्व से परिपूर्ण भावना। एक ऐसी भावना जिसमें सिर्फ प्रेम है, निःस्वार्थ, निश्छल प्रेम। सिर्फ देने का भाव है, लेना कुछ भी नही। माँ ऐसी ही तो होती है। कहते हैं ईश्वर हर वक़्त हमारा ध्यान नही रख सकता, इसलिए उसने माँ बनाई। माँ, माता, मम्मी, अम्मा, अम्मी, माई, आई, न जाने कितने संबोधन हैं सिर्फ इस एक भावना को परिभाषित करने को।
  • जन्म लेते के साथ जो पहला स्पर्श प्राप्त होता है, वो माँ है। माँ उस एक स्पर्श में अपनी सारी पीड़ा, सारा प्रेम, सबकुछ उड़ेल देती है। और तब से त्याग के सिलसिले की शुरुआत होती है जो उसकी ज़िन्दगी की अंतिम साँस तक चलती रहती है। वह हमें अपने अंदर 9 महीने अपना खून पिला कर पालती है, अपने अंदर हमारा भार ले कर घूमती है, और फिर जन्म देने के बाद अपने अस्तित्व को सार्थक मानती है, जैसे जन्म ले कर हमने कोई उपकार कर दिया हो उसपर। जन्म देने के बाद भी वह हमें दूध के रूप में अपना खून ही पिलाती है, बड़े होने पर प्यार से भरा भोजन खिलाती है।
  • यूँ तो स्त्री का स्वभाव कोमल होता है, किन्तु अपने बच्चे की रक्षा कर रही माँ को कभी देखा हो तो पता चले, की माँ से मजबूत कुछ नही होता। वो जितनी कोमलता से पालन करती है, उतनी ही कठोरता से रक्षा भी। चाहे वह मनुष्य हो या पशु, शेरनी हो या हिरणी, रक्षा कर रही माँ से ज़्यादा साहसी कोई नही होता।
    माँ सदैव पूज्य होती है। संस्कृत में एक सूक्ति है-
    कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।
  • Meri Pyari Maa Essay in Hindi
  • अर्थात पुत्र कुपुत्र हो सकता है किंतु माता कभी कुमाता नही होती। माँ का प्रेम इस संसार की सबसे अमूल्य वस्तु है। किंतु मनुष्य अक्सर ही यह समझ पाने में असमर्थ होता है। जिस माँ की ममता का मोल चुकाना चाहे तो वह सम्पूर्ण जीवन मे भी नही चुका सकता, उस माँ की जरूरत के समय में वह मुह मोड़ लेता है। आवश्यक है इस हानि- लाभ से भरे युग में माँ के सच्चे निस्वार्थ प्रेम का मोल समझें। जिस माँ ने हमारे रोने पे अपनी रातें हमारे सिरहाने जाग कर गुज़ार दी , उसे कभी न रोने दें। तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है।
    – अंशु प्रिया ( Anshu Priya )
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