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Rani Padmavati Poem in Hindi – रानी पद्मावती का जौहर कविता Padmini kavita :

Rani Padmavati poem in hindi – रानी पद्मावती का जौहर कविता
Rani Padmavati Poem in Hindi - रानी पद्मावती का जौहर कविता Padmini kavita

Rani Padmavati Poem in Hindi – रानी पद्मावती का जौहर कविता Padmini kavita

  • जौहर की कहानी

  • मैं हूँ रानी पद्मिनी या फिर बोलो रानी पद्मावती
    तुम्हें जौहर की कहानी सुनाने आई हूँ
    जो भूल चूके तुम निज गौरव,
    वो भूला गौरव याद दिलाने आई हूँ
    भारत गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा जाने लगा था
    मुस्लिम आक्रमणकारियों को हिन्दुओं का फूट भाने लगा था
    दिल्ली में खिलजी कब्जा कर बैठा……..
    पूरे भारत में उसका खौफ छाने लगा था…..
    भारत की दौलत लूट-लूट वह ले जाने लगा था…
    स्त्रियों की इज्जत से खेलने लगे थे वो आक्रमणकारी
    पूरे जनमानस के लिए त्रासदी बन गए थे वे व्यभिचारी
    हिन्दू राजा एकता का मोल उस वक्त न समझ पाए
    दूरदर्शिता भूलकर उन सबको अपने-अपने हित हीं भाए
    खिलजी नित नये षड्यंत्र रचे जा रहा था
    नित नये राज्य हड़पने को वो बौरा रहा था
    चित्तौढ़ की तरफ अब वो अपने कदम बढ़ा रहा था
    मन्दिरों और राज्यों का धन लूटना उनकी आदत बन गई थी
    हिन्दू स्त्रियों की आबरू लूटना उनकी शानोशौकत बन गई थी
    चित्तौड़ के वीरों ने युद्ध की तैयारी कर ली थी
    और स्त्रियों ने जौहर की तैयारी कर ली थी
    कुछ ने अपनी अस्मत से समझौता कर जिंदा रहना बेहतर समझा
    हमने जौहर की आग में खुद को जलाना बेहतर समझा
    ताकि वो व्यभिचारी मरने के बाद भी हमें छू न पाएँ
    ताकि मरकर भी हम वीरांगनाओं के सिर न झुक जाएँ
    तुम सोच रहे होगे कि……….
    जौहर की अग्नि में खुद को जलाना ये कैसा विकल्प था
    तुम सोच रहे होगे कि…….
    खुद को अपने हाथों मिटाना ये कैसा संकल्प था
    विधर्मी की दासी बनकर जीने से आसान था आग में जल जाना
    हर दिन हजारों मौत मरने बेहतर था एक बार में मर जाना
    जब-जब वर्तमान तुम्हें भटकाए, तो हमारा इतिहास याद करना तुम
    जाति के नाम पर बंटने से पहले गुलामी का काला दौर याद करना तुम.
    – अभिषेक मिश्र ( Abhi )
  • भारतीय सैनिकों पर कविता – Poems On Indian Soldiers in Hindi

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One comment

  1. sukhmangal singh

    “अनाचारी जायेंगे कन्दरा ?”
    वह आक्रमणकारियों का दौर था
    आक्रमण का लोगों में तब खौफ था|
    उस वक्त भी दौलत लूटते रहे लोग
    आज भी लुट रहे कैसा बना संयोग ?
    दौलत वे ले जाने के लिए आने लगे थे
    निज हित में सभी राजा घबराने लगे थे|
    और खिलजी दिल्ली में बैठ सिंहासन से
    षड्यंत्र रचकर मन से मुस्कराने लगा था |
    राजाओं में एकता की कमी से हुए गुलाम
    आज अपनों से हो रहे है कितना बदनाम |
    वीरांगनाएं जब उठ खड़ी होंगी अन्दरर्न से
    व्यभिचारी -दुराचारी -भ्रष्टाचारी कन्दरा में ||

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