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Vidai Samaroh Par Kavita – विदाई कविताएं – Vidai Ki Kavita in Hindi poems :

vidai samaroh par kavita – विदाई पोएम्स इन हिंदी
Vidai Samaroh Par Kavita - विदाई कविताएं - Vidai Ki Kavita in Hindi poems

Vidai Samaroh Par Kavita – विदाई कविताएं

  • विदाई

  • नाजों में पली मेरी बिटिया रानी
    आज दुल्हन बनी है
    सात फेरों के सात वचनों
    को लेकर घर पिया के चली है
    नाजों में पली मेरी बिटिया रानी
    अखियाँ माँ की है भीगी-भीगी
    दिल है बहुत उदास
    माँगती है दुआएं रब से
    दे देना तुम खुशियाँ
    उसे सारे जहाँ की
    मेरी नन्ही परी को.
    भर देना तुम उसका
    दामन चाँद सितारोँ से
    वक़्त विदाई का आया
    रुकते नहीं माँ के आँखों से आँसू
    देती है बिटिया को यही सीख
    घर माँ-बाप का तेरा ही घर है
    न तू हुई पराई है
    बेटी तुम तो रौनक हो
    मेरे घर आँगन की
    तुमसे रोशन मेरा जहाँ है
    देना प्यार तुम
    अपने सास-ससुर को
    माँ-बाप से ज्यादा
    देवर-ननदों को समझना
    अपने भाई-बहनों की तरह
    प्यार ही प्यार मिलेगा तुम्हे
    अपने ससुराल में
    घर अपने पिया का रोशन
    तुम अपने संस्कारो से करना
    न सहना तुम अत्याचार कभी
    हो तुम रूप दुर्गा का
    ये बिछियां, पायल, चूड़ी
    बिंदिया और मंगलसूत्र को
    न समझना तुम इसे
    जंजीर अपने पैरों की
    पहनाये है हमने तुम्हे
    गहने शिक्षा के
    अपनी इच्छाओ, अरमानों का
    करना तुम सम्मान हमेशा
    खुश हो जो तुम
    तभी दे पाओगी परिवार
    में खुशियाँ सबको
    देना प्यार और सम्मान
    तुम सबको
    जो हो कभी उदास तुम
    न समझना खुद को
    कभी अकेली
    दौड़ के आ जाना तुम
    मेरी बाहों में सिमट जाना
    अँखियाँ माँ की करती है
    तेरा ही इंतज़ार हमेशा
    रहना तुम खुश हमेशा
    जीवन में
    यही आशीर्वाद है मेरा
    मुस्कुराहट के मोती बिखेरना
    तुम सबके जीवन में
    नाजों में पली मेरी
    बिटिया रानी
    आज दुल्हन बनी है
    करके सोलह श्रृंगार
    सात फेरो के सात
    वचनों को लेकर
    घर पिया के चली है
    – ज्योति थावानी
  • अब विदा लेती हूँ – Vidai Samaroh Par Kavita – विदाई कविताएं

  • मैं अब विदा लेती हूँ
    हां मैं अब विदा लेती हूँ
    इस घर से मेरी विदाई
    मात्र एक रस्म है
    लेकिन एहसास लिए
    हमेशा यह मेरा बसेरा ही होगा
    मैं इस विदाई के क्षण
    शुक्रिया करती हूँ
    मेरे बापू का
    जिन्होंने हमेशा
    मुझे लाड प्यार की
    अच्छी परवरिश दी
    अच्छे बुरे की समझ दी
    मेरी मां जिन्होंने
    मुझे हर छोटी बड़ी चीजों की सीख दी
    मेरे भाइयों का
    जिन्होंने ने मेरी हर जिद पूरी की
    मेरी भाभी का
    जिन्होंने मुझे एहसास कराया कि
    शादी के बाद भी मैं अपनी ही रहूंगी
    मेरी मां मेरे पिता का ख्याल
    अब भाभी रखेंगी
    और मेरे परिवार को
    प्यार की डोर से बांधकर रखेंगी
    और अब मैं विदा लेती हूँ
    पर यह शक ना रखना
    कि इस घर पर अब हक ना होगा
    बेशक दो-दो कुल की इज्जत हूँ
    और दो-दो परिवार की जिम्मेदारी है
    बल्कि आज से मैं तो
    अब इन दोनों परिवारों की
    प्यार और दुलार हूँ
    और अब मैं विदा लेती हूँ.
    – By sapna dhanwaani

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One comment

  1. Jamshed Khan

    विदाई समारोह पर बहुत अच्छी कवितायेँ पेश की हैं आपने धन्यवाद share करने के लिए!

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