पत्नी पर हिन्दी कविता – Poem For Wife in Hindi – Patni Par Kavita :

पत्नी पर हिन्दी कविता – Poem For Wife in Hindi
पत्नी पर हिन्दी कविता - Poem For Wife in Hindi - Patni Par Kavita

Poem For Wife in Hindi

  • मेरी पत्नी

  • उसका इस कदर पहली बार मिलना
    हमारे इश्क का पहला पैगाम था
    उसको देखकर इस कदर दिल का धड़कना,
    उसको देखकर साँसों का तेजी से चलना
    उसकी सजरी जवानी का पैगाम था
    उसकी पैरों के पाजेब की छनक
    हाथों के खनकते कंगन
    उसके मेरे पास होने का एहसास कराते हैं..
    उसके माथे का कुमकुम वो मेरी है,
    ये भरोसा दिलाते हैं…………
    जब वो मेरी लम्बी उम्र के लिए
    भूखे पेट रहकर करवाचौथ का व्रत रखती है
    तो सच कहता हूँ यारों वो बहुत प्यारी लगती है
    ऑफिस में जाकर वो काम करती है
    और घर पर जाकर बच्चों का ख्याल रख माँ का धर्म निभाती है
    जनता हूँ जीवन के हर सुख-दुख में वो मेरी जीवनसाथी है
    खुद कितनी भी परेशान क्यों न हो
    अपनी परेशानी का एहसास तक नहीं दिलाती है
    अपनी हर ख्वाहिश को मेरे परिवार के लिए
    बलि चढा़ देती है
    यारों ये पत्नियाँ क्यों हमेशा इतनी अच्छी होती है ?
    अगर मेरे आँखो में आ जाए आँसू
    तो वो अपने आपको सजा देती है
    क्युँकि ये पत्नियाँ बहुत अच्छी होती हैं
    इन्हें कभी ना तोड़ना क्योंकि
    ये फुल की कलियाँ बडी़ खूबसूरत होती है
    क्योंकि ये भी किसी की बेटी
    किसी की बहन होती हैं
    ये पत्नियाँ बहुत अच्छी होती हैं
    – Rachna Kumari
  • पत्नी को परमेश्वर मानो

  • यदि ईश्वर में विश्वास न हो,
    उससे कुछ फल की आस न हो,
    तो अरे नास्तिको! घर बैठे,
    साकार ब्रह्‌म को पहचानो!
    पत्नी को परमेश्वर मानो!
    वे अन्नपूर्णा जग-जननी,
    माया हैं, उनको अपनाओ।
    वे शिवा, भवानी, चंडी हैं,
    तुम भक्ति करो, कुछ भय खाओ।
    सीखो पत्नी-पूजन पद्धति,
    पत्नी-अर्चन, पत्नीचर्या
    पत्नी-व्रत पालन करो और
    पत्नीवत्‌ शास्त्र पढ़े जाओ।
    अब कृष्णचंद्र के दिन बीते,
    राधा के दिन बढ़ती के हैं।
    यह सदी बीसवीं है, भाई !
    नारी के ग्रह चढ़ती के हैं।
    तुम उनका छाता, कोट, बैग,
    ले पीछे-पीछे चला करो,
    संध्या को उनकी शय्‌या पर
    नियमित मच्छरदानी तानो!
    पत्नी को परमेश्वर मानो।
    तुम उनसे पहले उठा करो,
    उठते ही चाय तयार करो।
    उनके कमरे के कभी अचानक,
    खोला नहीं किवाड़ करो।
    उनकी पसंद के कार्य करो,
    उनकी रुचियों को पहचानो,
    तुम उनके प्यारे कुत्ते को,
    बस चूमो-चाटो, प्यार करो।
    तुम उनको नाविल पढ़ने दो
    आओ कुछ घर का काम करो।
    वे अगर इधर आ जाएं कहीं ,
    तो कहो-प्रिये, आराम करो!
    उनकी भौंहें सिगनल समझो,
    वे चढ़ीं कहीं तो खैर नहीं,
    तुम उन्हें नहीं डिस्टर्ब करो,
    ए हटो, बजाने दो प्यानो!
    पत्नी को परमेश्वर मानो!
    तुम दफ्तर से आ गए, बैठिए!
    उनको क्लब में जाने दो।
    वे अगर देर से आती हैं,
    तो मत शंका को आने दो।
    तुम समझो वह हैं फूल,
    कहीं मुरझा न जाएं घर में रहकर!
    तुम उन्हें हवा खा आने दो,
    तुम उन्हें रोशनी पाने दो,
    तुम समझो ‘ऐटीकेट’ सदा,
    उनके मित्रों से प्रेम करो।
    वे कहाँ, किसलिए जाती हैं-
    कुछ मत पूछो, ऐ ‘शेम’ करो !
    यदि जग में सुख से जीना है,
    कुछ रस की बूँदें पीना है,
    तो ऐ विवाहितो, आँख मूँद,
    मेरे कहने को सच मानो!
    पत्नी को परमेश्वर मानो।
    मित्रों से जब वह बात करें,
    बेहतर है तब मत सुना करो।
    तुम दूर अकेले खड़े-खड़े,
    बिजली के खंबे गिना करो।
    तुम उनकी किसी सहेली को
    मत देखो, कभी न बात करो।
    उनके पीछे उनके दराज से
    कभी नहीं उत्पात करो।
    तुम समझ उन्हें स्टीम गैस,
    अपने डिब्बे को जोड़ चलो।
    जो छोटे स्टेशन आएं तुम,
    उन सबको पीछे छोड़ चलो।
    जो सँभल कदम तुम चले-चले,
    तो हिन्दू-सदगति पाओगे,
    मरते ही हूरें घेरेंगी,
    तुम चूको नहीं, मुसलमानो!
    पत्नी को परमेश्वर मानो!
    तुम उनके फौजी शासन में,
    चुपके राशन ले लिया करो।
    उनके चेकों पर सही-सही
    अपने हस्ताक्षर किया करो।
    तुम समझो उन्हें ‘डिफेंस एक्ट’,
    कब पता नहीं क्या कर बैठें ?
    वे भारत की सरकार, नहीं
    उनसे सत्याग्रह किया करो।
    छह बजने के पहले से ही,
    उनका करफ्यू लग जाता है।
    बस हुई जरा-सी चूक कि
    झट ही ‘आर्डिनेंस’ बन जाता है।
    वे ‘अल्टीमेटम’ दिए बिना ही
    युद्ध शुरू कर देती हैं,
    उनको अपनी हिटलर समझो,
    चर्चिल-सा डिक्टेटर जानो!
    पत्नी को परमेश्वर मानो।
    – गोपाल प्रसाद व्यास
  • Sad Poem in Hindi ये कैसी मजबूरी All time best very very sad kavita in hindi

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One comment

  1. SACHIN BANKER

    kya bat h wah g patni ke bare me itne achi soch bahut khub I LIKE THIS POEM

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