राखी पर कहानी Raksha Bandhan Story in Hindi – Rakhi Par Ek Heart touching Kahani :

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राखी पर कहानी Raksha Bandhan Story in Hindi – Rakhi Par Ek Heart touching Kahani

  • शीर्षक …..अधूरी कलाई

  • ( Raksha Bandhan Story in Hindi )

    “अरे निखिल  जल्दी -जल्दी खाना खा  ले फिर बाजार भी जाना है न !” शिवांगी  ने बेटे निखिल को रसोईघर से
    आवाज देते हुए कहा और खुद गर्मागर्म  पूड़ियाँ  तलने लगीं.
    “अभी आया मम्मी l “निखिल ने अपने कमरे  में से ही बुझी हुई आवाज में कहा l
    “अरे भई जल्दी खाना लगाओ  बड़ी भूँख लगी है l”  निखिल के पापा ने घर में घुसते  ही जोर से कहा l
    “हाँ..हाँ अभी देती  हूँ खाना …मगर अपने साहबजादे  को तो बुलाओ  ..आ ही नहीं रहा है पता नहीं क्या कर रहा है यह लड़का  l “
    “अरे तुमने  उड़द  की दाल  की कचौड़ी  बनाई  हैं !आज तो आनंद आ गया l ” निखिल के पापा ने नथुने
    फुलाकर सूँघते हुए शरारत से कहा l
    “वैसे तुम्हारी बहिन ने खाना क्यों नहीं खिलाया ?”शिवांगी ने ताना  मारा  l
    “अरे यार तुम्हारे  हाथों का खाना खाने की लत  जो लग गयी है ..अबऔर किसी के हाथ का भाता  ही नहीं l
    निखिल के पापा ने चापलूसी  भरे अंदाज  में कहा तो शिवांगी खुश हो गयी  l
    “,और तुम्हारी भाँजियां खुश हैं ?” शिवांगी ने व्यंगात्मक  लहजे  में कहा सुनकर महेश  के चेहरे की हँसी एकदम  गायब  हो गई  मगर शिवांगी के चेहरे की रौनक बढ़ गई l
    “हाँ ..हाँ ठीक है …ठीकहै .l ” महेश ने इतना ही कहा और डाईनिंग टेबल  पर गुमसुम  से जाकर बैठ  गए l
    कैसे बताते  कि आज शीनू  और शोना  कितना  रोई थीं यह सुनकर कि हर साल बे दोनों निखिल के राखियाँ   बाँधती थीं मगर इस बार ननद  और भाभी की नाक की लड़ाई  में निखिल की कलाई और दोनों बच्चिओं  के अरमान  सूने  रह गए l

  • Raksha Bandhan Story in Hindi
  • “अरे आ गया तू  …चलो खाना खाते  हैं !” महेश ने बेटे निखिल से कहा l
    निखिल पापा के हाथ में बंधी  राखी की डोर  को देखे जा रहा था उदास  सा l महेश बेटे के अंतर्द्वंद्व  को समझ गए
    इसलिए प्यार  से  बोले  ……”निखिल में तुम्हारे लिए राखी लाया हूँ …आओ मैं बाँधूँ  या अपनी मम्मी से बंधबा  लो  l “
    “पापा राखी तो बहिन से ही बंधबाई  जाती है फिर मम्मी या आप कैसे ?,”
    “,बेटा जिनके  बहिन नहीं होती …..
    “मगर पापा मेरे तो दो -दो बहिने  हैं फिर भी मेरी कलाई सूनी  है मम्मी और बुआ  जी के कारण l “,कहते हुए उसकी आँखें  भर  आईं  l
    “क्या मिला तुमको बच्चों में  दूरियाँ  बढ़ाकर  अपने अहंकार  और नाक  की लड़ाई को दोनों खुद तक ही सीमित  रहने  देतीं  …बच्चों में दूरियाँ क्यों बढ़ा  रही हो ?”महेश के प्रश्नों  ने उसको निरुत्तर  कर दिया तीनों  बिना  खाना खाये  अपने कमरे में चले
    गए l
    – लेखिका….राशि सिंह
    मुदाबाद उत्तर प्रदेश
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