शिव स्तुति संस्कृत में – Shiv Stuti in Sanskrit Lyrics Text Mantra :

शिव स्तुति संस्कृत में - Shiv Stuti in Sanskrit Lyrics Text Mantra

शिव स्तुति संस्कृत में – Shiv Stuti in Sanskrit Lyrics Text Mantra

  • वेदसार स्तव नामक यह स्तुति शंकराचार्य द्वारा लिखी गई है. हर दिन सुबह या प्रति सोमवार को इसका पाठ करने से व्यक्ति के सभी सुख पाता है.

शिव स्तुति मंत्र (वेदसार स्तव )

  • पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम।
    जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम।1।
    महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम्।
    विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम्।2।
    गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम्।
    भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम्।3।
    शिवाकान्त शंभो शशाङ्कार्धमौले महेशान शूलिञ्जटाजूटधारिन्।
    त्वमेको जगद्व्यापको विश्वरूप: प्रसीद प्रसीद प्रभो पूर्णरूप।4।
    परात्मानमेकं जगद्बीजमाद्यं निरीहं निराकारमोंकारवेद्यम्।
    यतो जायते पाल्यते येन विश्वं तमीशं भजे लीयते यत्र विश्वम्।5।
    न भूमिर्नं चापो न वह्निर्न वायुर्न चाकाशमास्ते न तन्द्रा न निद्रा।
    न गृष्मो न शीतं न देशो न वेषो न यस्यास्ति मूर्तिस्त्रिमूर्तिं तमीड।6।
    अजं शाश्वतं कारणं कारणानां शिवं केवलं भासकं भासकानाम्।
    तुरीयं तम:पारमाद्यन्तहीनं प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम।7।
    नमस्ते नमस्ते विभो विश्वमूर्ते नमस्ते नमस्ते चिदानन्दमूर्ते।
    नमस्ते नमस्ते तपोयोगगम्य नमस्ते नमस्ते श्रुतिज्ञानगम्।8।
    प्रभो शूलपाणे विभो विश्वनाथ महादेव शंभो महेश त्रिनेत्।
    शिवाकान्त शान्त स्मरारे पुरारे त्वदन्यो वरेण्यो न मान्यो न गण्य:।9।
    शंभो महेश करुणामय शूलपाणे गौरीपते पशुपते पशुपाशनाशिन्।
    काशीपते करुणया जगदेतदेक-स्त्वंहंसि पासि विदधासि महेश्वरोऽसि।10।
    त्वत्तो जगद्भवति देव भव स्मरारे त्वय्येव तिष्ठति जगन्मृड विश्वनाथ।
    त्वय्येव गच्छति लयं जगदेतदीश लिङ्गात्मके हर चराचरविश्वरूपिन।11।

शिव स्तुति संस्कृत में – Shiv Stuti in Sanskrit Lyrics Text Mantra

  • श्री शङ्कराचार्य कृतं – शिव स्वर्णमाला स्तुति। ( Shiv Swarnamala Stuti Lyrics )

  • साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    ईशगिरीश नरेश परेश महेश बिलेशय भूषण भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    उमया दिव्य सुमङ्गल विग्रह यालिङ्गित वामाङ्ग विभो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    ऊरी कुरु मामज्ञमनाथं दूरी कुरु मे दुरितं भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    ॠषिवर मानस हंस चराचर जनन स्थिति लय कारण भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    अन्तः करण विशुद्धिं भक्तिं च त्वयि सतीं प्रदेहि विभो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    करुणा वरुणा लय मयिदास उदासस्तवोचितो न हि भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    जय कैलास निवास प्रमाथ गणाधीश भू सुरार्चित भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    झनुतक झङ्किणु झनुतत्किट तक शब्दैर्नटसि महानट भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    धर्मस्थापन दक्ष त्र्यक्ष गुरो दक्ष यज्ञशिक्षक भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुण रुचितं चिरं प्रदेहि विभो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    शर्व देव सर्वोत्तम सर्वद दुर्वृत्त गर्वहरण विभो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    भगवन् भर्ग भयापह भूत पते भूतिभूषिताङ्ग विभो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    षड्रिपु षडूर्मि षड्विकार हर सन्मुख षण्मुख जनक विभो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्मे त्येल्लक्षण लक्षित भो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
    हाऽहाऽहूऽहू मुख सुरगायक गीता पदान पद्य विभो।
    साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥
  • शिव स्वर्णमाला स्तुति। ( Shiv Swarnamala Stuti Lyrics Mantra )
  • शिव स्तुति संस्कृत में – Shiv Stuti in Sanskrit Lyrics Text Mantra

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