सावन के मौसम पर 2 लोक गीत हिंदी में Sawan Lok Geet in Hindi savan pe pyare lokgeet :

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सावन के मौसम पर 2 लोक गीत हिंदी में Sawan Lok Geet in Hindi savan pe pyare lokgeet

  • Sawan Ke Lok Geet

  • सावन आया

    सावन आया अम्मा मेरी रंग भरा जी,
    ए जी कोई आई हैं हरियाली तीज ।।
    घर-घर झूला झूलें कामिनी जी ।
    बन बन मोर पपीहा बोलता जी,
    एजी कोई गावत गीत मल्हार ।। सावन—
    कोयल कूकत अम्बुआ की डार पें जी ।
    बादल गरजे, चमके बिजली जी,
    एजी कोई उठी है घटा घनघोर,
    थर-थर हिवड़ा अम्मा मेरी काँपता जी ।। सावन–
    पाँच सुपारी नारियल हाथ में जी
    एजी कोई पंडित तो पूछन जाएॅं,
    कितने दिनों में आवें लष्करीया जी ।।
    पतरा तो लेकर पंडित देखता जी
    ए जी कोई जितने पीपल के पात
    उतने दिनों मे आवें लष्करीया जी ।
    इतने में कुण्डा अम्माँ मोरी खड़कियाँ जी
    एजी कोई घोड़ा तो हिनसाद्वार
    टगटग महलों आए लष्करीया जी ।
    घोड़ा तो बांधों बाँदी घुड़साल में जी
    एजी कोई चाबुक रखियो संभाल ।। सावन—
    पैर पखारूॅं उजले दूध में जी ।।
    हिलमिल सखियाँ झूला झूलती जी
    एजी कोई हँस हँस झोटे देय
    सावन आया रंग-भरा जी ।।

  • सावन दिन आ गए

  • अरी बहना! छाई घटा घनघोर, सावन दिन आ गए ।
    उमड़-घुमड़ घन गरजते ।
    अरी बहना! ठण्डी-ठण्डी पड़त फुहार । सावन दिन–
    बादल गरजे बिजली चमकती,
    अरी बहना! बरसत मूसलधार ।। सावन दिन —
    कोयल तो बोले हरियल डार पे,
    अरी बहना! हंसा तो करत किलोल ।। सावन दिन —
    वन में पपीहा पिऊ पिऊ रटै,
    अरी बहना! गौरी तो गावे मल्हार ।। सावन दिन —
    सखियां तो हिलमिल झूला झूलती,
    अरी बहना! हमारे पिया परदेस ।। सावन दिन–
    लिख-लिख पतियां मैं भेजती,
    अजी राजा। सावन की आई बहार ।। सावन दिन–
    हमरा तो आवन गोरी होय ना,
    अजी गोरी। हम तो रहे मन मार ।। सावन दिन–
    राजा। बुरी थारी चाकरी,
    अजी राजा। जोबन के दिन चार ।। सावन दिन–

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