7 प्रेरित करने वाली कविता Poem on Inspiration in Hindi – Prernadayak Kavita :

poem on inspiration in hindi – prernadayak kavita – प्रेरित करने वाली कविता
3 प्रेरित करने वाली कविता Poem on Inspiration in Hindi - Prernadayak Kavita

3 प्रेरित करने वाली कविता || Poem on Inspiration in Hindi – Prernadayak Kavita

  • शीर्षक —– हौसला

  • पानी का बुलबुला नही ,
    तू झरना बन l
    स्वीकार कर हर चुनौती ,
    तू आगे बढ l
    न देख मूँह किसी का
    खुद का यकीन बन l
    भटक मत जिन्दगी में
    नजर मंजिल पर रख l
    सपनो पर न पहरा लगा ,
    खुली आंख से देखने की जुर्रत कर l
    फिसलने न दे खुद को पाप में
    इन इच्छाओं पर अंकुश रख l
    पाई है मुश्किल से जिन्दगी
    इन्सानियत की मिशाल बन l
    होगी पूरी हर तमन्ना ,
    थोडा ढाढस रख l
    – राशि सिंह
    मुरादाबाद उत्तर प्रदेश
  • Hindi Inspirational Poem

  • ‘अभी धरती का सहारा बाक़ी है’
    किस्मत ने गिराया है तो क्या?
    अभी काबिलियत का पिटारा बाक़ी है,
    इंसानों ने छोड़ा है तो क्या?
    अभी धरती का सहारा बाक़ी है,
    मन हो गया है ‘पतझड़’ के शाख-सा,
    सहमी-सी आहटें और कँटील-सा रास्ता,
    जम गए हैं हौसले भी मौसम के साथ,
    पर अभी बसन्त का नज़ारा बाक़ी है,
    अभी धरती का सहारा बाक़ी है…
    गुम हो गयी परछाइयाँ भी रोशनी के साथ,
    जैसे जीवन हो कोई ‘अमावस’ की रात,
    सारे चिराग बुझे नहीं अभी,
    देख आसमां में एक सितारा बाक़ी है,
    अभी धरती का सहारा बाक़ी है…
    एक तूफ़ां फिर बेताब है,
    सन्नाटों का ख़ौफ़ बेहिसाब है,
    छँट जाएंगी ये बदलियाँ भी,
    बस हवाओं का इशारा बाक़ी है,
    अभी धरती का सहारा बाक़ी है…
    – Jaya Pandey जया पाण्डेय
  • Hindi Poem on Inspiration

  • सख्त हो चुके हैं चोट खा खा कर,
    अब पत्थर हो जाने दो,
    बदहाल तो पहले भी थी ज़िन्दगी,
    अब बद्तर हो जाने दो,
    आंसुओं से हर याद धुल चुकी हैं,
    रो रो के बुनियाद पिघल चुकी है,
    अश्क़ों का हिसाब मत माँगों,
    बस समंदर हो जाने दो ।
    तूफ़ां उठ रहे हैं ज़हन में कबसे,
    खामोशियों का शोर कहेंगे किससे,
    रेत के मकान को हवाएँ उड़ा ले गयीं,
    इन फ़िज़ाओं को अब बवंडर हो जाने दो।
    जया पाण्डेय – Jaya Pandey
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Inspirational Poems in Hindi About Life – प्रेरणादायक कविता
प्रेरणादायक कविता - Inspirational Poems in Hindi About Life

