कुछ छोटी-छोटी कविताएँ || Some Poems in Hindi language सम पोएम्स इन हिंदी :

कुछ छोटी-छोटी कविताएँ || Some Poems in Hindi language कुछ छोटी-छोटी कविताएँ - Some Poems in Hindi Language

Some Poems in Hindi

  • कितनी नावों में कितनी बार
  • कितनी नावों में कितनी बार
    पता नहीं जन्म से
    मृत्यु तक
    कितनी नावों में कितनी बार
    सफर करता है मानव
    उत्थान – पतन
    देवत्व – दानवत्व
    घृणा – श्रद्धा
    जय – पराजय
    उत्साह – निराशा
    प्रणय – विरोध
    भोग – योग
    शिष्टत्व – अशिष्टत्व
    अपना – पराया
    गुरुत्व – शिष्यत्व
    दूरदर्शिता – अदूरदर्शिता
    आदि नावों में
    बार-बार चढ़ता है
    राज तो यही है एक मात्र
    भव ( संसार ) को सागर मानने का
    वरण स्पष्ट नहीं होने हो
    कितनी नावों में कितनी बार
    वह सफर करता रहता है
    क्योंकि यह पहेली……
    पहेली को भी पहेली सम ( जैसी ) दिखती है.
    A Poem by – Dr. Narayan Mishra
  • पश्चाताप
    हम पशु न रहे
    न मानव हीं रहे
    जब से हम भी
    बिकने लगे
    आत्मबंधन के नाम पर
    प्राण प्रतिष्ठा जैसे लूटते हैं
    दहेज के दाँव पर.
    A Poem by – Dr. Narayan Mishra
  • कवि का निंद्रा से संघर्ष
    सब सो गये हैं
    पर कहाँ मैं सोया हूँ
    सब सो गये हैं
    कल उठने के लिए
    पर मैं जगा हुआ हूँ
    जीवन में ऊपर उठने के लिए
    सब थक कर सो गए हैं
    पर मैं थकने के बाद भी जगा हुआ हूँ
    जीवन के भर के लिए, क्योंकि कवि हूँ मैं
    सब अच्छे है उन्हें अपनी मंज़िल पता है (जीवन भर के लिए सोना)
    पर मैं एक इमारत बनाना चाहता हूँ मौत की गोद में सोने से पहले.
    A Poem by – Deepak Sharma
  • 3 कविताएँ प्रेमिका के लिए – A Poem in Hindi For Girlfriend With Image

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