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कृष्ण चालीसा मन्त्र नाम Shri Krishna Chalisa Mantra 108 Names aarti in Hindi :

कृष्ण चालीसा मन्त्र नाम Shri Krishna Chalisa Mantra 108 Names aarti in Hindi
कृष्ण चालीसा मन्त्र नाम Shri Krishna Chalisa Mantra 108 Names aarti in Hindi


  • श्री कृष्ण चालीसा
    ( Shri Krishna Chalisa in Hindi )

    ॥दोहा॥
    बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
    अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥
    पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज।
    जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥
    जय यदुनंदन जय जगवंदन।जय वसुदेव देवकी नन्दन॥
    जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
    जय नटनागर, नाग नथइया॥ कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया॥
    पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥
    वंशी मधुर अधर धरि टेरौ। होवे पूर्ण विनय यह मेरौ॥
    आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥
    गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥
    राजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजन्तीमाला॥
    कुंडल श्रवण, पीत पट आछे। कटि किंकिणी काछनी काछे॥
    नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
    मस्तक तिलक, अलक घुँघराले। आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥
    करि पय पान, पूतनहि तार्यो। अका बका कागासुर मार्यो॥
    मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला। भै शीतल लखतहिं नंदलाला॥
    सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई। मूसर धार वारि वर्षाई॥
    लगत लगत व्रज चहन बहायो। गोवर्धन नख धारि बचायो॥
    लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख मंह चौदह भुवन दिखाई॥
    दुष्ट कंस अति उधम मचायो॥ कोटि कमल जब फूल मंगायो॥
    नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें॥
    करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥
    केतिक महा असुर संहार्यो। कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो॥
    मातपिता की बन्दि छुड़ाई ।उग्रसेन कहँ राज दिलाई॥
    महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥
    भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥
    दै भीमहिं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहँ मारा॥
    असुर बकासुर आदिक मार्यो। भक्तन के तब कष्ट निवार्यो॥
    दीन सुदामा के दुःख टार्यो। तंदुल तीन मूंठ मुख डार्यो॥
    प्रेम के साग विदुर घर माँगे।दर्योधन के मेवा त्यागे॥
    लखी प्रेम की महिमा भारी।ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
    भारत के पारथ रथ हाँके।लिये चक्र कर नहिं बल थाके॥
    निज गीता के ज्ञान सुनाए।भक्तन हृदय सुधा वर्षाए॥
    मीरा थी ऐसी मतवाली।विष पी गई बजाकर ताली॥
    राना भेजा साँप पिटारी।शालीग्राम बने बनवारी॥
    निज माया तुम विधिहिं दिखायो।उर ते संशय सकल मिटायो॥
    तब शत निन्दा करि तत्काला।जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥
    जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।दीनानाथ लाज अब जाई॥
    तुरतहि वसन बने नंदलाला।बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥
    अस अनाथ के नाथ कन्हइया। डूबत भंवर बचावइ नइया॥
    सुन्दरदास आ उर धारी।दया दृष्टि कीजै बनवारी॥
    नाथ सकल मम कुमति निवारो।क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥
    खोलो पट अब दर्शन दीजै।बोलो कृष्ण कन्हइया की जै॥
    ॥दोहा॥
    यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि।
    अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥


  • Shri Krishna Mantra in Hindi
    श्री कृष्ण मन्त्र

    भगवान श्री कृष्ण की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें नारियल फल समर्पण करना चाहिए.
    इदं फ़लं मया देव स्थापित पुर-तस्तव |
    तेन मे सफ़लानत्ति भरवेजन्मनि जन्मनि ||
    • इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री कृष्ण को पान-बीड़ा समर्पण करना चाहिए.
    ॐ पूंगीफ़लं महादिव्यं नागवल्ली दलैर्युतम् |
    एला-चूर्णादि संयुक्तं ताम्बुलं प्रतिगृहयन्ताम् ||
    • इस मंत्र को पढ़ते हुए बाल गोपाल भगवान श्री कृष्ण को चन्दन अर्पण करना चाहिए.
    ॐ श्रीखण्ड-चन्दनं दिव्यं गंधाढ़्यं सुमनोहरम् |
    विलेपन श्री कृष्ण चन्दनं प्रतिगृहयन्ताम् ||
    • श्री कृष्ण की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें सुगन्धित धूप अर्पण करना चाहिए.
    वनस्पति रसोद भूतो गन्धाढ़्यो गन्ध उत्तमः |
    आघ्रेयः सर्व देवानां धूपोढ़्यं प्रतिगृहयन्ताम् ||
    • इस मंत्र के द्वारा नंदलाल भगवान श्री कृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए.
    नव-भिस्तन्तु-भिर्यक्तं त्रिगुणं देवता मयम् |
    उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||


  • भगवान कृष्ण के 108 नाम
    (108 Names of Lord Krishna in Hindi)

