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Saturday आज की रचना – 28.11.2020 SuvicharHindi.Com

  • भूल जाते हैं हम
भूल जाते हैं हम कि माँ को भी आराम की जरूरत होती है
भूल जाते हैं हम कि माँ पूरे घर में सबसे कम सोती है
भूल जाते हैं हम कि माँ की उम्र भी बढ़ती जा रही है
भूल जाते हैं हम कि माँ रोज दर्द सहकर भी मुस्कुरा रही है
भूल जाते हैं हम कि घर की जिम्मेदारियाँ अब हमें उठानी चाहिए
भूल जाते हैं हम कि हमारी वजह से माँ कभी मुस्कुरानी चाहिए
भूल जाते हैं हम कि माँ की आँखों में अपने लिए भी कुछ सपने थे
भूल जाते हैं हम कि माँ के पास रहने के लिए बचपन में हम झगड़ते थे
भूल जाते हैं हम कि माँ की खुशियों में अब हमें अपनी ख़ुशी तलाशनी चाहिए
भूल जाते हैं हम कि माँ को अब परवाह चाहिए, ना कि मीठे शब्दों की चाशनी चाहिए
भूल जाते हैं हम कि जैसे माँ ने हमें नाजों से पाला, अब वह कर्ज उतारना चाहिए
भूल जाते हैं हम कि अब माँ से कुछ लेना नहीं…. उन्हें सिर्फ और सिर्फ देना चाहिए.

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