दादी माँ पर कविता | Poem on Dadi Maa in Hindi par kavita मेरी प्यारी दादी माँ :

Poem on Dadi Maa in Hindi – दादी माँ पर कविता
Poem on Dadi Maa in Hindi || दादी माँ पर कविता par kavita - मेरी प्यारी दादी माँ

Poem on Dadi Maa in Hindi || दादी माँ पर कविता par kavita

  • मेरी प्यारी दादी माँ
  • थीं ऐसी हमारी दादी जिनकी हर बात,
    एक अमिट छाप छोड़ जाती थी।।
    हर रात बड़ी-बड़ी शिक्षा छोटी-छोटी कहानियों में बताती
    अपने हाथों से बनाए पकवान बहुत ही प्यार से खिलाती
    माँ-पापा की डाँट से हमें बचाती थी
    हमारी एक मुस्कान के बदले हर गलतियों को माफ कर जाती
    नित सुरज से पहले उठकर प्रभु सेवा में लग जाती
    और प्रभु वन्दन में ही अपना सुख पाती
    थीं ऐसी हमारी दादी जिनकी हर बात,
    एक अमिट छाप छोड़ जाती थी।।
    कभी वो सरल, कभी सख्ती से पेश आती
    गलती करे जो कोई, तो सही राह दिखाती
    बड़े प्यार से हमें अपनी गोद में सुलाती
    हर समस्या का उनके पास होता था समाधान
    मुसीबत कैसी भी हो वो परिवार की ढाल बन जाती
    दुनियादारी की बातें सिखलाती और सभी प्रपंचों से हमें बचाती
    थीं ऐसी हमारी दादी जिनकी हर बात,
    एक अमिट छाप छोड़ जाती थी।।
    उम्र के दायरे से परे अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाती
    उनके हरेक फैसले में परिवार की भलाई नजर आती
    कभी भी भेदभाव से वो किसी से पेश नहीं आती
    सबकी फिक्र करती, सबसे प्यार से मिलती
    कितनी भी हो जाती थी उन्हें थकान,
    फीकी नहीं पड़ी कभी उनकी मुस्कान
    थीं ऐसी हमारी दादी जिनकी हर बात,
    एक अमिट छाप छोड़ जाती थी।।
    नुस्खा उनका लगता जादुई, हर बिमारी का रामबाण
    कहने को तो ना ली उन्होंने, कभी कोई स्कूली शिक्षा
    पर अपने अनुभवों से, बटोरा उन्होंने खूब सारा ज्ञान
    जब भी आता प्यार उन्हें, तो आशीर्वाद की बारिश हो जाती
    उनकी पारखी नजरें सबकुछ आसानी से समझ जाती
    परिवार की मजबूत आधार, वजनदार उनकी कही हर बात
    दादी हमारी, थी जिनकी हर बात निराली
    – ज्योति सिंहदेव
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