    1 अचला : भगवान।
    2 अच्युत : अचूक प्रभु, या जिसने कभी भूल ना की हो।
    3 अद्भुतह : अद्भुत प्रभु।
    4 आदिदेव : देवताओं के स्वामी।
    5 अदित्या : देवी अदिति के पुत्र।
    6 अजंमा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो।
    7 अजया : जीवन और मृत्यु के विजेता।
    8 अक्षरा : अविनाशी प्रभु।
    9 अम्रुत : अमृत जैसा स्वरूप वाले।
    10 अनादिह : सर्वप्रथम हैं जो।
    11 आनंद सागर : कृपा करने वाले
    12 अनंता : अंतहीन देव
    13 अनंतजित : हमेशा विजयी होने वाले।
    14 अनया : जिनका कोई स्वामी न हो।
    15 अनिरुध्दा : जिनका अवरोध न किया जा सके।
    16 अपराजीत : जिन्हें हराया न जा सके।
    17 अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट।
    18 बालगोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप।
    19 बलि : सर्व शक्तिमान।
    20 चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु।
    21 दानवेंद्रो : वरदान देने वाले।
    22 दयालु : करुणा के भंडार।
    23 दयानिधि : सब पर दया करने वाले।
    24 देवाधिदेव : देवों के देव
    25 देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)।
    26 देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर
    27 धर्माध्यक्ष : धर्म के स्वामी
    28 द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति।
    29 गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले।
    30 गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय
    31 गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले।
    32 ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान
    33 हरि : प्रकृति के देवता।
    34 हिरंयगर्भा : सबसे शक्तिशाली प्रजापति।
    35 ऋषिकेश : सभी इंद्रियों के दाता।
    36 जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु
    37 जगदिशा : सभी के रक्षक
    38 जगन्नाथ : ब्रह्मांड के ईश्वर।
    39 जनार्धना : सभी को वरदान देने वाले।
    40 जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।
    41 ज्योतिरादित्या : जिनमें सूर्य की चमक है।
    42 कमलनाथ : देवी लक्ष्मी की प्रभु
    43 कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
    44 कामसांतक : कंस का वध करने वाले।
    45 कंजलोचन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
    46 केशव :
    47 कृष्ण : सांवले रंग वाले।
    48 लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी की प्रभु।
    49 लोकाध्यक्ष : तीनों लोक के स्वामी।
    50 मदन : प्रेम के प्रतीक।

    51 माधव : ज्ञान के भंडार।

    52 मधुसूदन : मधु- दानवों का वध करने वाले।
    53 महेंद्र : इन्द्र के स्वामी।
    54 मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले।
    55 मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप रंग वाले प्रभु।
    56 मयूर : मुकुट पर मोर- पंख धारण करने वाले भगवान।
    57 मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले।
    58 मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु।
    59 मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले।
    60 मुरलीमनोहर : मुरली बजाकर मोहने वाले।
    61 नंद्गोपाल : नंद बाबा के पुत्र।
    62 नारायन : सबको शरण में लेने वाले।
    63 निरंजन : सर्वोत्तम।
    64 निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण नहीं।
    65 पद्महस्ता : जिनके कमल की तरह हाथ हैं।
    66 पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो।
    67 परब्रह्मन : परम सत्य।
    68 परमात्मा : सभी प्राणियों के प्रभु।
    69 परमपुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।
    70 पार्थसार्थी : अर्जुन के सारथी।
    71 प्रजापती : सभी प्राणियों के नाथ।
    72 पुंण्य : निर्मल व्यक्तित्व।
    73 पुर्शोत्तम : उत्तम पुरुष।
    74 रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है।
    75 सहस्राकाश : हजार आंख वाले प्रभु।
    76 सहस्रजित : हजारों को जीतने वाले।
    77 सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों।
    78 साक्षी : समस्त देवों के गवाह।
    79 सनातन : जिनका कभी अंत न हो।
    80 सर्वजन : सब- कुछ जानने वाले।
    81 सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले।
    82 सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे।
    83 सत्यवचन : सत्य कहने वाले।
    84 सत्यव्त : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।
    85 शंतह : शांत भाव वाले।
    86 श्रेष्ट : महान।
    87 श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।
    88 श्याम : जिनका रंग सांवला हो।
    89 श्यामसुंदर : सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले।
    90 सुदर्शन : रूपवान।
    91 सुमेध : सर्वज्ञानी।
    92 सुरेशम : सभी जीव- जंतुओं के देव।
    93 स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा।
    94 त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता
    95 उपेंद्र : इन्द्र के भाई।
    96 वैकुंठनाथ : स्वर्ग के रहने वाले।
    97 वर्धमानह : जिनका कोई आकार न हो।
    98 वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले।
    99 विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप।
    100 विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल।
    101 विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता
    102 विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का रूप।
    103 विश्वरुपा : ब्रह्मांड- हित के लिए रूप धारण करने वाले।
    104 विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा।
    105 वृषपर्व : धर्म के भगवान।
    106 यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया।
    107 योगि : प्रमुख गुरु।
    108 योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।


  • Shri Krishna Aarti in Hindi
    श्री कृष्ण जी की आरती

    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
    आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
    गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
    श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
    गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
    लतन में ठाढ़े बनमाली
    भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक
    ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
    ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
    कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
    गगन सों सुमन रासि बरसै।
    बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग
    अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
    ॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

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