प्रेरणादायक कविता – Inspirational Poems in Hindi About Life

  • ऐ गीत मेरे मन के
  • ऐ गीत मेरे मन के
    तूं बन जा इक चिंगारी
    कि मैं बन जाऊं
    आज फलक की शोभा न्यारी
    आज मेरा अंतरमन
    कर मुझ से उद्घोष रहा
    पता नहीं क्या बैर है मुझसे
    जो मुझको झकझोर रहा
    कर ले इससे प्यार से बातें
    कर ले इससे यारी
    ऐ गीत मेरे मन के
    तूँ बन जा इक चिंगारी
    मैं बन जाऊँ, आज फलक की शोभा न्यारी
    बड़ा हिमालय सा समाज
    प्रतियोगी बन खड़ा है काल
    इसमें प्रतिद्वन्दी बन
    मैं भी कर लूँ हिस्सेदारी
    ऐ गीत मेरे मन के
    तूँ बन जा इक चिंगारी
    मैं बन जाऊँ
    आज फलक की शोभा न्यारी
    – रचना मिश्रा
  • आज की सुबह
    आज की सुबह अनकही अनजानी सी कहानी कह गयी!
    ये जुबां न जाने कैसी कहानी कह गयी!
    आज की सुबह ने महसूस कराया के मैं क्या हूँ !!
    मेरे वजूद से मुझे मिलाकर,
    न जाने खुद कहाँ खो गयी !!
    मैं हूँ तो छोटी पर मुझे कुछ बड़ा करना है !
    अपने माता पिताजी के सपनों को साकार करना है !!
    ज़िन्दगी जीना आज से पहले लगता था जो मुश्किल,
    आज माँ पिताजी के आशिर्वाद से आसान सा लगता है!
    सांसारिक मोह माया में खो गया था मेरा वजूद कहीं!
    आज मुझे वो मेरे ही पास और मेरा सा लगता है !!
    ये ज़िन्दगी बड़ी खुशनसीबी से मिली है मुझे ,
    इसे आज उसी ख़ुशी के साथ जीने का दिल करता है!
    अपनी ज़िन्दगी को तो खुशियाल बना लूँ पर,
    पर आज अपने साथ साथ …
    दूसरों को भी खुश करने का दिल कर रहा है !!
    आज बड़ी ही चंचलता है मेरे मन में ,
    कुछ पागलपन सा करने का मन कर रहा है !!
    झूमने, गाने, और पंछी बन,
    खुले आसमान में उड़ जाने को मन कर रहा है !
    भले ही कितने भी मुश्किल पड़ाव आएं इस ज़िन्दगी में ,
    पर आज उन्हें गम का नाम ना देकर,
    खुशियों से सुलझाने का मन कर रहा है !!
    – आँचल वर्मा
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Inspirational Poem in Hindi For Students

  • मैं अकेला चलता रहा।
    न कोई मंजिल थी,
    न कोई रास्ता था,
    खुद अपनी मंजिल,
    अपना रास्ता लिए,
    मैं अकेला बढ़ता रहा,
    मैं अकेला चलता रहा।
    चारों ओर अँधेरा था,
    न कोई सवेरा था,
    अपने शब्दों का चिराग लिए,
    मैं अकेला जलता रहा।
    दिन बीत गए,
    मैं चलता रहा,
    हर शाम नयी सुबह की तलाश में,
    मेरा सूरज ढलता रहा,
    मैं अकेला चलता रहा।
    थक चूका था…. न रो सका,
    बेचैनी में न सो सका,
    काँटों भरे उस बिस्तर पर,
    मैं करवटें बदलता रहा।
    मैं अकेला चलता रहा।
    थकना न था मुझको,
    रुकना न था मुझको,
    पसीने में माटी मिला,
    अपने माथे मलता रहा।
    मैं अकेला चलता रहा।
    मैं टिका रहा,
    मैं डटा रहा,
    रस्ते का हर तूफ़ान,
    मुझसे टकरा टलता रहा,
    मैं अकेला चलता रहा।
    धूप में चलने के बाद,
    आखिर आया मेरा मौसम,
    पतझड़ का वो मौसम,
    सावन में बदलता रहा।
    मैं अकेला चलता रहा…।
    – विशाल शाहदेव
  • कोई तो राह होगी…
    गुमराह हूँ,चल रहा हूँ,
    हताश हूँ, हथेलियाँ मल रहा हूँ,
    मंज़िल दिखती नहीं इन धुंधली आँखों से,
    लेकिन मेरी भी कोई मंजिल,
    और उस मंज़िल की कोई तो राह होगी।
    हताश हूँ, हथेलियाँ मल रहा हूँ,
    कुछ लकीरें हैं इन हथेलियों में भी
    सपने हैं इन नम आँखों में भी,
    मुझ फ़कीर की भी सुन ले खुदा,
    ऐसी भी कोई दरगाह होगी।
    कुछ लकीरें हैं इन हथेलियों में भी
    कुछ तो छुपा है इन खामोश पहेलियों में भी,
    ज़ज़्बा तो है इन जलते जज्बातों में भी,
    समेट सके मुझे खुद में, ऐसी भी कोई बाँह होगी।
    कुछ तो छुपा है इन खामोश पहेलियों में भी,
    रास्ता तो है इन भुलभुलैयों में भी,
    धुंधली पड़ चुकी है तकदीर मेरी,
    खुद अपनी किस्मत लिख दूं, ऐसी भी कोई स्याही होगी।
    मेरी भी कोई मंज़िल, और उस मंज़िल की,
    कोई तो राह होगी, कोई तो राह होगी…
    – विशाल शाहदेव
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