Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content

2 Swatantrata Diwas Par Kavita in Hindi – स्वतन्त्रता दिवस पर कविता इन हिंदी freedom :

swatantrata diwas par kavita in hindi – स्वतन्त्रता दिवस पर कविता इन हिंदी 2 Swatantrata Diwas Par Kavita in Hindi – स्वतन्त्रता दिवस पर कविता इन हिंदी freedom

Swatantrata Diwas Par Kavita in Hindi2 Swatantrata Diwas Par Kavita in Hindi – स्वतन्त्रता दिवस पर कविता इन हिंदी freedom

  • स्वतन्त्रता दिवस पर कविता

  • स्वतंत्रता की शपथ

    स्वतंत्रता की इस मधुर बेला में एक शपथ ले रहा हूँ
    एक वचन दे रहा हूँ, एक वचन दे रहा हूँ ।
    झुकने न दूँगा देश के अरमानों को ।
    ठहरा जो मैं स्वदेशी शेर I
    शेर की दहाड़ है, स्वदेश की पुकार है।
    दुश्मनो को भगाएंगे , सब मिलकर स्वतंत्रता मनाएंगे
    स्वतंत्रता की इस मधुर बेला में एक शपथ ले रहा हूं
    एक वचन दें रहा हूँ एक वचन दे रहा हूं……
    आजादी के आँगन में तेरी यादो की त स्वीर बनाता हूं
    गाता हूं कुछ गीत इस दिवस पे और स्वतंत्रता की रश में. निभाता हूं।
    स्वतंत्रता की……………………..
    नव जीवन बनकर हम आए, नव जीवन बनकर हम आएँ
    स्वतंत्रता की सीढ़ीयों में चढ़कर नया जीवन को हम पाए.
    स्वतंत्र स।रथी में चढ़कर आजादी की अलख जलाता हूं
    माँ भारती के आशीष से दुश्मनों को दूर भगाता हूँ
    स्वतंत्रता की……………………….
    नव जीवन की नव बेला में नवनीत बन कर हम आएँ
    माँ भारती के आँचल को बाँध दुश्मनाे को धूल चटाने हम आए
    स्वतंत्रता की इस मधुर बेला में कसम जो मैं खा चुका हूँ
    टिकने ना दूँगा दुश्मनों की फौज को
    स्वतंत्रता की………………….
    नव जीवन की नव बेला आइ , नव जीवन की नव बेला आई तेरी महिमा अमिट हैं माई
    मैं हूँ अतुल भारत का वासी विश्व गुरु कहलाता हूं
    ज्ञान की गंगा बहाकर मैं , दुनिया को दो टूक सिखाता हूँ
    स्वतंत्रता की………….. :…..
    _ स्वतंत्रता की साख में जीता रहा हूँ सदा
    झुकता नहीं , मिटता नहीं , मिटाता हूँ सदा
    इस पावन दिवस पे पवित्र वचन निभाने चला हूँ।
    सदा ऊंचा रखूंगा अपने इस सरताज को।
    झुकने न दूंगा मां भारती के आन , बान और शान को।
    स्वतंत्रता की………………….
    मैं करता हूँ निवेदन अपने हर एक सपूत से , अब जंजीरों को तोडकर मिटा डालो देश के गद्दारों को I
    तुम हो अक्षय शक्ति का भंडार , कौन करेगा तुझ पे वार I
    दुनिया को दहलाने का , दुनिया को बहलाने का , सब मिश्रण तुझ में समाहित हैं।
    तेरी काया की काबिलियत जग को जगमग करती है , अब जगदीप बनकर दुनिया को दिखाना है।
    हम हैं स्वदेशी शेर , यह प्रमाणित कर दिखाना है I
    स्वतंत्रता की …………………..
    स्वतंत्रता की आरती , कर रहा हूँ माँ भारती l
    पुकार ती , पुकार ती , पुकारती माँ भारती।
    जय हिन्द
    – दिवाकर पाठक

  • ये कैसी आज़ादी?

    सड़कों पे ख़ौफ़ की आहट-सी है,
    अखबारें हर रोज़ नए जुर्म का फरमान लाती हैं,
    ऐ वतन! ये तेरी कैसी आज़ादी है?
    बस ‘खून’ के प्यासे बिखरे पड़े हैं,
    बात-बात में भीड़ यहां ‘ज़ात’ में बंट जाती है,
    इंसानियत होती है नीलाम सरेआम,
    फिर हैवानों की तादाद बढ़ जाती है,
    ऐ वतन! ये तेरी कैसी आज़ादी है?
    कोई कत्ल करके भी बेख़ौफ़ चलता है,
    वहीं कोई दहलीज लाँघने से डरता है,
    वो बेईमानियों के समंदर लिए बैठे हैं,
    फिर भी यहां ईमानदार किसान भूखा मरता है,
    तेरे ही ज़मीन में तिरंगे जलाए जाते हैं,
    यहाँ किसको सज़ा सुनाई जाती है?
    ऐ वतन! ये तेरी कैसी आज़ादी है?
    – Jaya Pandey

.

Previous Kalawa Bandhne Ka Mantra मौली कलावा बांधने का मन्त्र mouli bandhan raksha sutra :
Next समय के नियोजन पर निबन्ध Samay Niyojan Essay in Hindi Mahatva Pabandi nibandh :

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.