3 Poem on Hard Work in Hindi || परिश्रम पर कविता mehnat parishram swarachit kavita :

poem on hard work in hindi परिश्रम पर कविता –   Poem on Hard Work in Hindi - परिश्रम पर कविता mehnat parishram poem

poem on hard work in hindi – 1

  • परिश्रम

  • सफलता की एकमात्र कुंजी परिश्रम है
    परिश्रमी हीं समृद्ध और सम्पन्न है
    करें परिश्रम, जब तक यह जीवन है
    अभी का काम अभी करें
    यही सफलता का लक्षण है.
    मत भूलें कि महत्वपूर्ण प्रत्येक क्षण है
    बड़े भाग्य से मिला यह मानव तन है
    कुछ कर दिखाने के लिए हुआ यह जन्म है
    मंजिल का रास्ता नसीब नहीं, परिश्रम है
    मनुष्य अपना भाग्य-निर्माता स्वयं है.
    सपना पूरा करने हेतु जरूरी संकल्प है
    कड़ा परिश्रम ही एक मात्र विकल्प है
    अगर कठोर परिश्रम का किया सृजन है
    आप में अपने लक्ष्य प्राप्ति की लगन है
    तब देखें आप पर ईश्वर भी प्रसन्न हैं
    इतना जानें, सब कुछ का जड़ यह मन है
    कोई कार्य है असम्भव, यह एक भ्रम है
    अपनी ताकत को पहचानें, आप पूरी तरह सक्षम हैं
    लड़ें जीवन में, जितना आप में दम है
    क्योंकि संघर्ष ही जीवन है.
    – संजय प्रसाद
    कार्यालय अधीक्षक
    अनुरक्षण अनुभाग
    मुयाइ कार्यालय
    पू.उ.रे. / गोरखपुर
  • लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती – poem on hard work in hindi – 2

  • लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
    कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
    नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
    चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
    मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
    चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
    आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
    कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
    डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
    जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
    मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
    बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
    मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
    कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
    असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
    क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
    जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
    संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
    कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
    कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
    – हरिवंश राय ‘बच्चन
  • कर्म

    जो कर्म यहाँ नहीं करते हैं, वे सदा कष्ट हीं सहते हैं
    जो पर उपकारी होते हैं, वे हीं जिन्दा रह पाते हैं
    यह कर्मभूमि है उनकी हीं, जो दुःख से डरते कभी नहीं
    शत्रु उनसे भय खाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं
    संसार विदित होते वे ही, जो दुःख में उफ़ भी नहीं करते हैं
    सानन्द दुःख भी सहते हैं, फिर भी कराहते कभी नहीं
    वे ही महान बन पाते हैं, सत्कर्म यहाँ जो करते हैं
    वे डींग हाँकते कभी नहीं, सबकुछ करते हैं सही-सही
    कायरों की यह भूमि नहीं, क्लिबों का यह संसार नहीं
    सत्यपात्र हीं इसे प्यारे हैं, जो सबसे न्यारे-न्यारे हैं
    जो कायर हैं डरपोक यहाँ, वो पाते हैं सम्मान कहाँ
    उनको पृथ्वी खा जाती है, फिर मिट्टी में मिल जाते हैं
    – डॉ नारायण मिश्र

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