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Home / Hindi Poem Kavita Poetry / पेड़ बचाओ कविता हिन्दी में || Poem on trees in Hindi language font save tree

पेड़ बचाओ कविता हिन्दी में || Poem on trees in Hindi language font save tree

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  • पेड़ बचाओ कविता हिन्दी में – Save Tree Poem in Hindi Language Font 

 

  • ped bachao kavita in hindi

  • पेड़ का दर्द

    कितने प्यार से किसी ने
    बरसों पहले मुझे बोया था
    हवा के मंद मंद झोंको  ने
    लोरी गाकर सुलाया  था ।
    कितना विशाल घना वृक्ष
    आज  मैं  हो  गया  हूँ
    फल फूलो से लदा
    पौधे से वृक्ष हो गया हूँ  ।
    कभी कभी मन में
    एकाएक विचार करता हूँ
    आप सब मानवों से
    एक सवाल करता हूँ  ।
    दूसरे पेड़ों की भाँति
    क्या मैं भी काटा जाऊँगा
    अन्य वृक्षों की भाँति
    क्या मैं भी वीरगति पाउँगा ।
    क्यों बेरहमी से मेरे सीने
    पर कुल्हाड़ी चलाते हो
    क्यों बर्बरता से सीने
    को छलनी करते हो ।
    मैं तो तुम्हारा सुख
    दुःख का साथी हूँ
    मैं तो तुम्हारे लिए
    साँसों की भाँति हूँ।
    मैं तो तुम लोगों को
    देता हीं देता हूँ
    पर बदले में
    कछ नहीं लेता हूँ  ।
    प्राण वायु  देकर तुम पर
    कितना उपकार करता हूँ
    फल-फूल देकर तुम्हें
    भोजन देता हूँ।
    दूषित हवा लेकर
    स्वच्छ हवा देता हूँ
    पर बदले में कुछ नहीं
    तुम से लेता हूँ ।
    ना काटो मुझे
    ना काटो मुझे
    यही मेरा दर्द है।
    यही मेरी गुहार है।
    यही मेरी पुकार  है।
    – अंजू गोयल

 

  • Save Trees Poem in Hindi

  • आओ चलें वृक्ष लगायें :-#

    वृक्ष तू जीवन का आधार
    है धरती का अद्भुत उपहार !
    जिसको तू नित्य जीवन देता
    वही तेरा कर रहा संहार !
    तेरे हीं छाँव के नीचे खेला
    गुल्ली-डंडा खेल हुआ बड़ा !
    जब भी उसको चोट लगी
    तेरा हीं छाल – पत्ती तोड़ा !
    आज घर से लाया है कुल्हाड़ी
    करनी है तेरी छाती पर वार !
    जिसका तू नित्य जीवन देता
    वही तेरा कर. रहा संहार !
    काट डाला उस टहनी को
    जिसके नीचे कभी बांधा था झूला!
    थक हार तेरे छाँव में बैठा
    तेरे सारे उपकार को भूला !
    खुद जहरीले धुंआ सोख तू
    प्राण – वायु कर रहा संचार !
    जिसका तू नित्य जीवन देता
    वही तेरा कर रहा संहार !
    तुमसे बड़ा सेवक है कौन ?
    तेरे आगे नीलकंठ है मौन !
    सत्य – अहिंसा ,के पुजारी
    बुध्द और गाँधी भी गौण !
    प्रकृति का अनमोल है वृक्ष
    मत करो हरे पेड़ पर वार !
    जिसका तू नित्य जीवन देता
    वही तेरा कर रहा संहार !
    अंधाधुंध कटाई जंगल का
    सम्पूर्ण शहर बन गया है भठ्ठी !
    आओ चलें वृक्ष लगायें
    वृक्ष. लगाकर बचालें धरती !
    तेरे हरियाली लाये खुशहाली
    तू है धरती का श्रृंगार !
    जिसका तू नित्य जीवन देता
    वही तेरा कर रहा संहार !
    वृक्ष तू जीवन का आधार
    है धरती का अदभूत उपहार !
    जिसका तू नित्य जीवन देता
    वही तेरा कर रहा संहार !
    – चन्दन कुमार
    प्रधानाध्यापक
    स्तरोन्नत उच्च विद्यालय लठेया
    छत्तरपुर,पलामू

 

  • Ped Par Kavita Hindi Me

  • वृक्षों का उपकार

  • काट रहे हो तुम वृक्षों को,
    कुछ भी नहीं विचार किया।
    वृक्षों ने जो कुछ भी पाया,
    उसे हमीं पे वार दिया।।
    इतना बड़ा हमारा जग है,
    क्षरण यहाँ स्वीकार नहीं।
    वे भी जीव इसी जग के हैं,
    जीना क्या अधिकार नहीं?
    फल अरु फूल दिया है इसने,
    राही को भी छावं दिया।
    वृक्षों ने जो कुछ भी पाया,
    उसे हमीं पे वार दिया।।
    शिक्षा हमें कहाँ ले जाती,
    नैतिक यदि आधार नहीं।
    माना युग भी बदल रहा है,
    पर इतना अनुदार नहीं।
    कितनी भूमि यहाँ उर्वर है,
    नैतिकता विश्वास दिया।
    वृक्षों ने जो कुछ भी पाया,
    उसे हमीं पे वार दिया।।
    बिना पेड़ जीवन क्या संभव,
    समझ न पाता कोई क्यों?
    सूरज की किरणों में तपकर,
    देते छाँव हमें वर्षों।
    व्यक्त नहीं कर सकता कोई,
    हमपर जो उपकार किया।
    वृक्षों ने जो कुछ भी पाया,
    उसे हमीं पे वार दिया।।
    कुलदीप पाण्डेय आजाद

 

  • vriksh par kavita in hindi

  • शायद कबूल हो जाये, दुआ करके तो देखो
    शायद जित भी जाओ, दाव लगा कर तो देखो
    वैसे भी गिनती करके कहां, साँस को आया हूँ
    साहिल पे भी डूबते नाव, भँवर तैर कर तो देखो
    धार तेज होगा तो, काटेगा भी तेज ही
    खुद पर से लगा जंग जरा, हटा कर तो देखो
    आकाश में ताकते रहोगे तो, चाँद दूर ही दिखेगा
    पास के झील में, नजर झुका कर तो देखो
    दर्द जितना महसूस करोगे, उतना ही तड़पाएगा
    तन्हाई से निकलके चौक-चोराहे पे, आकर तो देखो
    इंसान ही क्या पशु-पक्षी ही क्या, पेड़-पौधे भी क्या
    खटकेगा जुदाई निर्जीव का भी, नाता जोड़ कर तो देखो
    अगर दिल में प्रेम हो तो, सात समुन्दर की दुरी भी कम है
    वो सुन लेगा तेरा आवाज, इकबार लगा कर तो देखो
    Dr.B.B.jha
  • कर्तव्य पर हिन्दी कविता – Poem On Kartavya in Hindi Responsibility

 

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One comment

  1. Anonymous

    Thnx bery much for this beautiful poem

  2. hari

    VERY COOL

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